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Ganesh Chaturthi 2026: गृहस्थों को कौन से गणपति की मूर्ति घर में नहीं लानी चाहिए? गणेश चतुर्थी से पहले जानें मूर्ति स्थापना के ये नियम

Ganesh Chaturthi 2026: इस साल 14 सितंबर, सोमवार को गणपति बप्पा अपने भक्तों के बीच आने वाले हैं। इस पर्व के लिए बप्पा की मूर्ति घर लाने की तैयारी कर रहे भक्तों को मूर्ति के इन नियमों के बारे में जरूर जान लेना चाहिए। आइए जानें गणेश भगवान की पूजा और मूर्ति को लेकर क्या हैं वास्तु के नियम

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 10, 2026 पर 8:43 PM
Ganesh Chaturthi 2026: गृहस्थों को कौन से गणपति की मूर्ति घर में नहीं लानी चाहिए? गणेश चतुर्थी से पहले जानें मूर्ति स्थापना के ये नियम
गौरी सुत गणेश भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को धरती पर आते हैं।

Ganesh Chaturthi 2026: एक बार फिर साल का वह समय पास आ रहा है, जब गणेश भगवान अपने भक्तों के बीच 10 दिनों के लिए पधारते हैं। भाद्रपद का महीना चल रहा है और कल से इस माह का शुक्ल पक्ष शुरू हो जाएगा। भक्तों के प्यारे गौरी सुत गणेश भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को धरती पर आते हैं। भक्तों ने उनके स्वागत की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पंडालों से लेकर घरों में बप्पा को आसीन करने के लिए लोग मूर्तियां चुन रहे हैं। लेकिन गणेश भगवान की मूर्ति चुनने और उनकी पूजा के कुछ विशेष नियम हैं, जिनकी अनदेखी कष्ट का कारण बन सकती है। गृहस्थ भक्तों को खासतौर से गणेश भगवान की मूर्ति चुनते समय सावधानी बरतनी चाहिए। आइए जानें क्या हैं बप्पा की मूर्ति से जुड़े ये नियम और उनकी पूजा किस दिशा में करनी उत्तम मानी जाती है?

गणपति बप्पा की मूर्ति चुनते समय ये बातें ध्यान रखें

गणेश जी की कैसी मूर्ति चुनें : घर में गणेश चतुर्थी के लिए बैठी हुई गणेशजी की मूर्ति लाना शुभ माना जाता है। विराजमान मुद्रा स्थिरता, सुख और शांति का प्रतीक मानी जाती है। गणेशजी का चेहरा शांत और प्रसन्न मुद्रा वाला हो। मूर्ति खंडित या टूटी हुई नहीं होनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में चार भुजाओं वाले गणेशजी के हाथों में पाश, अंकुश, मोदक और अभय मुद्रा को भी शुभ स्वरूप माना गया है।

गणेशजी की सूंड की दिशा है अहम : दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेशजी की पूजा के नियम बेहद कठोर होते हैं और थोड़ी सी भी चूक होने पर माना जाता है कि फल विपरीत हो सकता है। इन्हें दक्षिणामुखी कहा जाता है और सूर्य तत्व का प्रभाव होता है। इन्हें सिद्धिविनायक स्वरूप से जोड़ा जाता है और इनकी पूजा में विशेष नियमों व अनुशासन का पालन करने की मान्यता है। दक्षिणामुखी गणेशजी को गृहस्थ जीवन में घर पर स्थापित करने से बचा जाता है।

घर के लिए बेस्ट हैं वाममुखी गणपति : गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति बप्पा की स्थापना के लिए मूर्ति खरीदते समय उनकी सूंड की दिशा जरूर देखनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु के अनुसार घर के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी, यानी वाममुखी गणपति की प्रतिमा को शुभ माना जाता है और इनमें चंद्र तत्व का प्रभाव माना गया है। इनकी पूजा सरल होती है, जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। ऐसी मूर्ति को गृहस्थ जीवन के लिए सरल और सौम्य स्वरूप माना जाता है।

गणेशजी की मूर्ति का रंग : मूर्ति के रंग को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं। सिंदूरी, सफेद और पीले रंग की गणेश प्रतिमा को शुभ माना जाता है। कुछ मान्यताओं में हल्का पीला, सफेद, क्रीम और हरा रंग भी सकारात्मक माना गया है। इसलिए मूर्ति खरीदते समय बहुत गहरे या असामान्य रंगों के बजाय पारंपरिक और सौम्य रंगों वाली प्रतिमा को प्राथमिकता दी जा सकती है।

मूषक और मोदक भी हों साथ : गणेशजी की प्रतिमा खरीदते समय यह भी देखें कि उनके साथ मूषक यानी वाहन बना हुआ हो और हाथ में मोदक या लड्डू हो। धार्मिक मान्यताओं में मूषक भगवान गणेश का वाहन और मोदक उनका प्रिय भोग माना जाता है। प्रतिमा का पूरा स्वरूप सुंदर, संतुलित और साफ-सुथरा होना चाहिए।

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