सोने और चांदी में आई हालिया तेजी के बाद कई इनवेस्टर्स गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में अपना निवेश बेचना चाहते हैं। गोल्ड ईटीएफ ने बीते एक साल में करीब 83.32 फीसदी रिटर्न दिया है। सिल्वर ईटीएफ ने बीते एक साल में 171.30 फीसदी रिटर्न दिया है।

सोने और चांदी में आई हालिया तेजी के बाद कई इनवेस्टर्स गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में अपना निवेश बेचना चाहते हैं। गोल्ड ईटीएफ ने बीते एक साल में करीब 83.32 फीसदी रिटर्न दिया है। सिल्वर ईटीएफ ने बीते एक साल में 171.30 फीसदी रिटर्न दिया है।
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स-छूट का नियम
इनवेस्टर्स को गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ को बेचने से पहले प्रॉफिट पर टैक्स के असर को समझना जरूरी है। सबसे पहले यह जान लें कि एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक के टैक्स-फ्री लॉन्ग टर्म गेंस का फायदा सिल्वर ईटीएफ और गोल्ड ईटीएफ के मामले में नहीं मिलता है। यह फायदा सिर्फ इक्विटी म्यूचुअल फंड्स और लिस्टेड शेयरों के मामले में मिलता है।
गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ में निवेश के फायदे
गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ ऐसी स्कीमें हैं, जिनमें निवेश करने पर सोने और चांदी की कीमतों में आने वाली तेजी के मुताबिक रिटर्न मिलता है। फंड हाउस को स्कीम के एयूएम के बराबर सोना और चांदी खरीदना पड़ता है। गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ की ट्रेडिंग स्टॉक एक्सचेंजों में होती है। दोनों इनवेस्टर्स को सोना चांदी खरीदे बगैर दोनों की कीमतों में तेजी का फायदा उठाने का मौका देते हैं।
सिर्फ इक्विटी एमएफ और शेयरों के एलटीसीजी पर टैक्स-छूट
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 112ए के तहत एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक के कैपिटल गेंस पर टैक्स से छूट का फायदा सिर्फ शेयर बाजार में लिस्ट कंपनी के शेयरों और म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम के मामले में मिलता है। चूंकि गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ नॉन-इक्विटी एसेट्स है, जिससे इनके लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर किसी तरह की टैक्स-छूट नहीं मिलती है।
सवाल है कि फिर अगर कोई इनवेस्टर गोल्ड ईटीएफ या सिल्वर ईटीएफ बेचना चाहता है तो उसे मुनाफे पर कितना टैक्स देना होगा?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्स इस बात पर निर्भर करेगा कि इनवेस्टर कितने समय बाद अपने गोल्ड ईटीएफ या सिल्वर ईटीएफ को बेचता है। दोनों को अगर 1 साल के पहले बेचा जाता है तो उससे हुए मुनाफ को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस माना जाएगा। उस पर इनवेस्टर के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। अगर दोनों को 1 साल के बाद बेचा जाता है तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस माना जाएगा। उस पर 12.5 फीसदी रेट से टैक्स लगेगा। इस पर इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलेगा।
गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ पर टैक्स हार्वेस्टिंग का फायदा उठाना जा सकता है?
टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग में शेयरों या म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स को लॉस पर बेचा जाता है। फिर कैपिटल लॉस को कैपिटल गेंस के साथ एडजस्ट किया जाता है। इससे इनवेस्टर का टैक्स कम हो जाता है। क्लियरटैक्स में टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंदन ने कहा, "गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है।"
हिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।