EPF withdrawal myths: EPF विड्रॉल से जुड़े 7 मिथ, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे इन पर भरोसा?
EPF withdrawal myths: EPF निकालने को लेकर सोशल मीडिया पर कई मिथक फैल रहे हैं। जानिए सच क्या है और कैसे आप अपनी मेहनत की कमाई और पेंशन को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए आसानी से PF निकाल सकते हैं।
कई लोगों को लगता है कि EPFO ने पैसा निकालना मुश्किल बना दिया है, जबकि हकीकत इससे उलट है।
EPF withdrawal myths: सोशल मीडिया पर EPF (Employees Provident Fund) से जुड़ी कई अफवाहें फैल रही हैं। बहुत से सैलरीड लोग सोच रहे हैं कि EPFO ने हाल ही में EPF विड्रॉल से जुड़े नियमों में जो बदलाव किए हैं, उससेअब अपनी ही जमा रकम निकालना मुश्किल हो जाएगा। जबकि हकीकत इससे काफी अलग है। EPFO और सरकार ने खुद आगे आकर इन गलतफहमियों को दूर किया है। आइए जानते हैं ऐसे 7 बड़े मिथक और उनके पीछे की सच्चाई।
मिथक 1: नौकरी छूटने के बाद एक साल तक पैसा नहीं मिलेगा
सच्चाई: अगर आपकी नौकरी चली जाती है तो आप तुरंत अपने PF बैलेंस का 75% निकाल सकते हैं। पहले यह रकम केवल आपके योगदान से मिलती थी, लेकिन अब इसमें नियोक्ता (Employer) का योगदान और ब्याज भी शामिल रहेगा। बाकी 25% रकम एक साल बाद फाइनल सेटलमेंट में निकाली जा सकती है।
EPFO ने ये बदलाव इसलिए किया ताकि अगर आप 12 महीने के भीतर दोबारा नौकरी पा जाएं तो आपकी सर्विस में ब्रेक न आए। श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि पहले बार-बार PF निकालने से 'Service Break' हो जाता था और कर्मचारी पेंशन के हकदार नहीं रह जाते थे। अब नया नियम इस गलती को रोकता है और कर्मचारियों की सर्विस और पेंशन दोनों सुरक्षित रहती हैं।
मिथक 2: बेरोजगार होने पर PF नहीं निकाल पाएंगे
सच्चाई: बेरोजगार होने की स्थिति में आप PF का 75% हिस्सा तुरंत निकाल सकते हैं। बाकी 25% रकम एक साल बाद बिना किसी परेशानी के मिल जाएगी।
मिथक 3: 25% रकम हमेशा के लिए EPFO में फंस जाएगी
सच्चाई: ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह रकम सिर्फ रिटायरमेंट फंड को सुरक्षित रखने के लिए रखी जाती है। अगर 100% पैसा तुरंत निकालने की छूट दी जाए तो इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य यानी रिटायरमेंट सुरक्षा खत्म हो जाएगा।
EPFO के आंकड़ों के मुताबिक, बार-बार निकासी के कारण 50% कर्मचारियों के पास रिटायरमेंट के वक्त ₹20,000 से भी कम रकम बची थी। इसलिए अब 25% हिस्सा बनाए रखने से कर्मचारियों को कंपाउंडिंग का फायदा मिलेगा और रिटायरमेंट के समय मजबूत फंड तैयार होगा।
मिथक 4: कुछ समय तक योगदान न करने पर परिवार को कोई फायदा नहीं मिलेगा
सच्चाई: EPFO के मुताबिक, अगर किसी सदस्य ने तीन साल तक योगदान नहीं किया है, तब भी अगर उसने पेंशन फंड नहीं निकाला है, तो उसके परिवार को पेंशन का लाभ मिलता रहेगा।
मिथक 5: पेंशन के नियम सख्त हो गए हैं
सच्चाई: हकीकत यह है कि नए नियमों से सर्विस कंटिन्यूटी बनी रहती है, जिससे भविष्य में मिलने वाला पेंशन और फाइनल सेटलमेंट दोनों बढ़ जाते हैं। यानी अब सिस्टम पहले से ज्यादा स्थिर और कर्मचारी-हितैषी है।
मिथक 6: एक साल बेरोजगार रहने के बाद भी सिर्फ 75% ही निकाल पाएंगे
सच्चाई: नहीं। अगर आप एक साल तक बेरोजगार रहते हैं तो पूरा PF बैलेंस निकाल सकते हैं।
मिथक 7: EPFO ने पैसा निकालना मुश्किल बना दिया है
सच्चाई: असल में अब निकासी पहले से ज्यादा आसान हो गई है। अब आप न सिर्फ अपने योगदान से बल्कि नियोक्ता के योगदान से भी 75% तक पैसा निकाल सकते हैं। और सबसे बड़ी बात, आपको कोई कारण बताने की जरूरत नहीं है।
नए EPF नियम कर्मचारियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं। अब आपको ज्यादा लचीलापन, बेहतर ब्याज और मजबूत रिटायरमेंट फंड तीनों फायदे एक साथ मिलते हैं। साथ ही, आपका पेंशन का हक भी काफी हद तक सुरक्षित हो गया है।