सेल्फ-एंप्लॉयड लोगों की इनकम रेगुलर नहीं होती है। किसी महीने उन्हें ज्यादा इनकम होती है तो किसी महीने उन्हें कम इनकम होती है। इसलिए नौकरी करने वाले लोगों के मुकाबले उन्हें फाइनेंशियल प्लान बनाने में मुश्किल आती है। लेकिन, कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो यह काम आसान हो जाता है। मनीकंट्रोल कुछ ऐसी बातें बता रहा है, जिसका ध्यान रख फ्रीलांसर, गीग वर्कर्स और ऐसे लोग फाइनेंशियल प्लानिंग कर सकते हैं, जिन्हें कभी ज्यादा तो कभी कम इनकम होती है।
फाइनेंशियल प्लानिंग से पहले आपके अपने बुनियादी खर्च (Basic Expenditure) का कैलकुलेशन करना होगा। इसके बाद आपको एक बेसलाइन बजट बनाना होगा। बेसलाइन बजट का मतलब ऐसे बजट से है, जिसमें सबसे जरूरी खर्च शामिल होते हैं। इनमें घर का किराया, यूटिलिटीज पर होने वाले खर्च, खानेपीने की चीजों पर खर्च, ट्रांसपोर्टेशन और लोन की ईएमआई शामिल हैं। बेसलाइन बजट बनाने के लिए आप अपने छह महीनों के औसत खर्च को ध्यान में रख सकते हैं।
ऐसे लोगों के लिए इमर्जेंसी फंड ज्यादा जरूरी है, जिनकी इनकम रेगुलर नहीं है। इसकी वजह यह है कि कई बार ऐसी स्थितियां सामने आ जाती हैं, जो हमारी सेविंग्स खत्म कर देती हैं। बीमार पड़ने पर अस्पताल में इलाज का खर्च इसका उदाहरण है। हमें पहले से इस खर्च का अंदाजा नहीं होता है। इमर्जेंसी फंड ऐसी स्थितियों से निपटने में आपकी मदद कर सकता है। यह इमर्जेंसी फंड 3-6 महीनों के खर्च के लिए पर्याप्त होना चाहिए। आप हर महीने इनकम से थोड़े पैसे निकालकर कुछ महीनों में इमर्जेंसी फंड तैयार कर सकते हैं।
ऐसे लोग जिनकी इनकम रेगुलर नहीं है, वे सेविंग्स के लिए मंथली टारगेट तय नहीं कर सकते। इसकी जगह उनके लिए सालाना टारगेट तय करना आसान है। उदाहरण के लिए आप सालाना 2 लाख रुपये सेविंग्स का टारगेट तय कर सकते हैं। अगर आप म्यूचुअल फंड्स, पीपीएफ और बैंक एफडी के जरिए सेविंग्स करना चाहते हैं तो आपको 2 लाख रुपये को इन तीनों के बीच बांटना होगा। जैसे आप 1 लाख रुपये का निवेश म्यूचुअल फंड में कर सकते हैं। 50-50 हजार रुपये का निवेश पीपीएफ और बैंक एफडी में कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड में आप एकमुश्त निवेश कर सकते हैं। जिस महीने आपकी इनकम ज्यादा हो उस महीने आप यह निवेश कर सकते हैं।
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4. इनकम के हिसाब से करें खर्च
आपको खर्च करने से पहले अपने बैंक अकाउंट में बचे पैसे का ध्यान रखना होगा। इसका मतलब है कि आपको अचानक किसी बड़ी खरीदारी से बचना होगा। कई बार व्यक्ति क्रेडिट कार्ड के जरिए अचानक बड़ी खरीदारी कर लेता है। बाद में उसे क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाने में दिक्कत आती है। इससे उनके कर्ज के जाल में फंसने का डर बढ़ जाता है। सेल्फ-इंप्लॉयड लोगों को क्रेडिट कार्ड के कर्ज के जाल में फंसने से बचना चाहिए।