Gold-silver prices Today: धनतेरस से पहले सोना ₹1.37 लाख पर आया, चांदी ₹7000 से ज्यादा लुढ़की, क्या कम दाम बढ़ाएंगे मांग?
Gold-silver prices Today: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, 4 दिसंबर की डिलीवरी वाले सोने के वायदा (फ्यूचर्स) 1.65% गिरकर 1.37 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहे थे। चांदी के वायदा भाव में और भी तेज गिरावट आई। यह 4.47% गिरकर 1.75 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई
Gold, silver prices Today: धनतेरस की खरीदारी के सीजन से ठीक पहले मंगलवार 3 नवंबर को सोने -चांदी की कीमतों में और गिरावट आई है।
Gold, silver prices Today: धनतेरस की खरीदारी के सीजन से ठीक पहले मंगलवार 3 नवंबर को सोने -चांदी की कीमतों में और गिरावट आई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, 4 दिसंबर की डिलीवरी वाले सोने के वायदा (फ्यूचर्स) 1.65% गिरकर 1.37 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहे थे। चांदी के वायदा भाव में और भी तेज गिरावट आई। यह 4.47% गिरकर 1.75 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
कीमतों में यह सुधार (करेक्शन) आभूषण बाजार के लिए एक अहम समय पर आया है, क्योंकि धनतेरस और शादी-ब्याह के सीजन में सोने-चांदी की भौतिक खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, कीमतों में आई इस हालिया गिरावट ने ग्राहकों के मन में एक सवाल भी खड़ा कर दिया है। क्या यह खरीदारी का सही मौका है, या कीमती धातुओं की कीमतों में आगे और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है?
सोने -चांदी की कीमतें क्यों गिर रही हैं?
सोने-चांदी में आई यह कमजोरी अमेरिकी मौद्रिक नीति (मॉनेटरी पॉलिसी) को लेकर बदलती उम्मीदों, डॉलर के मजबूत होने और बॉन्ड यील्ड (बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न) में बढ़ोतरी से जुड़ी है।
'लेमन' (Lemonn) के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने बताया कि अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों से पहले निवेशक सतर्क हैं। इसके अलावा, दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना भी बाजार पर दबाव डाल रही है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में आई बड़ी गिरावट के बाद चांदी में अब और भी तेज गिरावट देखी गई है।
वेंचुरा (Ventura) में कमोडिटी और CRM हेड, एनएस रामास्वामी ने कहा कि सोने की कीमतों में अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी गिरावट आई है। उन्होंने इस कमजोरी के पीछे महंगाई की चिंता और अमेरिकी मौद्रिक नीति के और सख्त होने की उम्मीदों को कारण बताया, जिससे बॉन्ड यील्ड और डॉलर को मजबूती मिली है।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोना जैसी संपत्तियां, जिन पर कोई ब्याज नहीं मिलता, निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो जाती हैं।
रामास्वामी ने कहा कि जियोपॉलिटिकल टेंशन के बावजूद सोना अपनी पारंपरिक 'सुरक्षित निवेश' (safe-haven) वाली पहचान बनाए रखने में संघर्ष कर रहा है। उन्हें उम्मीद है कि दिसंबर में होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। नवंबर के दौरान, घरेलू बाजार में सोने की कीमत 1.40 लाख रुपये से 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में रहने की संभावना है।
ऑगमोंट की चीफ रिसर्च ऑफिसर रेनीशा चैनानी ने कहा कि सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट त्योहारों के समय खरीदारी करने वालों के लिए एक अच्छा मौका हो सकती है। हालांकि, उन्होंने एक ही बार में पूरी रकम निवेश करने के बजाय, टुकड़ों में खरीदारी करने की सलाह दी। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, जिसमें सोना $3,900 प्रति औंस और चांदी $50 प्रति औंस के स्तर तक जा सकती है। हालांकि, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और मजबूत गोल्ड ETF होल्डिंग्स कीमतों में बहुत ज्यादा गिरावट को रोक सकती हैं।
क्या कम कीमतों की वजह से बढ़ेगी धनतेरस पर मांग?
कीमतों में आई गिरावट उन ग्राहकों को खरीदारी के लिए प्रेरित कर सकती है, जिन्होंने कीमतों में तेजी के दौरान गहनों की खरीदारी टाल दी थी। हालांकि, खरीदारी के पैटर्न से पता चलता है कि लोग अपना बजट और गहनों के इस्तेमाल को ध्यान में रखकर ही खरीदारी का फैसला ले रहे हैं।
कामा ज्वेलरी के मैनेजिंग डायरेक्टर कॉलिन शाह ने कहा कि सोने की कीमतों में नरमी से त्योहारों के सीजन से पहले ग्राहकों के बीच खुशी है। उन्होंने बताया कि लोग अब हल्के वजन वाले और जड़े हुए (studded) गहनों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनकी शुद्धता 9K से 19K के बीच है, क्योंकि वे अपने बजट को नियंत्रित रखना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि लैब में बने और प्राकृतिक दोनों तरह के हीरों की मांग मुख्य रूप से ₹1.5 लाख से ₹3 लाख की कीमत वाली रेंज में देखी जा रही है।
शाह को उम्मीद है कि गहनों की कुल मांग (मूल्य के हिसाब से) पिछले साल के बराबर ही रहेगी, हालांकि मात्रा (volume) में लगभग 10% की कमी आ सकती है। रुपये के मुकाबले सोने की कीमतों में बढ़ोतरी - जो आंशिक रूप से रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट से प्रभावित है - अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
इस बीच, ऑनलाइन ज्वेलरी शॉपिंग में भी त्योहारों के कारण तेजी देखी जा रही है।अमेज़न ब्यूटी, पर्सनल केयर और फैशन एक्सेसरीज के डायरेक्टर सिद्धार्थ भगत ने बताया कि Amazon.in पर सोने के गहनों की मांग सामान्य दिनों की तुलना में 2.5 गुना रही, जबकि सोने के सिक्कों और पेंडेंट की मांग तीन गुना अधिक रही।
इस प्लेटफॉर्म पर फैशन ज्वेलरी खरीदने वालों की संख्या में भी पिछले साल के मुकाबले 50% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। चांदी के गहनों की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले लगभग दोगुनी रही, जबकि चांदी की मूर्तियों और शो-पीस की मांग सामान्य दिनों से 2.6 गुना अधिक रही।
भगत ने छोटे शहरों से बढ़ती भागीदारी का भी जिक्र किया। टियर 2 और टियर 3 शहरों में गहने खरीदने वाले नए ग्राहकों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले 40% से ज्यादा का इजाफा हुआ है।
इस धनतेरस पर सोना कैसे खरीदें: गहने, डिजिटल गोल्ड या ETF?
सोने की खरीदारी की योजना बना रहे उपभोक्ताओं के लिए दैनिक मूल्य पर नज़र रखने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण निर्णय होते हैं। सोने की खरीदारी का तरीका कुल लागत, तरलता और खरीदार के लिए उपयुक्तता को प्रभावित कर सकता है।
एयरपे मनी के सीईओ कुमार बिनीत ने कहा कि पहली बार सोने की खरीदारी करने वालों को यह तय करना चाहिए कि वे सोने को पहनने, उपहार देने, बचत करने या दीर्घकालिक निवेश के लिए खरीदना चाहते हैं।
यहां मुख्य अंतर दिए गए हैं:
भौतिक सोना: आभूषण और सिक्के मूर्त स्वामित्व प्रदान करते हैं और पारंपरिक खरीदारी और उपहार देने के लिए उपयुक्त हैं। हालांकि, खरीदारों को निर्माण शुल्क का ध्यान रखना चाहिए, बीआईएस हॉलमार्किंग की जांच करनी चाहिए और भंडारण लागत पर विचार करना चाहिए।
डिजिटल सोना: खरीदार धातु को स्वयं संग्रहीत किए बिना छोटी मात्रा से शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि, उन्हें प्लेटफ़ॉर्म के नियम, लागू शुल्क, भंडारण व्यवस्था और मोचन शर्तों की जांच करनी चाहिए।
गोल्ड ETF और म्यूचुअल फंड: ये उन लोगों के लिए बाजार से जुड़े निवेश विकल्प हैं, जो सोना खरीदे बिना (यानी उसे अपने पास रखे बिना) सोने में निवेश करना चाहते हैं। गोल्ड ETF स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं, जबकि गोल्ड म्यूचुअल फंड उन निवेशकों के लिए एक विकल्प हैं जिनके पास डीमैट खाता नहीं है।
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