PF पर मिलने वाले ब्याज दर को लेकर आई बड़ी खबर, अलग से बन रहा है एक रिजर्व फंड! जानें पूरी डिटेल

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों को जल्द ही एक बड़ी खुशखबरी मिलन वाली है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) 2024-25 के ब्याज दरों को लेकर सरकार एक बड़ी तैयारी कर रही है। सरकार अब EPFO के लिए एक 'ब्याज इस्टेब्लाइजेशन रिजर्व फंड' बनाने पर विचार कर रही है। इस फंड से EPFO मेंबर्स को एक बड़ा फायदा होने वाला है

अपडेटेड Feb 17, 2025 पर 6:26 PM
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EPFO के करोड़ों सदस्यों को जल्द ही बड़ी खुशखबरी मिलने वाली है

EPFO News : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों खाता धारकों को सरकार जल्द ही एक बड़ी खुशखबरी देने वाली है। सरकार अब EPFO के लिए एक 'ब्याज इस्टेब्लाइजेशन रिजर्व फंड' (Interest Stabilisation Reserve Fund) बनाने पर विचार कर रही है। इसका मकसद EPFO के करोड़ सदस्यों को उनके प्रोविडेंट फंड (PF) योगदान पर फिक्स इंटरेस्ट रेट देना है।

सरकार उठा रही ये बड़ा कदम

सरकार अब यह तरीका तलाश रही है जिससे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सदस्य बाजार के उतार-चढ़ाव से बचकर फिक्स ब्याज दरें पा सकें। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य 6 करोड़ से ज्यादा खाता धारकों को फायदा पहुंचाना है, जो अपनी रिटायरमेंट सुरक्षा के लिए ईपीएफओ पर निर्भर हैं। अधिकारियों ने बताया कि, श्रम और रोजगार मंत्रालय एक इंटरनल स्टडी कर रहा है ताकि ब्याज स्थिरीकरण रिजर्व फंड बनाया जा सके। इस फंड का लक्ष्य यह है कि ईपीएफओ के ग्राहक अपने भविष्य निधि पर स्थिर ब्याज दरें पा सकें, चाहे बाजार में उतार-चढ़ाव हो।


मिलेगा फिक्स ब्याज दर!

योजना के तहत सरप्लस ब्याज को एक रिजर्व फंड में डाला जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि ग्राहकों को फिक्स ब्याज दरें मिलें, भले ही ईपीएफओ की इंटरेस्ट इनकम घट जाए। यह कदम बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण ब्याज दरों में तेज बदलावों को कम करेगा। हालांकि यह पहल अभी शुरुआती चरण में है लेकिन इसे इस साल के आखिर तक इसे फाइनल टच दिए जाने की संभावना है। ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्ट से मंजूरी मिलने के बाद इसे 2026-27 से लागू किया जा सकता है।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पिछले कुछ वर्षों में ईपीएफओ की ब्याज दरों में बदलाव आया है। 1952-53 में यह 3% थी, जो 1989-90 में बढ़कर 12% हो गई थी। ये इंटरेस्ट रेट अब तक की सबसे अधिक दर है। इसके बाद यह दर घटकर 9.5% (2001-02) और फिर 8.5% (2005-06) हो गई। 2010-11 में ब्याज दर फिर बढ़कर 9.5% हो गई लेकिन 2011-12 में घटकर 8.25% और 2021-22 में यह 8.10% तक पहुंच गई। फिलहाल 2022-23 में ब्याज दर थोड़ी बढ़कर 8.15% हो गई है।

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