Gold ka Future: हलचल पर खरीदारी कहां! दिल्ली के सबसे पुराने ज्वेलरी बाजार दरीबा कलां से सोना को लेकर आ रहे ये कैसे संकेत?

Gold ka Future: सोने की रिकॉर्ड कीमतों का असर अब बाजार में साफ दिखने लगा है। दिल्ली के दरीबा कलां में ज्वेलरी और सिक्कों की मांग 50% से ज्यादा घट गई है। ग्राहक अब पुराने गहने एक्सचेंज कर रहे हैं और हल्के व कम कैरेट वाले विकल्प चुन रहे हैं। समझिए पूरी तस्वीर।

अपडेटेड May 21, 2026 पर 9:17 PM
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सोने की ऊंची कीमतों ने ग्राहकों को कम कैरेट वाले गहनों की तरफ भी मोड़ना शुरू कर दिया है।

Gold ka Future: दिल्ली के सबसे पुराने और व्यस्त ज्वेलरी बाजारों में से एक दरीबा कलां में इन दिनों कारोबारियों का माहौल बदला हुआ नजर आ रहा है। ग्राहक अब भी दुकानों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन पहले जैसी खरीदारी नहीं हो रही। कई लोग कीमतों की तुलना करने के बाद बिना खरीदारी किए लौट जा रहे हैं। कुछ ग्राहक पुराने गहने एक्सचेंज कर रहे हैं, तो कुछ हल्के वजन और कम कीमत वाले विकल्प तलाश रहे हैं।

कारोबारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील और सोने की कीमतों में लगातार तेजी ने ग्राहकों के व्यवहार पर सीधा असर डाला है।

ज्वेलरी और सिक्कों की मांग 50% से ज्यादा घटी


दरीबा कलां मार्केट एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष और राधे किशन गोपाल किशन ज्वेलर्स के मालिक गौरव गुप्ता के मुताबिक, ज्वेलरी और सोने के सिक्कों की मांग में 50% से ज्यादा गिरावट आ चुकी है। उनका मानना है कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो मांग में और कमजोरी आ सकती है।

दरीबा कलां में दिख रही यह सुस्ती देशभर के ज्वेलरी बाजार में दिखाई दे रहे बड़े रुझान का हिस्सा है। पिछले सप्ताह सरकार ने सोने के आयात पर कस्टम ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी थी। दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। 21 मई को दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था।

पीएम मोदी की अपील का भी दिख रहा असर

करीब दो सप्ताह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भू-राजनीतिक तनाव और अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव का हवाला देते हुए लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी टालने की अपील की थी। इसके बाद देशभर के कई ज्वेलर्स दुकानों पर ग्राहकों की संख्या घटने और बिक्री कमजोर पड़ने की बात कह रहे हैं।

सेनको गोल्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ सुवंकर सेन का कहना है कि प्रधानमंत्री की अपील और बढ़ती कीमतों ने ग्राहकों को पहले के मुकाबले ज्यादा सतर्क बना दिया है। लोग अब खरीदारी से पहले कीमतों पर करीबी नजर रख रहे हैं और पैसों की बेहतर वैल्यू तलाश रहे हैं।

एक्सपर्ट्स क्यों जता रहे हैं चिंता?

विश्लेषकों का मानना है कि सोने की कीमतों में 40% से 50% तक की तेजी और उसके ऊपर आयात शुल्क में बढ़ोतरी का असर निकट अवधि में मांग पर पड़ सकता है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि सोने की कीमतों में अतिरिक्त 9% से 10% की बढ़ोतरी मांग को और कमजोर कर सकती है। हालांकि ऊंची कीमतों का फायदा ज्वेलरी कंपनियों को इन्वेंट्री गेन के रूप में भी मिल सकता है, क्योंकि उनके पुराने स्टॉक की वैल्यू बढ़ जाती है।

ग्राहकों की खरीदारी की आदत बदल रही है

रिटेल कंपनियों का कहना है कि ग्राहकों का व्यवहार तेजी से बदल रहा है। सेनको गोल्ड के 190 स्टोर्स में ग्राहकों की संख्या कुछ कम हुई है क्योंकि लोग बड़ी खरीदारी से पहले कीमतों में स्थिरता का इंतजार कर रहे हैं।

सुवंकर सेन के मुताबिक, ग्राहक अब डिजाइन की तुलना करने, कीमतों का आकलन करने और एक्सचेंज विकल्पों को समझने में पहले से ज्यादा समय लगा रहे हैं। निवेश के लिए सोना खरीदने वाले लोगों में भी अब जल्दबाजी की खरीदारी कम हुई है और जरूरत के हिसाब से खरीदारी बढ़ी है।

पुराने गहने एक्सचेंज करने का बढ़ा चलन

टाइटन कंपनी की ज्वेलरी चेन तनिष्क भी ग्राहकों की बदलती पसंद देख रही है। कंपनी का पुराना सोना एक्सचेंज कार्यक्रम पिछले कुछ तिमाहियों में काफी लोकप्रिय हुआ है।

टाइटन के ज्वेलरी डिवीजन के सीईओ अरुण नारायण के अनुसार, पिछले आठ महीनों में 4.4 लाख से ज्यादा ग्राहकों ने 10,000 किलोग्राम से अधिक सोना एक्सचेंज किया है। वहीं सेनको गोल्ड में रीसाइकल और एक्सचेंज आधारित खरीदारी अब कंपनी के कुल कारोबार का करीब 50% हिस्सा बन चुकी है।

कम कैरेट और हल्के गहनों की मांग बढ़ी

सोने की ऊंची कीमतों ने ग्राहकों को कम कैरेट वाले गहनों की तरफ भी मोड़ना शुरू कर दिया है। सेनको गोल्ड के मुताबिक, 18 कैरेट, 14 कैरेट और 9 कैरेट ज्वेलरी की मांग बढ़ रही है क्योंकि इससे ग्राहक अपेक्षाकृत कम कीमत में आधुनिक डिजाइन खरीद पा रहे हैं।

इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि मांग में सुस्ती से निपटने के लिए ज्वेलरी कंपनियां कम कैरेट वाले उत्पादों पर ज्यादा फोकस कर सकती हैं। इससे ग्राहकों के लिए टिकट साइज कम होगा और खरीदारी अपेक्षाकृत आसान बनेगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

 

 

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