Gold Outlook: मध्यपूर्व में लड़ाई के बावजूद गोल्ड में सुस्ती, क्या अभी निवेश करें या और गिरने का इंतजार करें?

27 फरवरी को सोने का भाव 1,59,097 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 17 मार्च को यह 1,56,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। हालांकि, इस बीच सोने की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 2 मार्च को यह चढ़कर 1,67,471 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था

अपडेटेड Mar 17, 2026 पर 3:57 PM
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साल 2025 में गोल्ड की कीमतें करीब 75 फीसदी चढ़ी थीं।

अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई से सोने की कीमतें चढ़ने की जगह गिरी हैं। 27 फरवरी को सोने का भाव 1,59,097 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 17 मार्च को यह 1,56,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। हालांकि, इस बीच सोने की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 2 मार्च को यह चढ़कर 1,67,471 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था। मध्यपूर्व की लड़ाई 28 फरवरी को शुरू हुई थी।

मध्यपूर्व में लड़ाई के बावजूद गोल्ड में तेजी नहीं

4 मार्च को सोना गिरकर 1,62,548 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया था। 5 मार्च से 11 मार्च के बीच इसकी कीमतें 1,60,000 रुपये के आसपास बनी रहीं। बीच-बीच में रिकवरी आई, लेकिन वह टिक नहीं सकी। आम तौर पर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने या दुनिया में अनिश्चितता बढ़ने पर सोने में तेजी आती है। लेकिन, इस बार मध्यपूर्व की लड़ाई बढ़ने के बावजूद सोने की कीमतों में तेजी नहीं आई है।


डॉलर में मजबूती का गोल्ड की कीमतों पर असर

साल 2025 में गोल्ड की कीमतें करीब 75 फीसदी चढ़ी थीं। लेकिन, 2026 में गोल्ड की चमक फीकी पड़ती दिख रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह डॉलर में मजबूती है। बॉन्ड यील्ड में भी तेजी दिखी है। उधर, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट में कमी करने की उम्मीद घटी है। डॉलर में मजबूती से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसका असर गोल्ड की कीमतों पर पड़ता है। फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट नहीं घटाने की उम्मीद का असर भी सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। प्रॉफिट-बुकिंग की वजह से भी सोने की कीमतें चढ़ नहीं पा रहीं।

गोल्ड की कीमतों में गिरावट के आसार नहीं

फेडरल रिजर्व की एफओएमसी की दो दिन की बैठक 17 मार्च को शुरू होगी। इसके नतीजे 18 मार्च को आएंगे। माना जा रहा है कि इस बार फेड इंटरेस्ट रेट में कमी नहीं करेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले साल तेज उछाल के बाद गोल्ड में कंसॉलिडेशन दिख रहा है। जियोपॉलिटिकल टेंशन को देखते हुए गोल्ड में गिरावट की उम्मीद नहीं है। हालांकि, कुछ समय तक कीमतें सीमित दायरे में बनी रह सकती हैं।

डायवर्सिफिकेशन के लिए गोल्ड में निवेश जरूरी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनवेस्टर्स को गिरावट आने पर घबराहट में गोल्ड बेचने से बचना चाहिए। इसकी जगह उन्हें लंबी अवधि के स्ट्रेटेजी पर फोकस करना चाहिए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वाइस-प्रेसिडेंट अक्षा कंबोज ने कहा कि कीमती मेटल्स इनफ्लेशन और जियोपॉलिटिकल टेंशन की स्थिति में हेजिंग में मदद करते हैं। इसलिए पोर्टफोलियो में इन्हें रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इनवेस्टर्स एकमुश्त की जगह धीरे-धीरे गोल्ड में निवेश कर सकते हैं।

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इनवेस्टर्स धीरे-धीरे गोल्ड में कर सकते हैं निवेश 

इनवेस्टर्स के पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी 10-15 फीसदी तक होनी चाहिए। इससे पोर्टफोलियो के डायवर्सिफिकेशन में मदद मिलती है। ऐसे इनवेस्टर्स जिनके पोर्टफोलियो में गोल्ड नहीं है या काफी कम है, वे धीरे-धीरे गोल्ड में निवेश कर सकते हैं। इसके लिए वे गोल्ड ईटीएफ का इस्तेमाल कर सकते हैं। गोल्ड ईटीएफ में निवेश करना काफी आसान है।

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