Gold Rate MCX: अमेरिका और चीन के बीच चल रहे टैरिफ वार और दुनिया भर में आर्थिक व भू-राजनीतिक अस्थिरता ने एक बार फिर से सोने को निवेशकों की पहली पसंद बना दिया है। इसका सीधा असर सोने की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। 16 अप्रैल को मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जून वायदा कॉन्ट्रेक्ट में सोने की कीमत 95,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई। वहीं इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 999 शुद्धता वाले फिजिकल गोल्ड की कीमत 94,579 रुपये तक रही।
क्यों आ रही है सोने में तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना $3,300 प्रति औंस से ऊपर चला गया है। सोने की इस तेजी का मुख्य कारण दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों के गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी, बढ़ती महंगाई, और कोविड के बाद से सोने की मांग में आई बहार है।
ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने साल 2025 के अंत तक सोने का अनुमानित मूल्य $3,700 प्रति औंस कर दिया है। उनका मानना है कि केंद्रीय बैंकों की ओर से लगातार खरीद और ETF निवेश में तेजी के चलते सोने की कीमतों में और उछाल आ सकता है।
मोतिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी रिसर्च हेड नवीन दामानी का कहना है कि बीते एक साल में सोने में 40% तक की बढ़ोतरी हुई है। वैश्विक स्तर पर अस्थिरता के इस दौर में सोना सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प बन गया है। वहीं क्वांटम म्यूचुअल फंड के CIO चिराग मेहता के अनुसार अगर महंगाई बढ़ती रही और अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ी तो स्टैगफ्लेशन जैसे हालात बन सकते हैं — ऐसे समय में सोना सबसे बेहतर प्रदर्शन करता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट के अनुसार, सोने में निवेश को रिटर्न के नज़रिए से नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो को बैलेंस करने वाले विकल्प के रूप में देखना चाहिए। MyWealthGrowth के को-फाउंडर हर्षद चेतनवाला बताते हैं कि गोल्ड का निवेश आपके कुल पोर्टफोलियो का 10-15% होना चाहिए। यदि आपने पहले ही गोल्ड में ज्यादा निवेश कर रखा है, तो इसे रीबैलेंस करना चाहिए। वहीं जिनका निवेश कम है, वे अगले 6-12 महीनों में धीरे-धीरे गोल्ड में निवेश बढ़ा सकते हैं, खासतौर पर जब कीमतों में गिरावट आए।
सोने की कीमतें अभी ऊंचाई पर हैं, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते इसकी चमक आगे भी बनी रह सकती है। ऐसे में सोच-समझकर और धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर होगा।