Gold-Silver Fall: सोने और चांदी में 17 फरवरी को देश और विदेश में गिरावट आई। सोना की कीमत एक हफ्ते के निचले स्तर पर आ गई। इधर, इंडिया में भी गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट देखने को मिली। ऐसे में इनवेस्टर्स को दोनों कीमती मेटल्स की कीमतों के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। इस बीच, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने और चांदी के फंडामेंटल्स स्ट्रॉन्ग हैं। सवाल है कि अगर दोनों के फंडामेंटल्स स्ट्रॉन्ग हैं तो कीमतें क्यों गिर रही हैं?
सोने में 2 फीसदी तक की गिरावट
स्पॉट गोल्ड 1.5 फीसदी गिरकर 4,918.65 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। एक समय कीमत 2 फीसदी से ज्यादा गिर गई थी। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स (अप्रैल डिलीवरी) 2.2 फीसदी लुढ़कर 4,937 डॉलर प्रति औंस था। इधर, इंडिया में कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट दिखी। 3:30 बजे गोल्ड फ्यूचर्स 1.14 फीसदी गिरकर 1,53,000 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 2.78 फीसदी टूटकर 2,33,010 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा था।
इन वजहों से सोने में आई गिरावट
एक्सपर्ट्स का कहना है कि डॉलर में मजबूती का रुख है। जियोपॉलिटिकल टेंशन में कमी के संकेत हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल है। मई में जेरोम पॉवेल की जगह केविन वॉर्श फेडरल रिजर्व के चेयरमैन बन जाएंगे। अभी उनकी पॉलिसी के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल है। डॉलर में मजबूती से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसलिए सोने की कीमतों पर इसका निगेटिव असर पड़ता है। उधर, फेड के इंटरेस्ट रेट में कमी नहीं करने से सोने की चमक फीकी पड़ सकती है।
इन वजहों से चढ़ी थीं कीमतें
बीते एक-सवा साल में सोने और चांदी में आई तेजी की कुछ खास वजहें रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पॉलिसी से वैश्किव अनिश्चितता बढ़ी है। डॉलर में कमजोरी से सोने और चांदी की कीमतों को सपोर्ट मिला है। फेडरल रिजर्व के रेट घटाने से सोने की चमक बढ़ी है। कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने लगातार सोने की खरीदारी की है। इसके अलावा जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने से कीमती धातुओं में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ी है।
लंबी अवधि में कैसा रहेगा रुख?
वेंचुरा में हेड ऑफ कमोडिटीज एंड सीआरएम एनएस रामास्वामी ने लंबी अवधि में सोने का आउटलुक कंस्ट्रक्टिव लगता है। उन्होंने कहा कि स्ट्रक्चर के हिसाब से सोने में लंबी अवधि में तेजी की संभावना दिखती है। लेकिन, यह तभी होगा जब अमेरिका में मॉनेटरी पॉलिसी में नरमी आएगी। जहां तक चांदी की बात है तो इसका स्ट्रक्चर एक्युमुलेटिव फेज का संकेत देता है। फरवरी के आखिर और मार्च की शुरुआत में यह काफी अहम फेज में प्रवेश करता दिख रहा है। अगर यह 80 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बंद होता है तो इसमें तेजी की शुरुआत हो सकती है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में इसमें उतार-चढ़ाव दिख सकता है।