Mutual Funds: पिछला एक साल शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए आसान नहीं रहा। सेंसेक्स करीब 8 प्रतिशत और निफ्टी 5 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी उम्मीद जैसी तेजी नहीं दिखी। कई इक्विटी म्यूचुअल फंड्स तो ढंग का रिटर्न तक नहीं दे पाए। लेकिन इसी दौरान एक ऐसा सेगमेंट था, जिसने चुपचाप निवेशकों को शानदार कमाई करके दी- मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स।
आखिर क्या होते हैं मल्टी एसेट फंड्स
मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स ऐसे म्यूचुअल फंड होते हैं, जो सिर्फ शेयर बाजार में पैसा नहीं लगाते। ये इक्विटी के साथ डेट, गोल्ड, सिल्वर और कई बार REITs या विदेशी बाजारों में भी निवेश करते हैं। यानी अगर शेयर बाजार कमजोर पड़ जाए, तो दूसरे एसेट्स नुकसान को संभाल लेते हैं। यही वजह है कि गिरते बाजार में भी ये फंड टिके रहे।
SEBI के नियमों के मुताबिक ऐसे फंड्स को कम से कम तीन अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करना जरूरी होता है। हर एसेट में कम से कम 10 प्रतिशत पैसा लगाना पड़ता है। यानी यह सिर्फ नाम का डायवर्सिफिकेशन नहीं होता, बल्कि असली संतुलन बनाकर रखा जाता है।
इस साल क्यों चमका यह सेगमेंट
पिछले एक साल में दुनिया भर में काफी अनिश्चितता रही। वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ा, जिससे कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात रही। दूसरी तरफ विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पैसा निकाला। AI बूम की वजह से अमेरिका की तरफ निवेश ज्यादा गया और भारतीय बाजार दबाव में आ गया। रुपये की कमजोरी ने भी बाजार का माहौल बिगाड़ा।
लेकिन इसी दौरान गोल्ड और सिल्वर में जोरदार तेजी देखने को मिली। दुनिया भर के निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ भागे और केंद्रीय बैंकों ने भी गोल्ड खरीद बढ़ाई। मल्टी एसेट फंड्स को इसका सीधा फायदा मिला, क्योंकि इनके पोर्टफोलियो में पहले से ही प्रेशियस मेटल्स मौजूद थे। इस वजह से शेयर बाजार की कमजोरी का असर काफी हद तक संतुलित हो गया।
रिटर्न ने खींचा निवेशकों का ध्यान
मल्टी एसेट फंड्स कैटेगरी ने औसतन करीब 12 प्रतिशत रिटर्न दिया, जबकि कई बड़े इक्विटी फंड्स सिंगल डिजिट में ही अटक गए। कुछ मल्टी एसेट फंड्स ने तो 20 से 26 प्रतिशत तक रिटर्न दिया। Kotak Multi Asset Allocation Direct Fund ने करीब 26 प्रतिशत रिटर्न दिया। वहीं Quant, DSP, HSBC और Bandhan के फंड्स ने भी 19 से 22 प्रतिशत तक की कमाई कराई।
अब निवेशकों का भरोसा इस कैटेगरी पर तेजी से बढ़ रहा है। अप्रैल 2026 में इस सेगमेंट में 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया। जनवरी 2026 में तो रिकॉर्ड 10,485 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज हुआ। इस समय इस कैटेगरी का कुल AUM 1.83 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है।
मल्टी एसेट फंड्स कैटेगरी का औसत एक साल का रिटर्न करीब 12 प्रतिशत रहा। लेकिन, कुछ स्कीमों ने इससे कहीं ज्यादा शानदार प्रदर्शन किया। कई मल्टी एसेट फंड्स ने 20 प्रतिशत से ज्यादा रिटर्न देकर निवेशकों का ध्यान खींचा।
हर समय नंबर वन नहीं रहेंगे
हालांकि एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि मल्टी एसेट फंड्स हर दौर में सबसे ज्यादा रिटर्न नहीं देंगे। अगर शेयर बाजार में लंबी बुल रन शुरू हो जाए और गोल्ड जैसी कमोडिटीज ठंडी पड़ जाएं, तो इक्विटी फंड्स फिर से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। लेकिन जिन निवेशकों को कम उतार चढ़ाव और संतुलित ग्रोथ चाहिए, उनके लिए यह सेगमेंट काफी मजबूत विकल्प बनकर उभरा है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।