Gold Safe Asset or not: पिछले महीने 29 जनवरी को गोल्ड के भाव प्रति औंस $5,594 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। हालांकि अगले ही दिन इसमें करीब 10% की तेज गिरावट आई। इस तेज उतार-चढ़ाव ने गोल्ड की चमक में असामान्य हलचल को लेकर चीन का क्या रोल है, इसे लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है। अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने गोल्ड की कीमतों में तेज उठा-पटक को अव्यवस्थित बताया। इस तेज उठा-पटक ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या पहले जिस गोल्ड को सेफ हैवन एसेट माना जाता था, वह अब नहीं रहा? सवाल यह उठ रहा है कि क्या अब सेफ हैवन एसेट से इसमें स्पेक्युलेटिव फ्लो होने लगा है, खासतौर से चाइनीज रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स की बढ़ती भागीदारी के चलते?
फॉक्स न्यूज के एक प्रोग्राम संडे मॉर्निंग फ्यूचर्स में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि गोल्ड की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव चीन के बाजारों में उथल-पुथल को दिखाता है। उन्होंने कहा कि चीन में हालात कुछ अव्यवस्थित हो गए हैं, उन्हें मार्जिन की जरूरतों को कड़ा करना पड़ रहा है। स्कॉट के मुताबिक गोल्ड में एक क्लासिकल और स्पेक्यूलेटिव ब्लोऑफ जैसा लग रहा है। अभी कुछ समय पहले चीन के रेगुलेटर्स ने कीमतों में तेज उठा-पटक के बीच गोल्ड की ट्रेडिंग में कई बार जरूरी मार्जिन को बढ़ाया है।
क्या कहना है एक्सपर्ट्स का?
सीएनबीसी से बातचीत में एनालिस्ट्स ने कहा कि गोल्ड में तेजी की मुख्य वजह चीन है। एमकेएकस पैम्प की प्रमुख (रिसर्च और मेटल्स स्ट्रैटेजी) निकी शील्स का कहना है कि इस बार गोल्ड में जो तेजी आई है, वह मुख्य रूप से चीन के चलते आई। उन्होंने कहा कि इसे ईटीएफ, फिजिकल बार और फ्यूचर पोजिशनिंग के जरिए स्पेक्यूलेटिव इनफ्लो, रिटेल और इंस्टीट्यूशनल के रुझान से सपोर्ट मिला। कैपिटल इकनॉमिक्स के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 की शुरुआत से चाइनीज गोल्ड ईटीएफ होल्डिंग्स दोगुनी से अधिक हो चुकी हैं। सोने के फ्यूचर्स में भी ट्रेडिंग एक्टिविटी तेजी से बढ़ी है।
शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज पर वॉल्यूम तेजी से बढ़ा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के रे जिया (Ray Jia) ने सीएनबीसी से बातचीत में कहा कि पिछले साल 2025 में हर दिन औसतन ट्रेडिंग वॉल्यूम 457 टन के रिकॉर्ड लेवल पर थी लेकिन इस साल अब तक की बात करें तो यह और तेजी से उछलकर हर दिन औसतन 540 टन पर पहुंच गई।
गोल्ड की तेजी के साथ एक रणनीतिक पहलू भी जुड़ा है। चाइना मार्केट रिसर्च ग्रुप के फाउंडर और एमडी शॉन रेन ने सीएनबीसी से बातचीत में कहा कि कि अमेरिकी आर्थिक दबाव के खतरे को कम करने के लिए चीन ‘डी-डॉलराइजेशन’ को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा चीन के खुदरा निवेशक और सरकार, दोनों हाई रिटर्न और सेफ एसेट की तलाश में गोल्ड की कीमतों को ऊपर ले जा रहे हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 में चीन की अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स घटकर $68.2 हजार करोड़ रह गई, जो सालाना आधार पर 11% कम रहा। वहीं पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने जनवरी तक लगातार 15 महीने अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ाया जोकि करीब 2,300 टन तक पहुंच गया।
कैपिटल इकोनॉमिक्स के इकनॉमिस्ट हमाद हुसैन का कहना है कि चीन में फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स और ETFs की तेजी ने अस्थिरता को और बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि चीन के गोल्ड मार्केट में लेवरेज भी बढ़ने का संकेत मिल रहा है जिसके चलते इसकी कीमतों में तेज उठा-पटक हो सकती है। उन्होंने सतर्क किया है कि जिस तरह से खरीदारी हो रही है, वह पहले के रुझानों से अलग है। उन्होंने कहा कि फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स और लेवरेज का बढ़ता इस्तेमाल उन निवेशकों का सामान्य रुख नहीं है जो सुरक्षित निवेश की तलाश में होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा रुझानों से संकेत मिल रहा है कि यह स्पेक्यूलेटिव बबल बन सकता है।
एएनजेड रिसर्च के के सीनियर चाइना स्ट्रैटेजिस्ट झाओपेंग जिंग (Zhaopeng Xing) का कहना है कि वैकल्पिक वित्तीय एसेट तक सीमित पहुंच और प्रॉपर्टी मार्केट की कमजोरी के चलते लोग गोल्ड की तरफ भाग रहे हैं। डिपॉजिट्स पर करीब 1% की दर से ब्याज और रियल एस्टेट की गिरती कीमतों ने गोल्ड को आकर्षक बना दिया है। एएनजेड रिसर्च के अनुसार अभी चाइनीज हाउसहोल्ड एसेट्स में करीब 1% गोल्ड है और शिंग का मानना है कि आने वाले समय में यह 5% तक पहुंच सकता है।
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