गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में 6 जनवरी को तेजी दिखी। इससे गोल्ड की कीमतें एक हफ्ते के हाई पर पहुंच गईं। जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने का असर बुलियन की कीमतों पर पड़ा है। स्पॉट गोल्ड 0.5 फीसदी चढ़कर 4,496.96 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। 5 जनवरी को गोल्ड में 3 फीसदी उछाल आया था। सोना 26 दिसंबर को 4,549.71 डॉलर प्रति औंस की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था। 2025 में गोल्ड ने निवेशकों को 64 फीसदी रिटर्न दिया है।
आइए जानते हैं कि सोने और चांदी की कीमतों में हालिया तेजी के क्या कारण हैं और निवेशकों को अब आगे क्या करना चाहिए।
सोने की कीमतों पर वेनेजुएला पर अमेरिका के कब्जे का असर
5 जनवरी को सोने में आई तेजी की वजह वेनेजुएला पर अमेरिका का कब्जा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि फिलहाल वेनेजुएला पर अमेरिका का कंट्रोल रहेगा। इससे दक्षिण अमेरिका में राजनीतिक स्थिरता बढ़ने का डर है। इस वजह से बुलियन खासकर गोल्ड में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। रूस और यूक्रेन के बीच सुलह की उम्मीद से सोने में थोड़ी नरमी दिखी थी। लेकिन, वेनेजुएला की घटना से जियोपॉलिटिकल टेंशन फिर से बढ़ गया है।
अमेरिकी इकोनॉमी से जुड़े डेटा पर इनवेस्टर्स की नजरें
इस बीच, मार्केट पार्टिसिपेंट्स की नजरें अमेरिकी इकोनॉमी से जुड़े डेटा पर है। इस हफ्ते ये डेटा आने वाले हैं। इसमें एंप्लॉयमेंट, जॉबलेस क्लेम्स और दिसंबर के नॉन-फॉर्म पेरोल्स के डेटा शामिल हैं। इन डेटा से अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का अंदाजा लगेगा। अगर फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट में कमी करता है तो इससे सोने की कीमतों को सपोर्ट मिलेगा। इस महीने के आखिर में फेड अपनी पॉलिसी का ऐलान करेगा।
भारत में भी सोने और चांदी की कीमतों में उछाल
भारत में भी सोने और चांदी की कीमतों में 6 जनवरी को तेजी दिखी। 24 कैरेट गोल्ड का भाव 13,621 रुपये प्रति ग्राम पर पहुंच गया। 22 कैरेट गोल्ड का भाव 12,486 रुपये प्रति ग्राम था। सिल्वर की कीमत 2.42 लाख रुपये प्रति किलोग्राम थी। एमसीएक्स में 1:20 बजे गोल्ड फ्यूचर्स 422 रुपये यानी 0.31 फीसदी चढ़कर 1,38,542 रुपये प्रति 10 ग्राम था। सिल्वर फ्यूचर्स 4,075 रुपये यानी 1.66 फीसदी के उछाल के साथ 2,50,230 रुपये प्रति किलोग्राम था।
बुलियन पर जियोपॉलिटिकल रिस्क बढ़ने का असर
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटीज) सौमिल गांधी ने कहा, "जियोपॉलिटिकल रिस्क बढ़ने से सोने और चांदी में उछाल आया है। इसकी वजह सुरक्षित निवेश में लोगों की बढ़ती दिलचस्पी है। खासकर वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई के बाद सोने और चांदी की डिमांड बढ़ी है।" कोलंबिया और मैक्सिको को लेकर जिस तरह के बयान आए हैं, उससे लैटिन अमेरिका में क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।
इनवेस्टर्स को क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बुलियन का आउटलुक स्ट्रॉन्ग लगता है। खासकर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने से सोने की चमक बढ़ी है। कीमतों में फिलहाल तेजी जारी रहने की उम्मीद है। अभी गोल्ड को होल्ड करना सही रहेगा। गोल्ड में निवेश करने का यह सही वक्त नहीं है। जो इनवेस्टर्स गोल्ड में निवेश करना चाहते हैं, वे कीमतों में करेक्शन का इंतजार कर सकते हैं। इनवेस्टर्स अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर की हिस्सेदारी 5-10 फीसदी तक बनाए रख सकते हैं।