सोने की चमक पड़ी फीकी! ईरान संकट के बीच लोग जरूरी चीजों पर कर रहे खर्च; प्री-वॉर लेवल पर आईं कीमतें

Gold Demand Decline In India: IBJA के सचिव सुरेंद्र मेहता के मुताबिक, आम आदमी अब सोने में निवेश करने के बजाय अपनी नकदी बचाकर रखना चाहता है। युद्ध और अनिश्चितता के माहौल में लोग अपना पैसा फ्यूल, गैस और खाने-पीने की जरूरी चीजों के लिए बचा रहे हैं

अपडेटेड Mar 17, 2026 पर 1:03 PM
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संकट के बीच आम आदमी सोने में निवेश करने के बजाय अपनी नकदी बचाकर रखना चाहता है

Gold Demand Fallen Sharply: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध ने न केवल तेल की कीमतों को प्रभावित किया है, बल्कि सोने के बाजार को भी ठंडा कर दिया है। 'इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन' (IBJA) के अनुसार, मार्च महीने में सोने की मांग में भारी गिरावट आई है।

क्यों कम हुई सोने की बिक्री?

IBJA के सचिव सुरेंद्र मेहता के मुताबिक, आम आदमी अब सोने में निवेश करने के बजाय अपनी नकदी बचाकर रखना चाहता है। युद्ध और अनिश्चितता के माहौल में लोग अपना पैसा फ्यूल, गैस और खाने-पीने की जरूरी चीजों के लिए बचा रहे हैं। कीमतों में गिरावट के बावजूद शोरूम्स में ग्राहकों की चहल-पहल बहुत कम हो गई है। बाजार में अब सोने को लेकर पहले जैसा उत्साह नहीं दिख रहा है।


सोने की कीमतों में दिखा बड़ा उतार-चढ़ाव

युद्ध शुरू होने से लेकर अब तक सोने की कीमतों में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिली है:

युद्ध शुरू होने से पहले (27 फरवरी): ₹1,59,097 प्रति 10 ग्राम।

युद्ध के दौरान उछाल (2 मार्च): कीमतें 5.5% बढ़कर ₹1,67,471 तक पहुंच गई थीं।

मौजूदा स्थिति (17 मार्च): सोने की कीमतें गिरकर युद्ध से पहले के स्तर पर आ गई हैं और फिलहाल ₹157,821 प्रति प्रति 10 ग्राम के आसपास चल रहा हैं।

सोने की चमक पड़ी फीकी! ईरान संकट के बीच लोग जरूरी चीजों पर कर रहे खर्च; प्री-वॉर लेवल पर आईं कीमतें युद्ध छिड़ने से पहले से लेकर अब तक गोल्ड का भाव

सोना सस्ता होने के बाद भी क्यों नहीं बढ़ी मांग?

आमतौर पर कीमतें गिरने पर मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। फाइनेंशियल ईयर एंड में ज्वैलर्स अपना 'बहीखाता' बंद करने में व्यस्त हैं। वे नई खरीदारी करने के बजाय पुराने स्टॉक और हिसाब-किताब को निपटाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। थोक विक्रेताओं से लेकर रिटेलर्स तक डिमांड में बढ़ोतरी देखने को नहीं मिल रही है, जिससे बाजार में सुस्ती बनी हुई है।

क्यों गिर रहे हैं सोने के दाम?

विशेषज्ञों ने इसके पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं:

मजबूत डॉलर: कच्चा तेल महंगा होने से डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है। डॉलर मजबूत होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग घटती है।

ब्याज दरें: महंगाई बढ़ने के डर से केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रख सकते हैं। ऊंची ब्याज दरों के समय सोने जैसे 'बिना ब्याज वाले' एसेट में निवेश करना कम आकर्षक हो जाता है।

कच्चे तेल का असर: ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार है। जब ऊर्जा संकट बढ़ता है, तो निवेशक अन्य कमोडिटीज से पैसा निकालकर जरूरी संसाधनों की ओर मोड़ देते हैं।

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