गोल्ड और सिल्वर फंड्स ने बीते एक साल में निवेशकों को मालामाल किया है। इनमें ईटीएफ और फंड ऑफ फंड्स शामिल हैं। इसमें गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में आए उछाल का बड़ा हाथ है। गोल्ड की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। लेकिन, सिल्वर की कीमतें बीते एक साल में करीब तीन गुनी तक पहुंच गई हैं।
बीते एक साल में गोल्ड और सिल्वर ने किया है मालामाल
कई गोल्ड फंड्स ने बीते एक साल में 80 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है। इस दौरान सिल्वर ईटीएफ का रिटर्न 200 फीसदी से ज्यादा रहा है। इससे पता चलता है कि बीते एक साल में कई इनवेस्टर्स के लिए सोना और चांदी रिटर्न के प्रमुख स्रोत रहे हैं। अगर इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से तुलना की जाए तो गोल्ड और सिल्वर फंड्स का रिटर्न काफी ज्यादा रहा है।
सिल्वर ने 212 फीसदी के रिटर्न से किया है हैरान
इक्विटी लार्जकैप फंड्स का रिटर्न बीते एक साल में सिर्फ 9.12 फीसदी रहा है, जबकि इक्विटी मिडकैप फंड्स का रिटर्न 6.63 फीसदी रहा है। इक्विटी स्मॉलकैप फंड्स ने निवेशकों को इस दौरान 2.83 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है। इसके मुकाबले गोल्ड का रिटर्न 86.83 फीसदी रहा है। सिल्वर ने तो 212.71 फीसदी रिटर्न से निवेशकों को हैरान किया है।
सुरक्षित निवेश के लिए गोल्ड और सिल्वर में बढ़ी दिलचस्पी
कोटक म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर सतीश डोंडापति ने कहा, "सुरक्षित निवेश की स्ट्रॉन्ग डिमांड की वजह से गोल्ड और सिल्वर फंड्स का प्रदर्शन जोरदार रहा है। गोल्ड फंड्स ने कम उतारचढ़ाव के साथ अच्छा रिटर्न दिया है, जबकि सिल्वर फंड्स का रिटर्न और ज्यादा रहा है, लेकिन उनमें उतार-चढ़ाव भी ज्यादा रहा है। सिल्वर को इंडस्ट्रियल और स्पेकुलेटिव डिमांड का सपोर्ट मिला है।"
इंडिया में कमोडिटी में डायवर्सिफायड निवेश के सीमित मौके
स्क्रिपबॉक्स के मैनेजिंग पार्टनर सचिन जैन ने कहा, "इंडिया में कमोडिटी में सही डायवर्सिफायड निवेश के मौके सीमित हैं। गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में तेजी का फायदा उठाने के लिए गोल्ड और सिल्वर फंड्स और ईटीएफ हैं। इसके बाद ऐसे फंड्स हैं, जो मेटल, माइनिंग और एनर्जी से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। इनमें वेदांता, टाटा स्टील या दूसरे मेटल प्रोड्यूसर्स कंपनियां शामिल है। कमोडिटी की कीमतों में उछाल से इन कंपनियों को फायदा होता है।"
गोल्ड-सिल्वर में निवेश में एसेट ऐलोकेशन का ध्यान रखना चाहिए
जैन ने कहा कि इनवेस्टर्स को निवेश में एसेट-ऐलोकेशन का ध्यान रखना चाहिए। एग्रेसिव और ज्यादा एग्रेसिव इनवेस्टर्स कमोडिटीज खासकर प्रेसियस मेटल्स में 5-10 फीसदी निवेश बनाए रख सकते हैं। इससे उनका पोर्टफोलियो इनफ्लेशन, करेंसी में उतारचढ़ाव और जियोपॉलिटिकल रिस्क से कुछ हद तक सुरक्षित रहेगा। इस निवेश का मकसद रिटर्न बढ़ाना नहीं होना चाहिए। लॉन्ग टेल वेंचर के फाउंडर परमदीप सिंह का भी कहना है कि कमोडिटी का रोल डायवर्सिफिकेशन तक होना चाहिए।
इंटरनेशनल कमोडिटीज पर दांव लगाने के सीमित मौके उपलब्ध
इंडियन रिटेल इनवेस्टर्स के लिए इंटरनेशनल कमोडिटीज पर दांव लगाने के सीमित मौके हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्लोबल कमोडिटी ईटीएफ में निवेश का अभी कोई सीधा रास्ता नहीं है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत इनवेस्टर्स तय सीमा तक पैसा विदेश भेज सकते हैं। फिर ग्लोबल एक्सचेंजों के जरिए कमोडिटी ईटीएफ और फ्यूचर्स लिंक्ड प्रोडक्ट्स में निवेश कर सकते है। दूसरा तरीका फंड ऑफ फंड्स स्ट्रक्चर के जरिए इंटरनेशनल कमोडिटी में निवेश का है। लेकिन, यह ध्यान रखने की जरूरत है कि ग्लोबल फंड ऑफ फंड्स को टैक्स के लिहाज से इक्विटी फंड नहीं माना जाता है।