Gold vs Silver: पिछले 12 महीनों में ज्यादातर निवेशकों का फोकस सोने पर रहा, लेकिन असली चमक चांदी ने दिखाई। इस दौरान चांदी की कीमतों में करीब 140 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी आई। वहीं, सोना सिर्फ 40 प्रतिशत ही बढ़ पाया।
Gold vs Silver: पिछले 12 महीनों में ज्यादातर निवेशकों का फोकस सोने पर रहा, लेकिन असली चमक चांदी ने दिखाई। इस दौरान चांदी की कीमतों में करीब 140 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी आई। वहीं, सोना सिर्फ 40 प्रतिशत ही बढ़ पाया।
इतना ही नहीं, 5 और 10 साल के आंकड़े भी बताते हैं कि लंबी अवधि में चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि चांदी ने सोने को पीछे छोड़ दिया। इसके पीछे पांच बड़े कारण हैं।
1. सिर्फ कीमती धातु नहीं, इंडस्ट्रियल मेटल भी
सोने का इस्तेमाल ज्यादातर निवेश और ज्वेलरी में होता है। लेकिन चांदी की खास बात यह है कि यह कीमती धातु होने के साथ साथ एक अहम इंडस्ट्रियल मेटल भी है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर, माइक्रोचिप, AI टेक्नोलॉजी, 5G नेटवर्क और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में चांदी की भारी जरूरत पड़ती है। पिछले एक साल में क्लीन एनर्जी और टेक्नोलॉजी सेक्टर की मांग बढ़ने से चांदी की डिमांड भी तेजी से बढ़ी।
2. गोल्ड-सिल्वर रेशियो ने चांदी को सस्ता दिखाया
गोल्ड-सिल्वर रेशियो यह बताता है कि सोने के मुकाबले चांदी कितनी महंगी या सस्ती है। मई 2025 में यह रेशियो 102 तक पहुंच गया था, यानी सोने के मुकाबले चांदी काफी सस्ती मानी जा रही थी। इससे निवेशकों का रुझान तेजी से चांदी की तरफ बढ़ा और कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला। अब यह रेशियो घटकर करीब 58 पर आ गया है।
3. छोटा बाजार होने से तेजी ज्यादा आई
चांदी का बाजार सोने के मुकाबले काफी छोटा है। यही वजह है कि इसमें थोड़ी सी अतिरिक्त मांग भी कीमतों को तेजी से ऊपर ले जाती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक चांदी का बाजार ज्यादा वोलैटाइल है, इसलिए जब निवेशकों की भागीदारी बढ़ती है, तो कीमतों में उछाल भी ज्यादा बड़ा दिखता है। पिछले एक साल में यही देखने को मिला।
4. मांग ज्यादा, सप्लाई कम
चांदी की सप्लाई को लेकर भी चिंता बढ़ी हुई है। Silver Institute के मुताबिक 2026 में ग्लोबल सिल्वर प्रोडक्शन में हल्की गिरावट आ सकती है। दूसरी तरफ इंडस्ट्रियल मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। अनुमान है कि बाजार में 1,400 टन से ज्यादा का सप्लाई डेफिसिट रह सकता है। यानी मांग ज्यादा और सप्लाई कम होने से कीमतों को सपोर्ट मिला।
5. दुनिया का माहौल भी चांदी के पक्ष में रहा
पिछले एक साल में डॉलर की कमजोरी, जियोपॉलिटिकल तनाव, महंगाई की चिंता और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने कीमती धातुओं को सपोर्ट किया। अमेरिका ने चांदी को क्रिटिकल मिनरल्स लिस्ट में शामिल किया। वहीं चीन की तरफ से सिल्वर एक्सपोर्ट कंट्रोल की खबरों ने भी तेजी को हवा दी। इन सभी फैक्टर्स ने मिलकर चांदी को सोने से ज्यादा मजबूत बना दिया।
चांदी पर एक्सपर्ट की राय
एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि चांदी में तेजी के साथ जोखिम भी ज्यादा है। यह बाजार काफी उतार चढ़ाव वाला माना जाता है। इसलिए निवेशकों को एकमुश्त निवेश करने की बजाय धीरे धीरे निवेश बढ़ाने की सलाह दी जा रही है।
Bonanza के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के मुताबिक गोल्ड-सिल्वर रेशियो का 56 के करीब आना इस बात का संकेत है कि फिलहाल चांदी की तेजी सोने से ज्यादा मजबूत बनी हुई है। उनका कहना है कि इंडस्ट्रियल मांग और सट्टेबाजी वाली खरीदारी चांदी को लगातार सपोर्ट दे रही है।
यादव के मुताबिक बाजार अब सिर्फ सुरक्षित निवेश वाले सोने से आगे बढ़कर ज्यादा तेजी वाले प्रेशियस मेटल्स फेज में प्रवेश कर रहा है। उनका मानना है कि जब गोल्ड-सिल्वर रेशियो 50 से 55 के दायरे में पहुंचता है, तो चांदी में तेज उछाल और बड़ी गिरावट दोनों देखने को मिल सकती हैं। यानी आगे चांदी में उतार चढ़ाव काफी ज्यादा रह सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा स्तरों पर मुनाफावसूली का खतरा बना हुआ है। गुरुवार की तेज बढ़त के बाद शुक्रवार MCX पर सोना और चांदी दोनों में जोरदार गिरावट देखने को मिली। 14 मई के इंट्राडे कारोबार में चांदी करीब ₹19,843 और सोना ₹3,128 तक टूट गया, जिससे गोल्ड-सिल्वर रेशियो और नीचे आ गया।
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