Fixed Deposit: एक या कई FD? किसमें मिलेगा ज्यादा इंटरेस्ट, जानें दोनों के फायदे और नुकसान

Fixed Deposit: आज सिर्फ पैसा कमाना ही नहीं, उसे सही तरीके से संभालना भी जरूरी हो गया है। महंगाई के दौर में सिर्फ सेविंग अकाउंट पर भरोसा करना काफी नहीं है। ऐसे में FD आज भी आम लोगों की पहली पसंद बनी हुई है

अपडेटेड Dec 24, 2025 पर 3:43 PM
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Fixed Deposit: आज सिर्फ पैसा कमाना ही नहीं, उसे सही तरीके से संभालना भी जरूरी हो गया है।

Fixed Deposit: आज सिर्फ पैसा कमाना ही नहीं, उसे सही तरीके से संभालना भी जरूरी हो गया है। महंगाई के दौर में सिर्फ सेविंग अकाउंट पर भरोसा करना काफी नहीं है। ऐसे में FD आज भी आम लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। लेकिन सवाल यह है कि FD कैसे करें। एक बड़ी FD या कई छोटी FD? किसमें ज्यादा इंटरेस्ट मिलेगा? यही फैसला तय करता है कि जरूरत के वक्त आपका पैसा कितना आसानी से काम आएगा और आपकी सेविंग कितनी सेफ रहेगी।

FD आज भी क्यों है भरोसेमंद?

भारत में बैंक और NBFC 7 दिन से लेकर 10 साल तक की पीरियड के लिए FD ऑफर करते हैं। रिस्क कम होने की वजह से बुजुर्ग, नौकरीपेशा और रिटायर लोग FD को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन FD में बेहतर रिटर्न पाने के लिए सिर्फ पैसा लगाना काफी नहीं, सही रणनीति भी जरूरी है।


एक FD या कई FD – किसमें मिलेगा ज्यादा फायदा?

अक्सर निवेशकों के मन में यह सवाल आता है कि अगर आपके पास 7 लाख रुपये हैं, तो क्या एक ही FD करानी चाहिए या 1-1 लाख की सात FD बनानी चाहिए? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर ब्याज दर और पीरियड सामान तो मैच्योरिटी पर मिलने वाली कुल रकम दोनों ही मामलों में लगभग बराबर होगी। फर्क पड़ता है सिर्फ फ्लेक्सिबिलिटी और जरूरत के समय पैसे मिलता है या नहीं।

एक बड़ी FD के फायदे

अगर आप सादगी पसंद करते हैं और लंबे समय तक पैसे की जरूरत नहीं है, तो एक FD आसान विकल्प हो सकता है। सिर्फ एक रसीद, एक मैच्योरिटी डेट और कम झंझट। जो लोग लगाओ और भूल जाओ वाली सोच रखते हैं, उनके लिए यह तरीका सही है।

एक बड़ी FD की कमियां

समस्या तब आती है जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए। मान लीजिए आपको सिर्फ 50 हजार रुपये चाहिए, लेकिन एफडी 7 लाख रुपये की है। ऐसे में पूरी FD तोड़नी पड़ेगी और पूरे अमाउंट पर पेनल्टी लगेगी। इससे आपका रिटर्न कम हो जाता है। इसके अलावा DICGC नियमों के तहत एक बैंक में जमा अमाउंट पर सिर्फ 5 लाख रुपये तक का ही इंश्योरेंस कवर मिलता है। यानी 7 लाख रुपये एक ही बैंक में रखने पर 2 लाख रुपये बिना बीमा के रह जाते हैं।

क्यों कई छोटी FD को कहते हैं स्मार्ट विकल्प?

कई एक्सपर्ट्स निवेश को अलग-अलग FD में बांटना ज्यादा समझदारी मानते हैं। अगर आप 7 लाख को 1-1 लाख की सात FD में बांटते हैं, तो आपको ज्यादा कंट्रोल मिलता है। जरूरत पड़ने पर आप सिर्फ एक FD तोड़ सकते हैं, बाकी पैसा सुरक्षित रहता है और उस पर ब्याज मिलता रहता है। पेनल्टी भी सिर्फ उसी FD पर लगेगी, पूरी रकम पर नहीं। अगर आप इन FD को दो अलग-अलग बैंकों में बांट दें, तो पूरा पैसा DICGC इंश्योरेंस के दायरे में आ सकता है, जिससे जोखिम और कम हो जाता है।

ब्याज दर बदलने पर भी फायदा

कई FD होने का एक और फायदा है। अगर आपने आज 7% पर FD कराई और अगले साल ब्याज दर 8% हो जाए, तो आप एक छोटी FD तोड़कर नई दर पर निवेश कर सकते हैं। एक लंबी FD में यह लचीलापन नहीं मिलता।

कई FD की कमी क्या है?

इस तरीके की सबसे बड़ी कमी है मैनेजमेंट। कई FD की रसीदें, अलग-अलग मैच्योरिटी डेट—इन सब पर नजर रखना थोड़ा झंझट वाला हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो सादगी चाहते हैं।

आखिर कौन-सा तरीका चुनें?

अगर आपके पास पहले से इमरजेंसी फंड है, पैसों की तुरंत जरूरत नहीं पड़ेगी और आप बिना झंझट निवेश चाहते हैं, तो एक FD ठीक है। लेकिन अगर आप लचीलापन चाहते हैं, जोखिम कम करना चाहते हैं और जरूरत पड़ने पर आसानी से पैसा निकालना चाहते हैं, तो कई FD बनाना बेहतर विकल्प है।

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