गोल्ड में 17 अप्रैल को नरमी देखने को मिली। हालांकि, अब भी यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3,300 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बना हुआ है। इंडिया में भी गोल्ड फ्यूचर्स 95,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर बना हुआ है। 17 अप्रैल को गोल्ड में नरमी की वजह मुनाफावसूली है। इससे यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में 0.1 फीसदी गिरकर 3,339.37 डॉलर पर था। इंडिया में कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स 69 रुपये यानी 0.07 की नरमी के साथ 95,730 पर चल रहा था। हालांकि, यह ध्यान में रखनी वाली बात है कि इस हफ्ते गोल्ड 3 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। इंडिया में 18 अप्रैल को गुड फ्राइडे के उपलक्ष्य में मार्केट बंद है।
क्या आप गोल्ड में निवेश का मौका चूक गए थे?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर अच्छी तेजी के बाद Gold में मुनाफावसूली होगी, जिससे इसकी कीमतों में नरमी आएगी। लेकिन, Gold Outlook फिलहाल पॉजिटिव दिख रहा है। इनवेस्टर्स को गोल्ड की कीमतों में उतारचढ़ाव पर ध्यान दिए बगैर इसे अपने इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में शामिल करने के बारे में सोचना चाहिए। जिन्होंने कोविड के बाद गोल्ड में निवेश किया है, आज वे बड़े मुनाफे में हैं। जो लोग मौका चूक गए हैं, उन्हें अब देर नहीं करनी चाहिए।
इस साल के अंत तक गोल्ड का टारगेट क्या है?
Goldman Sachs ने इस साल के अंत तक गोल्ड की कीमतें 3,700 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच जाने की उम्मीद जताई है। उसने कहा है कि दुनियाभर के केंद्रीय बैंक गोल्ड में निवेश बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा ग्लोबल इकोनॉमी में मंदी की आशंका से इनवेस्टर्स गोल्ड ईटीएफ में निवेश बढ़ा रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटेल इनवेस्टर्स को सिर्फ एसेट एलोकेशन पर फोकस करने की जरूरत है। अगर आपके पोर्टफोलियो में गोल्ड नहीं है तो आपको इसे शामिल करना चाहिए। पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी 10-15 फीसदी हो सकती है।
आज गोल्ड में इनवेस्ट करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है। ऐसे कई विकल्प है, जिनमें आप पारदर्शी तरीके से गोल्ड में निवेश कर सकते हैं। आइए ऐसे विकल्पों के बारे में जानते हैं:
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) की शुरुआत 2025 में हुई थी। तब से सरकार इसकी 67 किस्तें जारी कर चुकी है। एसजीबी BSE और NSE में सूचीबद्ध हैं। इन्हें स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए खरीदा जा सकता है। हालांकि, इसके लिए डीमैट अकाउंट जरूरी है। चूंकि, सरकार ने पिछले साल फरवरी से एसजीबी की नई किस्त पेश नहीं की है, जिससे अब इसे सिर्फ स्टॉक एक्सचेंजों से खरीदने का ही विकल्प है। बताया जाता है कि सरकार की दिलचस्पी एसजीबी की नई किस्त जारी करने में नहीं है। एसजीबी 8 साल में मैच्योर हो जाता है। इश्यू की तारीख से 5 साल बाद इसमें से पैसा निकाला जा सकता है।
गोल्ड ईटीएफ फिजिकल गोल्ड की कीमतों को ट्रैक करता है। इसका मतलब है कि ईटीएफ की यूनिट की कीमत गोल्ड की कीमतों पर आधारित होती है। गोल्ड ईटीएफ स्कीम फिजिकल गोल्ड में निवेश करती है। गोल्ड ईटीएफ की 1 यूनिट एक ग्राम गोल्ड की कीमत के बराबर होती है। गोल्ड ईटीएफ स्कीम स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होती है। इसलिए इसमें लिक्विडिटी की दिक्कत नहीं होती है। आपको यह ध्यान रखना होगा कि चूंकि गोल्ड ईटीएफ स्कीम फिजिकल गोल्ड की कीमतों को ट्रैक करती है, जिससे गोल्ड की कीमतों में उतारचढ़ाव का असर इसकी यूनिट्स पर पड़ता है।
गोल्ड म्यूचुअल फंड एसेट मैनेजमेंट कंपनियों की गोल्ड स्कीम है। यह गोल्ड ईटीएफ में इनवेस्टर्स के पैसे का निवेश करती है। इससे गोल्ड की कीमतों में तेजी का फायदा गोल्ड म्यूचुअल फंड के इनवेस्टर्स को मिलता है। गोल्ड म्यूचुअल फंड में SIP से निवेश किया जा सकता है। यह लंबी अवधि में गोल्ड में बड़ा निवेश करने में मददगार है। चूंकि, यह एक्टिव स्कीम है, जिससे इसका रिटर्न लंबी अवधि में गोल्ड के रिटर्न से ज्यादा हो सकता है। इसमें लिक्विडिटी की भी कोई दिक्कत नहीं है।
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इंडिया में फिजिकल गोल्ड में निवेश करने की परंपरा रही है। हालांकि, ज्यादातर निवेश शादी के मौके पर होता है। परिवार शादी के मौके पर बेटे-बेटी को गोल्ड ज्वैलरी देते हैं। इसलिए इंडिया में फिजिकल गोल्ड की डिमांड काफी ज्यादा है। फिजिकल गोल्ड आप ब्रांडेड गोल्ड कंपनियों से कर सकते हैं। आप गोल्ड ज्वैलरी, गोल्ड कॉइन, गोल्ड बार आदि खरीद सकते हैं। लेकिन, इन्हें सुरक्षित रखना एक बड़ा चैलेंज होता है।