Gold Silver ETF: गोल्ड-सिल्वर ETF में भारी गिरावट, अब क्या करें निवेशक? जानिए एक्सपर्ट से
Gold Silver ETF: सोना और चांदी में आई तेज गिरावट का असर गोल्ड और सिल्वर ETF पर भी दिखा है। कई प्रमुख फंड 5 से 8 प्रतिशत तक टूट गए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक- कुछ खास वजहों से गोल्ड और सिल्वर पर फिलहाल दबाव बना रह सकता है। जानिए डिटेल।
सिल्वर फ्यूचर्स करीब 11 प्रतिशत टूटकर 2.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गया।
Gold Silver ETF: घरेलू और वैश्विक बाजारों में गुरुवार को सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 2 अप्रैल 2026 की एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स करीब एक महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। यह 6 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ गया।
वहीं 5 मई 2026 की एक्सपायरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स करीब 11 प्रतिशत टूटकर 2.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गया। इसका असर गोल्ड और सिल्वर ETF पर भी दिखा और दोनों में बड़ी गिरावट आई।
गोल्ड-सिल्वर ETF में दिखी बिकवाली
सोना और चांदी में आई इस गिरावट का असर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) पर भी दिखा। सिल्वर ETF में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। Kotak Silver ETF, SBI Silver ETF, Nippon India Silver ETF और ICICI Prudential Silver ETF जैसे कई फंड 5 से 8 प्रतिशत तक गिर गए।
वहीं गोल्ड ETF में भी गिरावट दर्ज की गई, लेकिन यह सिल्वर की तुलना में कम रही। SBI Gold ETF, HDFC Gold ETF, Nippon India Gold ETF, ICICI Prudential Gold ETF और Kotak Gold ETF जैसे प्रमुख फंड करीब 3 से 5 प्रतिशत तक नीचे आ गए।
गिरावट की वजह क्या रही
LKP Securities के वीपी रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतिन त्रिवेदी के मुताबिक- अंतरराष्ट्रीय बाजार सोने में हाल के सत्रों में तेज गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि एक ही ट्रेडिंग सत्र में सोना 200 डॉलर से ज्यादा गिरा है। पिछले दो दिनों में इसमें करीब 300 डॉलर की गिरावट आ चुकी है।
उनके मुताबिक- इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख, मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड है। बाजार में यह धारणा बन रही है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ईरान से जुड़े भू राजनीतिक तनाव ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। हालांकि ऐसे समय में सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन फिलहाल मजबूत डॉलर के कारण उस पर दबाव बना हुआ है।
तकनीकी स्तर क्या संकेत दे रहे
जतिन त्रिवेदी के मुताबिक MCX पर सोना फिलहाल तकनीकी रूप से कमजोर नजर आ रहा है। अब इसके लिए 1,50,000 रुपये के आसपास मजबूत रेजिस्टेंस बन गया है। दूसरी ओर 1,44,000 से 1,42,000 रुपये के बीच मजबूत सपोर्ट दिखाई दे रहा है। अगर कीमतें इस स्तर से नीचे जाती हैं, तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
गोल्ड ETF से $5 अरब की निकासी
केडिया फिनकॉर्प के फाउंडर नितिन केडिया का कहना है कि गोल्ड ETF से करीब 5.1 अरब डॉलर की निकासी, डॉलर इंडेक्स का 100 के ऊपर पहुंचना और कच्चे तेल की कीमत 97.65 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहने जैसे कारकों ने मिलकर सोने की कीमतों पर असर डाला। इसके चलते घरेलू बाजार में सोना ₹1,56,000 के ऊपरी स्तर से गिरकर करीब ₹1,47,500 तक आ गया।
इस बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा आर्थिक अनुमान भी बाजार की चिंता बढ़ाने वाले रहे। फेड ने 2026 के लिए आर्थिक विकास दर का अनुमान थोड़ा बढ़ाया, लेकिन साथ ही महंगाई के अनुमान भी ऊपर किए और यह संकेत नहीं दिया कि ब्याज दरों में जल्द कटौती होगी। इससे साफ है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक अभी भी महंगाई को लेकर सतर्क है।
ऐसे माहौल में मजबूत डॉलर, ऊंची बॉन्ड यील्ड और महंगा कच्चा तेल निकट अवधि में सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रख सकते हैं। आने वाले समय में सोना ₹1,42,000 से ₹1,62,000 के दायरे में कारोबार करता दिखाई दे सकता है। हालांकि अगर युद्ध से जुड़ा तनाव धीरे-धीरे कम होता है और बाजार की घबराहट घटती है, तो सोने में फिर से चरणबद्ध खरीदारी और निवेशकों की दिलचस्पी लौट सकती है।
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