ज्वेलरी, डिजिटल गोल्ड या ETF, सोना खरीदने का कौन सा तरीका है बेस्ट? जानें कहां मिलेगा सबसे ज्यादा मुनाफा

Gold Investment Guide: अगर आप बहुत कम पैसे जैसे- ₹100 या ₹500 से अपने निवेश जर्नी की शुरुआत करना चाहते हैं, तो पेटीएम, अमेजन और इंस्टामार्ट जैसे प्लेटफॉर्म डिजिटल गोल्ड का ऑप्शन देते हैं। इसे खरीदना और बेचना बेहद आसान है

अपडेटेड Apr 19, 2026 पर 9:17 AM
Story continues below Advertisement
आज मार्केट में सोना खरीदने के ज्वेलरी, डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF जैसे कई ऑप्शन है

Gold Investment Guide: सोना हमेशा से भारतीयों के लिए निवेश का सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद ऑप्शन रहा है। लेकिन आज सवाल यह नहीं है कि सोना खरीदें या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि कैसे खरीदें? आज मार्केट में सोना खरीदने के कई ऑप्शन मौजूद है। इनमें प्रमुख रूप से फिजिकल ज्वेलरी, डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF है। इन तीनों के अपने फायदे और नुकसान हैं। निवेश के नजरिए से आपके लिए क्या सही है? एक्सपर्ट्स की राय के साथ आइए आपको समझाते हैं पूरा गणित।

फिजिकल गोल्ड ज्वेलरी: निवेश कम, भावनाएं ज्यादा

भारत में शादियों और त्योहारों पर गहने खरीदना एक परंपरा है, लेकिन निवेश के लिहाज से यह सबसे कम फायदेमंद है। 'मीरा मनी' के इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट रोहन गोयल बताते हैं कि गहनों पर 3% GST के साथ 8% से 25% तक 'मेकिंग चार्जेस' देने होते हैं। जब आप गहने बेचते हैं, तो मेकिंग चार्जेस और टैक्स का पैसा वापस नहीं मिलता। साथ ही शुद्धता को लेकर भी हमेशा संदेह बना रहता है। उनके अनुसार ज्वेलरी खरीदना 'यूज' के लिए अच्छा ऑप्शन है, लेकिन शुद्ध निवेश के लिए नहीं।


डिजिटल गोल्ड: छोटी शुरुआत के लिए आसान

अगर आप बहुत कम पैसे जैसे- ₹100 या ₹500 से अपने निवेश जर्नी की शुरुआत करना चाहते हैं, तो पेटीएम, अमेजन और इंस्टामार्ट जैसे प्लेटफॉर्म डिजिटल गोल्ड का विकल्प देते हैं। इसे खरीदना और बेचना बेहद आसान है। आपको सोने को संभालकर रखने या चोरी होने की चिंता नहीं करनी पड़ती। हालांकि, इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि डिजिटल गोल्ड भारत में किसी केंद्रीय अथॉरिटी जैसे- RBI या SEBI द्वारा रेगुलेटेड नहीं है। इसमें सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर हमेशा एक जोखिम बना रहता है।

DA में 2% की बढ़ोतरी से कितना होगा फायदा? जानें 50,000 की बेसिक सैलरी पर अब कितना बढ़ेगा आपका वेतन

गोल्ड ETF: सबसे स्मार्ट विकल्प

अगर आप निवेश की एफिशिएंसी और पारदर्शिता चाहते हैं, तो गोल्ड ETF सबसे बेहतर विकल्प के रूप में उभरता है। यह SEBI द्वारा रेगुलेटेड होता है और शेयर बाजार में स्टॉक की तरह ट्रेड किया जाता है। इसमें शुद्धता या चोरी का कोई डर नहीं है। रोहन गोयल के अनुसार, बजट 2024 के बाद गोल्ड ETF को 12 महीने बाद बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के तहत 12.5% टैक्स लगता है। वहीं फिजिकल और डिजिटल गोल्ड के लिए यह समय सीमा 24 महीने है। इसके लिए आपके पास एक डीमैट अकाउंट होना जरूरी है।

निवेश की मानसिकता और कंपाउंडिंग

'PNGS' के COO आदित्य मोदक गोल्ड में निवेश को लेकर एक दिलचस्प बात बताते हैं। डिजिटल गोल्ड इतना आसान है कि लोग अक्सर 10-15% मुनाफा मिलते ही उसे बेच देते हैं। इससे लंबे समय में मिलने वाले 'कंपाउंडिंग' यानी ब्याज पर ब्याज का फायदा नहीं मिल पाता। इसके विपरीत, फिजिकल गोल्ड को लोग तभी बेचते हैं जब बहुत ज्यादा जरूरत हो, इसलिए वह लंबे समय तक बना रहता है।

एक्सपर्ट्स की सलाह

अधिल शेट्टी (CEO, BankBazaar): 'मार्केट से जुड़े मुनाफे के लिए गोल्ड ETF सबसे पारदर्शी है। ज्वेलरी को सिर्फ इस्तेमाल के लिए ही खरीदें क्योंकि इसकी रीसेल वैल्यू कम होती है।'

डॉ. रेनिशा चैनानी (Augmont): 'छोटे और नियमित निवेश के लिए डिजिटल गोल्ड ठीक है, लेकिन लंबी अवधि में वेल्थ बनाने के लिए ETF जैसे फाइनेंशियल गोल्ड ज्यादा असरदार हैं।'

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।