अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई शुरू हुए 10 दिन बीत गए हैं। अभी कोई पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस बीच क्रूड की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। इसका उसर भारत जैसे देशों पर ज्यादा पड़ेगा, जो ऑयल की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट से पूरा करते है। उधर, जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने के बावजूद सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट है।
मध्यपूर्व की लड़ाई शुरू होने के बाद गोल्ड में नरमी
गोल्ड करीब 4 फीसदी गिरकर 5,166 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। इंडिया में कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स 1.61 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के नीचे है, जबकि सिल्वर फ्यूचर्स 2.77 लाख रुपये प्रति किलोग्राम है। सिल्वर में बीते 11 दिनों में 4 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है।
सोने की कीमतों पर डॉलर में मजबूत का असर
कोटक सिक्योरिटीज में एवीपी (कमोडिटी रिसर्च) कायंत चेनवाला ने कहा, "एनर्जी की कीमतें बढ़ने से डॉलर में मजबूती आ रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच डॉलर सुरक्षित निवेश का पहला जरिया बन गया है।" इधर, बाजार को लग रहा है कि क्रूड ऑयल और गैस की ऊंची कीमतों का असर इनफ्लेशन पर पड़ेगा। इससे अमेरिका में इंटरेस्ट रेट्स घटने की उम्मीदों को झटका लग सकता है।
एसेट्स में बिकवाली का असर गोल्ड पर
चेनवाला ने कहा, "इसके अलावा, लिक्विडिटी पर दबाव और मार्केट में बड़ी बिकवाली का असर शॉर्ट टर्म में बुलियन की कीमतों पर पड़ रहा है। इनवेस्टर्स मार्जिन कॉल को पूरी करने के लिए कीमती मेटल्स सहित अपने एसेट्स बेच रहे हैं। इससे गोल्ड और सिल्वर में कमजोरी दिखी है। कॉमेक्स गोल्ड और सिल्वर में बीते हफ्ते के मुकाबले कमजोरी दिखी है। अभी गोल्ड में 5,010 डॉलर और सिल्वर में 87 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेडिंग हो रही है।"
मध्यपूर्व की स्थिति पर लगीं निवेशकों की नजरें
सवाल है कि आगे गोल्ड की कीमतें किसी दिशा में जाएंगी? अगर जियोपॉलिटिकल टेंशन में कमी आती है तो डॉलर में मजबूती पर ब्रेक लग जाएगा। एसेट्स क्लास में बिकवाली रुक जाएगी। इससे गोल्ड और सिल्वर में तेजी दिख सकती है। इसका मतलब है कि सोने की चाल आगे इस बात पर निर्भर करेगी कि मध्यपूर्व में स्थिति कैसी रहती है। अगर मध्यपूर्व में टेंशन और बढ़ता है तो कमोडिटी और फाइनेंशियल मार्केट्स में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
इन वजहों से गोल्ड में तेजी के आसार
चेनवाला का कहना है कि कई ऐसी वजहें हैं, जिससे गोल्ड में तेजी दिख सकती हैं। उन्होने कहा, "केंद्रीय बैंकों की तरफ से गोल्ड की खरीदारी जारी है। ट्रेड और टैरिफ को लेकर अनिश्चितता खत्म नहीं हुई है। अमेरिका में इस साल नवंबर में मध्याविधि चुनाव हैं। डॉलर के मुकाबले कई करेंसी में कमजोरी से गोल्ड को मजबूती मिलेगी। इन सभी वजहों से गोल्ड में तेजी दिख सकती है। यह इस साल की दूसरी छमाही में नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है।"
निवेशकों की दिलचस्पी बनी रहेगी
पीपी ज्वेलर्स में डायरेक्टर पवन गुप्ता ने कहा, "2026 के अंत तक हमें गोल्ड की कीमतें मजबूत बने रहने की उम्मीद है। इसमें तेजी दिख सकती है, क्योंकि गोल्ड का इस्तेमाल सुरक्षित निवेश के लिए होता है। शॉर्ट टर्म में कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशक जियोपॉलिटिकल टेंशन और वैश्विक अनिश्चितता की वजह से निवेश करेंगे।"