नए साल की शुरुआत अपने फाइनेंशियल प्लान को रिव्यू करने का सबसे सही वक्त है। आप अपनी सेविंग्स, इनवेस्टमेंट, डेट को लेकर प्लानिंग कर सकते हैं। टैक्स के नियमों में बदलाव की वजह से भी आपको अपने इनवेस्टमेंट प्लान की दिशा बदलनी पड़ सकती है।
नए साल की शुरुआत अपने फाइनेंशियल प्लान को रिव्यू करने का सबसे सही वक्त है। आप अपनी सेविंग्स, इनवेस्टमेंट, डेट को लेकर प्लानिंग कर सकते हैं। टैक्स के नियमों में बदलाव की वजह से भी आपको अपने इनवेस्टमेंट प्लान की दिशा बदलनी पड़ सकती है।
शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म गोल पर करें पुनर्विचार
एफपीएसबी इंटरनेशनल के सीईओ Dante De Gori ने कहा कि इनवेस्टर्स अपने शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल गोल पर पुनर्विचार कर सकते हैं। उन्हें देखना होगा कि उनके गोल्स उनके मौजूदा प्रायरिटीज और लाइफ स्टेजेज से मेल खाते हैं या नहीं। इससे उनका फाइनेंशियल प्लान ज्यादा स्ट्रॉन्ग हो सकता है।
आपको रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से निवेश करना चाहिए
पहले इमर्जेंसी फंड, नियर टर्म एक्सपेंसेज और डेट मैनेजमेंट पर फोकस करना ठीक रहेगा। इसके बाद लॉन्ग टर्म ऑब्जेक्टिव को रिव्यू किया जा सकता है। इसमें घर खरीदने का प्लान, बच्चों का एजुकेशन और वेल्थ क्रिएशन शामिल हैं। गोरी ने कहा कि इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी को रिव्यू करना भी जरूरी है। इससे पता चलेगा कि इनवेस्टर जो निवेश कर रहा है वह रिस्क लेने की उसकी क्षमता से मैच करता है या नहीं।
टैक्स की नई रीजीम का इस्तेमाल करने जा रहे हैं तो निवेश में बदलाव करना होगा
उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट कंट्रिब्यूशन पर भी पुनर्विचार करने का यह सही समय है। इनवेस्टर को यह देखना होगा कि उसे टैक्स से जुड़ा निवेश करने की जरूरत है या नहीं। पिछले कुछ सालों में कई इनवेस्टर्स ने इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम की जगह नई रीजीम का इस्तेमाल शुरू किया है। नई रीजीम में डिडक्शंस और एग्जेम्प्शन नहीं मिलते हैं।
टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट में लॉक-इन पीरियड होता है
अगर आप अगले वित्त वर्ष से नई रीजीम का इस्तेमाल करने का मन बनाया है तो फिर आपको टैक्स-सेविंग्स से जु़ड़ा निवेश करने की जररूत नहीं है। म्यूचुअल फंड्स की टैक्स स्कीम इसका उदाहरण है। म्यूचुअल फंड की टैक्स स्कीम की जगह आप नॉर्मल स्कीम में निवेश कर सकते हैं। नॉर्मल स्कीम में टैक्स सेविंग्स स्कीम की तरह तीन साल का लॉक-इन पीरियड नहीं होता है।
ज्यादा इंटरेस्ट रेट वाले पर्सनल लोन को क्लोज करा सकते हैं
अगर आपने कोई पर्सनल लोन लिया है और उसका इंटरेस्ट रेट ज्यादा है तो आप उसे तय समय से पहले बंद करा सकते हैं। इसके लिए आप सेविंग्स अकाउंट में पड़े बैलेंस का इस्तेमाल कर सकते हैं। सेविंग्स अकाउंट में बैलेंस पर काफी कम इंटरेस्ट मिलता है, जबकि पर्सनल लोन का सालाना इंटरेस्ट 11 से 18 फीसदी तक होता है।
हर साल सिप में कम से कम 10 फीसदी की वृद्धि जरूरी है
हर साल इनवेस्टमेंट के अमाउंट को बढ़ाना जरूरी है। इससे फाइनेंशियल गोल्स तक पहुंचने में आसानी होती है। आप अपने सिप अमाउंट को बढ़ा सकते हैं। सिप का अमाउंट 10 फीसदी भी हर साल बढ़ाने से लंबी अवधि के रिटर्न पर बड़ा असर पड़ता है। कई लोग सिप का अमाउंट हर साल नहीं बढ़ाते हैं, जिससे वह कंपाउंडिंग का फायदा उठाने से चूक जाते हैं।
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इमर्जेंसी फंड का इस्तेमाल किया है तो उसे बढ़ाना पड़ेगा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्जेंसी फंड को रिव्यू करना भी जरूरी है। कई बार इमर्जेंसी फंड का इस्तेमाल करना पड़ता है। इससे उसका बैलेंस कम हो जाता है। अगर आपके इमर्जेंसी फंड का बैलेंस कम है तो उसे फिर से पुराने लेवल या उससे ज्यादा करने के बारे में आपको सोचना होगा। इमर्जेंसी फंड की जरूरत कब पड़ जाए इसके बारे में हमें पता नहीं होता है।
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