Gold Silver Outlook: गोल्ड और सिल्वर का रेशियो 110 से 65 पर आया, क्या आपको निवेश करना चाहिए?

गोल्ड और सिल्वर दोनों की सप्लाई कम है। सिल्वर का इस्तेमाल कई इंडस्ट्रीज में होता है। इनमें सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रिफिकेशन शामिल है। गोल्ड की डिमांड बढ़ने की एक वजह वैश्विक अनिश्चिततता और जियोपॉलिटिकल टेंशन है

अपडेटेड Jan 12, 2026 पर 8:25 PM
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गोल्ड की कीमतें 12 जनवरी को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं।

सोने और चांदी के लिए साल 2025 शानदार रहा। सोने ने 76 फीसदी रिटर्न दिया। लेकिन, चांदी करीब 170 फीसदी रिटर्न के साथ काफी आगे निकल गई। इससे गोल्ड और सिल्वर का रेशियो 110 से गिरकर हाल में 65 के निचले स्तर पर आ गया। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटीज रिव्यू और प्रीव्यू 2026 रिपोर्ट में इस बारे में बताया गया है।

कीमती मेटल्स की सीमित सप्लाई

गोल्ड और सिल्वर दोनों की सप्लाई कम है। गोल्ड की माइनिंग सीमित मात्रा में हो रही है। सिल्वर की सप्लाई भी डिमांड के मुकाबले कम है। सिल्वर का इस्तेमाल कई इंडस्ट्रीज में होता है। इनमें सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रिफिकेशन शामिल है। गोल्ड की डिमांड बढ़ने की एक वजह वैश्विक अनिश्चिततता और जियोपॉलिटिकल टेंशन है। गोल्ड में निवेश को सबसे सुरक्षित माना जाता है। इसलिए जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने पर गोल्ड की डिमांड बढ़ जाती है।


इनवेस्टर्स की निवेश में बढ़ रही दिलचस्पी

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में एनालिस्ट मानव मोदी (कमोडिटीज) ने कहा, "2025 में गोल्ड और सिल्वर में आई तेजी से इनवेस्टर्स की बदलती पसंद का स्पष्ट संकेत मिलता है। गोल्ड साइक्लिकल हेज की जगह अब स्ट्रेटेजिक रिजर्व एसेट बन गया है। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, करेंसी में उतारचढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितता से गोल्ड को सपोर्ट मिला है।" भारत में निवेशकों की दिलचस्पी गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में भी बढ़ी है। 2025 में दोनों का एसेट अंडर मैनेजमेंट 150 फीसदी से ज्यादा बढ़ा।

बेस मेटल्स में दिख सकता है कंसॉलिडेशन

पिछले साल कॉपर में भी जबर्दस्त तेजी देखने को मिली। इसकी कीमतें 13,000 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गईं। यह साल दर साल आधार पर 40 फीसदी रिटर्न है। दुनिया में रिफाइंड कॉपर की डिमांड 2.1 फीसदी बढ़कर 2026 में 2.87 करोड़ टन पहुंच जाने की उम्मीद है। 2025 में एल्युमीनियम ने 17 फीसदी और जिंक ने 5 फीसदी रिटर्न दिया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बेस मेटल्स में कंसॉलिडेशन दिख सकता है। इससे मीडियम टर्म में कुछ चुनिंदा बेस मेटल्स में मौका हो सकता है।

क्या आपको निवेश करना चाहिए?

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 की शुरुआत में गोल्ड और सिल्वर में तेजी बनी रह सकती है। इसकी वजह केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और स्ट्रॉन्ग इनवेस्टर डिमांड है। दोनों की सप्लाई की ग्रोथ भी सीमित है। ऐसे में इनवेस्टर्स लॉन्ग टर्म के लिए अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर को शामिल कर सकते हैं।

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12 जनवरी को गोल्ड रिकॉर्ड ऊंचाई पर

गोल्ड की कीमतें 12 जनवरी को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं। इसमें डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में गिरावट का हाथ है। जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने का असर भी गोल्ड और सिल्वर पर पड़ा। गोल्ड पहली पर 4,600 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। चांदी ने भी नया रिकॉर्ड बना दिया।

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