Gold Price Prediction: 53 हजार रुपये बढ़ेगा सोने का भाव! एक्सपर्ट बोले- इन 5 कारणों से जल्द नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचेगा गोल्ड
Gold Price Prediction: गोल्ड अगले 12 महीनों में नई रिकॉर्ड ऊंचाई बना सकता है। Saxo Bank के कमोडिटी स्ट्रैटजी के हेड Ole Hansen ने 6000 डॉलर प्रति औंस का दिया है। अगर ऐसा हुआ, तो भारत में सोने का भाव करीब 53 हजार रुपये बढ़ सकता है। जानिए किन 5 वजहों से गोल्ड में आ सकती है तूफानी तेजी।
अगर गोल्ड 4490 डॉलर से बढ़कर 6000 डॉलर तक जाता है, तो यह करीब 33.6% की तेजी होगी।
Gold Price Prediction: सोने की कीमतों में जोरदार तेजी का नया अनुमान आया है। Saxo Bank में कमोडिटी स्ट्रैटजी के हेड ओले हेनसेन (Ole Hansen) का मानना है कि अगले 12 महीनों में गोल्ड नई रिकॉर्ड ऊंचाई बना सकता है। इसकी कीमत 6000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड 4490 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा है। वहीं भारत में सोने का भाव करीब 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच चुका है। ऐसे में यह जानना भी दिलचस्प है कि अगर इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड 6000 डॉलर तक पहुंचता है, तो भारत में इसकी कीमत कहां तक जा सकती है।
6000 डॉलर का मतलब कितना उछाल?
अगर गोल्ड 4490 डॉलर से बढ़कर 6000 डॉलर तक जाता है, तो यह करीब 33.6% की तेजी होगी। यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमत में लगभग एक तिहाई का उछाल देखने को मिल सकता है। Ole Hansen का कहना है कि फिलहाल ऊंचे बॉन्ड यील्ड, मजबूत अमेरिकी डॉलर और महंगाई का दबाव गोल्ड पर असर डाल रहा है। लेकिन. लंबी अवधि में कई बड़े फैक्टर्स अभी भी सोने को सपोर्ट कर रहे हैं।
भारत में कितना बढ़ेगा सोने का भाव?
अगर भारतीय बाजार में भी इसी अनुपात में तेजी आती है, तो 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का भाव करीब 2.12 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। यानी मौजूदा स्तर से करीब 53 हजार रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।
हालांकि भारत में सोने की असली कीमत सिर्फ इंटरनेशनल गोल्ड प्राइस से तय नहीं होती। डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट, आयात शुल्क, GST और घरेलू मांग जैसे फैक्टर्स भी कीमतों पर बड़ा असर डालते हैं। इसलिए वास्तविक भाव इससे थोड़ा ऊपर या नीचे रह सकता है।
गोल्ड को सपोर्ट करने वाले 5 बड़े कारण
Ole Hansen का मानना है कि दुनिया में आर्थिक और भूराजनैतिक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ जाते हैं। सुरक्षित निवेश के मामले में गोल्ड का कोई तोड़ ही नहीं है। उनके मुताबिक, कई बड़े ग्लोबल फैक्टर्स अभी भी गोल्ड को लंबी अवधि में मजबूती दे रहे हैं।
1. डी-ग्लोबलाइजेशन: दुनिया में देश अब पहले की तरह एक-दूसरे पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते। सप्लाई चेन टूटने और व्यापारिक तनाव बढ़ने की वजह से निवेशक सुरक्षित एसेट्स की तरफ जा रहे हैं, जिससे गोल्ड को सपोर्ट मिल रहा है।
2. डी-डॉलराइजेशन: कई देश अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार और रिजर्व में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी वजह से सेंट्रल बैंक बड़ी मात्रा में गोल्ड खरीद रहे हैं, जिससे इसकी मांग बढ़ रही है।
3. देशों पर बढ़ता कर्ज : दुनिया के कई बड़े देशों पर सरकारी कर्ज तेजी से बढ़ रहा है। निवेशकों को डर है कि भविष्य में इससे आर्थिक दबाव और करेंसी कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए लोग गोल्ड को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
4. पश्चिम एशिया तनाव : पश्चिम एशिया में युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव की वजह से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालकर गोल्ड जैसे सुरक्षित माने जाने वाले एसेट में निवेश बढ़ाते हैं।
5. सुरक्षित निवेश की मांग : शेयर बाजार, बॉन्ड और करेंसी बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक ऐसी जगह पैसा लगाना चाहते हैं जहां जोखिम अपेक्षाकृत कम हो। इसी वजह से गोल्ड की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
तेल की कीमतों का भी बड़ा असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट की वजह से तेल बाजार में दबाव बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड अभी भी 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है।
Ole Hansen का कहना है कि अगर भविष्य में तनाव कम भी होता है, तब भी ब्रेंट क्रूड का नया बेस 85-95 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकता है। ऊंची तेल कीमतें वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकती हैं, जिसका असर निवेशकों की रणनीति और गोल्ड की मांग पर पड़ सकता है।
आगे क्या रह सकता है ट्रेंड?
Ole Hansen का मानना है कि फिलहाल ऊंची तेल कीमतों और महंगाई की वजह से धातुओं में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। लेकिन लंबी अवधि में गोल्ड की तेजी का ट्रेंड अभी खत्म नहीं हुआ है।
उनके मुताबिक अगले 12 महीनों में गोल्ड फिर रिकॉर्ड हाई बना सकता है और 6000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अगर ऐसा होता है, तो भारतीय बाजार में भी सोने की कीमतें नई ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच सकती हैं।
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