Gold Silver Outlook: पिछले कुछ हफ्तों से सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव दिख रहा है। एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले हफ्ते ( 9 से 13 फरवरी) में सोने की कीमतें मजबूती के साथ कारोबार कर सकती हैं।
Gold Silver Outlook: पिछले कुछ हफ्तों से सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव दिख रहा है। एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले हफ्ते ( 9 से 13 फरवरी) में सोने की कीमतें मजबूती के साथ कारोबार कर सकती हैं।
इसकी वजह है कि निवेशक और ट्रेडर्स अमेरिका के अहम आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिनसे ब्याज दरों को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। दूसरी ओर, चांदी में जोखिम भावना और सट्टा गतिविधियों के चलते तेज उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
किन आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर
अगले हफ्ते अमेरिका से GDP, PMI, नॉन-फार्म पेरोल और महंगाई के आंकड़े आने हैं, जो बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके साथ ही चीन, जर्मनी और भारत के महंगाई आंकड़ों पर भी नजर रहेगी।
इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के भाषणों को भी ध्यान से सुना जाएगा। इससे समझा जा सकेगा कि ब्याज दरों में कटौती कब और किस हद तक हो सकती है। इसका सोने-चांदी की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा।
सोने में पॉजिटिव संकेत, चांदी को लेकर सतर्कता
JM फाइनेंशियल सर्विसेज में कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर का कहना है कि सोने में कंसॉलिडेशन और रिकवरी यह संकेत देती है कि इसका रुझान अब भी सकारात्मक बना हुआ है। हालांकि, चांदी के मामले में वह ज्यादा सतर्क हैं, क्योंकि इसमें आगे भी तेज उतार-चढ़ाव और करेक्शन देखने को मिल सकता है।
बीते हफ्ते कैसा रहा सोने-चांदी का हाल
पिछले हफ्ते MCX पर सोने के फ्यूचर्स में 7,698 रुपये यानी 5.2 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। वहीं, चांदी की कीमत 15,760 रुपये या करीब 6 प्रतिशत टूट गई। यूनियन बजट पेश किए जाने की वजह से कमोडिटी बाजार रविवार को भी खुला रहा, जिससे उतार-चढ़ाव और बढ़ गया।
दशकों की सबसे तेज गिरावट में से एक
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी के मुताबिक, सोना और चांदी दोनों के लिए बीता हफ्ता बेहद अस्थिर रहा। डॉलर में तेज मजबूती, फेड को लेकर बदली उम्मीदों और बड़े पैमाने पर पोजिशन अनवाइंडिंग ने दशकों की सबसे तीखी गिरावट में से एक को जन्म दिया।
उनका कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ वार्ताओं में प्रगति और अमेरिकी सरकार के शटडाउन का खतरा घटने से सेफ-हेवन डिमांड कमजोर हुई। इसके अलावा, केविन वॉर्श के अगले फेड चेयर नामित होने की खबर के बाद ट्रेडर्स ने आक्रामक रेट कट की उम्मीदें भी कम कर दीं।
जबरदस्त अनवाइंडिंग का असर
मानव मोदी के मुताबिक, यह अनवाइंडिंग बेहद तेज रही। सोने में करीब चार दशक की सबसे तेज गिरावट दर्ज हुई। चांदी में हालात और खराब रहे। भारी कॉल ऑप्शन पोजिशनिंग, मार्जिन कॉल और सट्टा आधारित बिकवाली ने चांदी की गिरावट को और बढ़ा दिया।
इस उथल-पुथल का असर घरेलू बाजारों पर भी साफ दिखा। यूनियन बजट भले ही मोटे तौर पर उम्मीदों के मुताबिक रहा और कोई बड़ा सेक्टर-स्पेसिफिक सरप्राइज नहीं दिया। लेकिन, रुपये में उतार-चढ़ाव के चलते बुलियन बाजार में अस्थिरता बनी रही।
भारत और अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड डील में प्रगति के संकेतों के बाद रुपये के मुकाबले डॉलर (USD/INR) में नरमी आई। इससे घरेलू सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला।
बिकवाली के बाद स्थिरता के संकेत
तेज बिकवाली के बावजूद बाजार में स्थिरता के संकेत भी सामने आए। जैसे-जैसे फोर्स्ड लिक्विडेशन कम हुई और वैल्यू बाइंग लौटी, दोनों कीमती धातुओं में संभलने के संकेत मिलने लगे।
मानव मोदी के मुताबिक, करीब 15 प्रतिशत के करेक्शन के बाद कमजोर आर्थिक आंकड़ों और वैल्यू बाइंग के चलते सोने में तेज रिकवरी देखने को मिली। साथ ही USD/INR के निचले स्तरों से उबरने से घरेलू कीमतों को भी सहारा मिला।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की वापसी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में Comex पर पिछले हफ्ते सोने की कीमत 234.7 डॉलर या करीब 5 प्रतिशत बढ़ी। सोना 4,400 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर से उबरकर 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।
प्रणव मेर का कहना है कि फंडामेंटल्स में अब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है और केंद्रीय बैंक व ETF निवेशक लगातार सोने की खरीद कर रहे हैं। इसके अलावा, क्रिप्टो कंपनियां भी फिजिकल एसेट्स से बैक्ड गोल्ड टोकन बनाने और ट्रेड करने के लिए सोना खरीद रही हैं।
चांदी में अब भी दबाव
इसके उलट, चांदी के फ्यूचर्स पर दबाव बना रहा और इसमें 1.63 डॉलर यानी 2.08 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
प्रणव मेर के मुताबिक, चांदी इस समय बेहद अस्थिर दौर से गुजर रही है। 30 जनवरी को ऑल-टाइम हाई करीब 121 डॉलर से फ्लैश क्रैश होकर 64 डॉलर प्रति औंस तक आने के बाद कीमतें लगातार तेज झूलाव दिखा रही हैं।
चीन से मांग और आगे का आउटलुक
मानव मोदी का कहना है कि चंद्र नववर्ष से पहले चीन से फिजिकल डिमांड मजबूत बनी हुई है, जो आगे की बिकवाली को कुछ हद तक थाम सकती है।
उनके अनुसार, 2026 तक बुलियन के लिए बड़े फंडामेंटल्स मजबूत बने हुए हैं। केंद्रीय बैंकों की खरीद, फिस्कल चिंताएं और भू-राजनीतिक जोखिम सोने-चांदी को सपोर्ट दे रहे हैं। हालांकि, निकट अवधि में बाजार में ऊंचा उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
अगले हफ्ते क्या उम्मीद करें
एनालिस्टों का कहना है कि अगले हफ्ते मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा और फेड अधिकारियों के बयान बाजार की दिशा तय करेंगे। अस्थिरता बनी रहने की संभावना है, लेकिन खासकर सोने में गिरावट आने पर शॉर्ट-टर्म खरीदारी के मौके भी बन सकते हैं।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
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