सोना और चांदी लगातार 3 से 5 साल के बुल फेज में जा रहे हैं। इसकी वजह मैक्रोइकोनॉमिक ट्रेंड्स, स्ट्रक्चरल डिमांड और निवेशकों के बदलते व्यवहार हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि मेटल्स की मौजूदा रैली फंडामेंटल्स से प्रेरित है, जो शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग वाले पिछले साइकिल से अलग है। यह बात एमके वेल्थ मैनेजमेंट ने अपनी लेटेस्ट नेविगेटर मैगजीन में कही है। एमके वेल्थ ने सोने और चांदी को सपोर्ट करने वाले कई खास कारणों की ओर इशारा किया है। ये कुछ इस तरह हैं...
इंटरेस्ट रेट ट्रेंड्स और अमेरिकी डॉलर: प्रमुख ब्याज दर में संभावित कटौती और डॉलर के नरम होने की उम्मीदों ने कीमती मेटल्स को बढ़ावा दिया है।
केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद: 2022 से केंद्रीय बैंकों और इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की ओर से सोने और चांदी की लगातार खरीदारी ने कीमतों को टिकाऊ सपोर्ट दिया है।
स्ट्रक्चरल डिमांड: रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स में चांदी की डिमांड बढ़ रही है।
एमके वेल्थ के रिसर्च हेड जोसेफ थॉमस का कहना है, "यह रैली इनवेस्टर्स् के ग्लोबल लेवल पर कैपिटल एलोकेट करने के तरीके में एक स्ट्रेटेजिक बदलाव को दिखाती है। सोने और चांदी को अब शॉर्ट-टर्म हेज के बजाय कोर पोर्टफोलियो एसेट्स के तौर पर देखा जा रहा है।"
मार्केट को कैसे बदल रहा निवेशकों का व्यवहार
पहले के साइकिल्स में सट्टेबाजी का बोलबाला था। लेकिन अब निवेशक अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करने के तहत सोने और चांदी में लगातार पैसा डाल रहे हैं। कीमती धातुओं में मौजूदा तेजी को इस एलोकेशन से सपोर्ट मिल रहा है। मार्केट के इतिहास के एनालिसिस से पता चलता है कि यह मौजूदा तेजी 3 से 5 साल तक बनी रह सकती है, जिससे लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स को मौका मिल सकता है। भारतीय निवेशकों को रुपये की गिरावट से भी फायदा हुआ है, जिससे रिटर्न बढ़ा है।
अभी सोने और चांदी में कैसे निवेश करें
मौजूदा निवेशकों के लिए एमके वेल्थ की सलाह है कि डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में नपा-तुला निवेश बनाए रखें। मार्केट में गिरावट के दौरान निवेश धीरे-धीरे बढ़ाते रहें। अगर पोर्टफोलियो में सोना और चांदी का हिस्सा मिलकर, कुल एसेट्स के 25–30% से ज्यादा हो जाए तो एलोकेशन का रिव्यू करें। ऐसा इसलिए, ताकि रणनीतिक निवेश बरकरार रखते हुए प्रॉफिट बुकिंग का अंदाजा लगाया जा सके।
नए निवेशकों के लिए सलाह है कि निवेश का एक अनुशासन भरा तरीका अपनाएं। कुल पोर्टफोलियो का लगभग 5–10% सोने-चांदी में एलोकेट करें। उतारचढ़ाव कम रखने के लिए थोड़ा-थोड़ा करके निवेश करें। इसके लिए फिजिकल गोल्ड, गोल्ड और सिल्वर ETF, म्यूचुअल फंड या दूसरे मेटल-लिंक्ड प्रोडक्ट जैसे ऑप्शंस का इस्तेमाल करें।
किन फैक्टर्स से प्रभावित हो सकती है सोने-चांदी की चाल
एमके वेल्थ का कहना है कि भविष्य में सोने-चांदी की रफ्तार ग्लोबल इकोनॉमिक डेवलपमेंट पर निर्भर करती है। सपोर्ट करने वाले फैक्टर हैं- ग्लोबल ग्रोथ में कमी और नरम मॉनेटरी पॉलिसी। वहीं संभावित मुश्किलों में अमेरिका में उम्मीद से अच्छी रिकवरी या डॉलर की लगातार मजबूती शामिल है। भारतीय निवेशकों के मुनाफे पर रुपये में तेज बढ़त से असर पड़ सकता है।