अमेरिका के वेनेजुएला में की गई कार्रवाई और वहां की राजनीतिक स्थिति में अचानक आए बदलाव का असर सोने-चांदी पर कैसा रहेगा? ये सवाल ज्यादातर निवेशकों के मन में है। सोना-चांदी पहले ही अपने अब तक के पीक स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में ये राजनीतिक उथल-पुथल सोने-चांदी के दाम को फिर नए पंख देगी? इसका असर सोने-चांदी के दाम पर दिखने लगा है। अगर आज सोने-चांदी की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला है। ऐसे में अब ये देखना होगा कि गोल्ड और सिल्वर की कीमतें आगे कितनी तेज भागती हैं?
सोमवार 5 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। अमेरिका के वेनेजुएला में की गई कार्रवाई और वहां की राजनीतिक स्थिति में अचानक आए बदलाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाते हुए एक बार फिर सेफ हेवन माने जाने वाले सोने और चांदी का रुख किया।
खबरों के मुताबिक अमेरिका के Nicolas Maduro को लेकर की गई कार्रवाई के बाद वेनेजुएला में सत्ता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ाई, जिसका सीधा फायदा कीमती मेटल को मिला। 03:12 GMT पर स्पॉट गोल्ड 1.9 प्रतिशत बढ़कर 4,411 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। चांदी ने भी निवेशकों को आकर्षित किया और इसमें 4 प्रतिशत से ज्यादा की मजबूती देखने को मिली।
निवेशकों के नजरिए से देखें तो मौजूदा तेजी केवल अभी के भू-राजनीतिक तनाव का नतीजा नहीं है। बाजार में यह उम्मीद भी बनी हुई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve इस साल के अंत तक ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। कम ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर सोने और चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले एसेट्स के लिए अनुकूल माना जाता है, क्योंकि ऐसे समय में इन पर होल्डिंग कॉस्ट कम महसूस होती है।
2025 का साल पहले ही कीमती मेटल के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ है। सोने ने साल भर में करीब 64 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की, जो दशकों में सबसे बड़ी सालाना तेजी में से एक है। वहीं चांदी ने सोने से भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए लगभग 147 प्रतिशत का उछाल दिखाया। इसकी वजह न सिर्फ सुरक्षित निवेश की मांग रही, बल्कि औद्योगिक इस्तेमाल, सप्लाई की कमी और अमेरिका में इसे अहम मेटल का दर्जा मिलना भी शामिल है। आगे निवेशकों की नजर अमेरिका के प्रमुख आर्थिक आंकड़ों, खासकर नॉन-फार्म पेरोल्स पर रहेगी। इन आंकड़ों से यह संकेत मिल सकता है कि फेड आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाएगा।