धनतेरस करीब आ गया है। आप इस मौके पर गोल्ड खरीदने के बारे में सोच रहे होंगे? बार और कॉइन की शुद्धता को लेकर आपने मन में संदेह हो सकता है। उन्हें सुरक्षित रखना भी अपने आप में एक चैलेंज होता है। साथ ही उनकी रीसेल वैल्यू भी सही नहीं मिलती है। यहीं वजह है कि पिछले कुछ सालों में कई लोगों ने गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (Gold ETF), गोल्ड म्यूचुअल फंड्स (Gold MF) और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) में निवेश करना शुरू कर दिया है। जेफरीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया में परिवारों के कुल एसेट का 15.5 फीसदी गोल्ड में है। परिवारों के कुल एसेट में गोल्ड की दूसरी सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है। सबसे ज्यादा 50.7 फीसदी हिस्सेदारी रियल एस्टेट की है। बैंक डिपॉजिट्स की 14 फीसदी, इंश्योरेंस फंड्स की 5.9 फीसदी, प्रोविडेंट एंड पेंशन फंड्स की 5.8 फीसदी और शेयरों की 4.7 फीसदी है। उधर, Quantum Mutual Fund की स्टडी में बताया गया है कि पोर्टफोलियो में गोल्ड की 10-15 फीसदी हिस्सेदारी पर्याप्त है। इससे यह पता चलता है कि गोल्ड में लोगों के निवेश का लेवल ठीक है।
गोल्ड के डिजिटल माध्यम में निवेश की दिलचस्पी बढ़ी
इंडिया में आम तौर पर लोग गोल्ड ज्वेलरी, बार या कॉइन खरीदते हैं। लेकिन, पिछले कुछ सालों में टेक्नोलॉजी से लेकर प्रोडक्ट्स के लेवल पर जिस तरह के बदलाव आए है, उससे लोगों की दिलचस्पी गोल्ड के डिजिटल माध्यमों में बढ़ी है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के सालों में इंडिया में गोल्ड बार और कॉइन की मांग घटी है। उधर, गोल्ड ईटीएफ और SGB जैसे डिजिटल विकल्पों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। गोल्ड ईटीएफ सोने में पैसिव इनवेस्टमेंट का एक तरीका है। यह सबसे ज्यादा शुद्धता वाले सोने में इनवेस्ट करता है। आम और पर गोल्ड ईटीएफ की एक यूनिट 0.01 ग्राम सोने की होती है। गोल्ड ईटीएफ स्टॉक्स एक्सचेंज पर लिस्ट होते हैं।
लंबी अवधि के लिए SGB और गोल्ड ईटीएफ बेहतर
Gold ETF की शुरुआत 2007 में हुई थी। लेकिन, इसमें निवेश करने में ज्यादा दिलचस्पी कोविड के बाद दिखी है। जनवरी 2020 में इंडिया में गोल्ड ईटीएफ में निवेश करने वाले लोगों की संख्या करीब 4.61 लाख थी। सितंबर 2023 में यह बढ़कर 48.06 लाख हो गई है। सितंबर के अंत में Gold ETF का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 23,798 करोड़ रुपये था। SGB सरकार की तरफ से जारी किए जाने वाले बॉन्ड हैं। इसमें निवेश करने पर निवेशक को बाजार की गोल्ड की कीमतों के आधार पर रिटर्न मिलता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गोल्ड ईटीएफ और एसजीबी दोनों ही सही हैं।
एसजीबी और गोल्ड ईटीएफ के बीच फर्क
रिटर्न के लिहाज से देखा जाए तो गोल्ड ईटीएफ के मुकाबले SGB में निवेश करने में ज्यादा फायदा है। इसकी वजह यह है कि SGB में सालाना 2.5 फीसदी इंटरेस्ट मिलता है। साथ ही बॉन्ड्स को मैच्योरिटी तक रखने पर कैपिंटस गेंस पर टैक्स नहीं लगता है। लेकिन, इसकी एक कमी यह है कि SGB का अंडरलाइंड फिजिकल गोल्ड नहीं होता है। इसका मतलब है कि अगर आप अपने निवेश को फिजिकल गोल्ड में बदलना चाहें तो यह मुमकिन नहीं है। इसके साथ ही एसजीबी में आपको 8 साल तक निवेश बनाए रखना पड़ता है। हालांकि पांचवें साल से आपको एग्जिट का ऑप्शन मिलता है। लेकिन, टैक्स का फायदा तभी मिलता है जब आप अपना निवेश पांच साल तक बनाए रखते हैं।
आपको किसमें करना चाहिए निवेश?
जिन निवेशकों के पास डीमैट अकाउंट नहीं है, वे गोल्ड फंड ऑफ फंड्स के जरिए गोल्ड ईटीएफ में इनवेस्ट कर सकते हैं। इसमें SIP के जरिए निवेश करने की भी सुविधा है। इसके अलावा एसजीबी से उलट गोल्ड ईटीएफ में निवेश के लिए किसी तरह की सीमा नहीं है। इसलिए अगर आप लंबी अवधि के लिए गोल्ड में निवेश करना चाहते हैं तो गोल्ड ईटीएफ सबसे सही रहेगा।