Gold Price Outlook: गोल्ड की कीमतों में इस साल काफी तगड़ा उछाल आया है। ऐसे में निवेशकों को समझ नहीं आ रहा कि अब गोल्ड को लेकर उनकी क्या स्ट्रैटजी हो और कीमतें अब किस ओर जाएंगी। Marathon Trends के अतुल सूरी का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को अपने गोल्ड पोजीशन से बाहर निकलने की कोई जरूरत नहीं है।
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि हाल की तेजी स्थायी नहीं रह सकती। उन्होंने कहा, 'जब हर कोई इस पर कूद पड़ा है, तो करेक्शन आने की संभावना हो सकती है।' यह बात उन्होंने मंगलवार, 21 अक्टूबर को CNBC-TV18 के महुरत ट्रेडिंग सेशन में कही।
गोल्ड से बेहतर रिटर्न इक्विटी में?
वहीं, मार्केट वेटरन रमेश दमानी ने लॉन्ग टर्म का नजरिया देते हुए कहा कि आम तौर पर इक्विटी गोल्ड की तुलना में बेहतर रिटर्न देती है। उन्होंने बताया, 'डॉलर के हिसाब से गोल्ड सालाना लगभग 3-4% रिटर्न देता है, जबकि इक्विटी 9-10%।'
दमानी ने कहा कि गोल्ड ट्रेडर्स और स्पेकुलेटर्स को आकर्षित कर सकता है, लेकिन निवेशकों के लिए अगले 5-10 साल में इक्विटी ज्यादा फायदेमंद रहेगी। उनका मानना है कि गोल्ड उन लोगों के लिए सही है, जो बाजार के उतार-चढ़ाव से डरते हैं।
गोल्ड की कीमतों में हाल की गिरावट
हाल ही में गोल्ड की कीमतें रिकॉर्ड हाई से गिर गई हैं। वैश्विक व्यापार तनाव में सुधार और अमेरिकी सरकार के शटडाउन जल्द खत्म होने की उम्मीद के चलते कीमतें नीचे आईं। सोमवार को यह $4,381.52 प्रति औंस के हाई लेवल के बाद 0.8% गिर गई।
गोल्ड के लिए रिलीटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) जैसे टेक्निकल इंडिकेटर बताते हैं कि अगस्त में शुरू रैली अब अपने पीक पर हो सकती है। इस हफ्ते डॉलर की मजबूती ने भी कई खरीदारों के लिए सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं को महंगा कर दिया।
US-चीन ट्रेड और अमेरिकी फैसले
निवेशक US-चीन व्यापार विकास पर नजर रखे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग के साथ 'बहुत अच्छी ट्रेड डील' होने की उम्मीद जताई। हालांकि, उन्होंने 1 नवंबर तक डील न होने पर चीनी सामान पर टैरिफ बढ़ाने की संभावना भी दोहराई। इस बीच, नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के निदेशक केविन हास्सेट ने कहा कि अमेरिकाी सरकार का शटडाउन इस हफ्ते खत्म हो सकता है।
कीमती धातुओं की मजबूत स्थिति
2025 में कीमती धातुओं की कीमतें मजबूत रहीं। गोल्ड ने लगातार नौवें सप्ताह भी बढ़त दर्ज की। इस साल अब तक कीमतें 65% बढ़ चुकी हैं। इसके पीछे केंद्रीय बैंकों की खरीद, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स में निवेश, भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ता सरकारी ऋण और फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर चिंता जैसे कारण हैं।
Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।