गोल्ड में 10 मार्च को उछाल देखने को मिला। विदेश में सोने का भाव 1.1 फीसदी चढ़कर 5,200 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान है। उन्होंने ईरान से लड़ाई जल्द खत्म होने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई 'बहुत जल्द' खत्म होगी। इसका असर क्रूड की कीमतों पर पड़ा। क्रूड में 10 फीसदी की गिरावट आई।
एमसीएक्स में गोल्ड और फ्यूचर्स में उछाल
भारत में भी गोल्ड फ्यूचर्स में तेजी दिखी। शाम के सेशन में कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स 1.57 फीसदी चढ़कर 1,62,822 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। चांदी में ज्यादा उछाल दिखा। सिल्वर फ्यूचर्स 3.92 फीसदी के उछाल के साथ 2,77,700 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया।
मध्यपूर्व में लड़ाई से महंगाई बढ़ने का डर
अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई शुरू हुए 10 दिन से ज्यादा समय हो चुका है। इस लड़ाई की वजह से होर्मुज की खाड़ी बंद है। ईरान मध्यपूर्व के कई देशों को निशाना बना रहा है। उसने कई देशों में ऑयल और गैस के इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाया है। ऑयल और गैस की सप्लाई कम सप्लाई से दोनों की कीमतें चढ़ रही हैं। इसका असर इनफ्लेशन पर पड़ सकता है।
महंगाई बढ़ने के डर से इंटरेस्ट रेट में कमी की उम्मीद घटी
महंगाई बढ़ने के आसार को देखते हुए अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट में कमी करने की उम्मीद घटी है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड में कमोडिटी रिसर्च की ग्लोबल हेड सुकी कूपर ने कहा, "हमने गोल्ड का वह रोल देखा है, जो आम तौर पर हाई रिस्क इवेंट्स के दौरान यह निभाता आया है। शुरुआत में गोल्ड में उछाल देखने को मिलता है। लेकिन, कैश पर दबाव बढ़ने पर गोल्ड पहला एसेट है, जिसे इनवेस्टर्स बेचते हैं। खासकर तब जब इसका प्रदर्शन अच्छा होता है। "
इस साल गोल्ड की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव
इस साल गोल्ड की कीमतों में काफी उतारचढ़ाव रहा है। इसके बावजूद अब तक इसका रिटर्न 20 फीसदी रहा है। ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी और जियोपॉलिटिकल टेंशन से गोल्ड की कीमतो को सपोर्ट मिला है। हालांकि, 28 फरवरी को मध्यपूर्व में लड़ाई शुरू होने के बाद से गोल्ड ईटीएफ की गोल्ड होल्डिंग की वैल्यू में गिरावट आई है। पिछले हफ्ते कुल होल्डिंग करीब 30 फीसदी गिर गई। यह दो साल से ज्यादा समय में गोल्ड ईटीएफ में सबसे बड़ी बिकवाली थी।
गोल्ड पर कुछ समय तक रह सकता है दबाव
कूपर ने कहा कि गिरावट की स्थिति में गोल्ड के लिए 5000 डॉलर प्रति औंस पर टेक्निकल सपोर्ट है। इस लेवल के टूटने के बाद यह 4,500 डॉलर तक जा सकता है। उन्होंने कहा, "यह लिक्विड एसेट है। हमारा मानना है कि पोर्टफोलियो में इसका खास रोल है। यह कुछ समय तक दबाव में रह सकता है।"