Gratuity Rules: सरकारी कर्मचारियों को डबल ग्रेच्युटी, सरकार ने स्पष्ट की NPS के तहत नियम और लिमिट

Gratuity Rules: केंद्र सरकार ने NPS के तहत ग्रेच्युटी को लेकर नियम स्पष्ट कर दिए हैं। PSU, राज्य सरकार और सैन्य सेवा के बाद सिविल सेवा करने वाले कर्मचारियों के लिए डबल ग्रेच्युटी की लिमिट और छूट साफ की गई है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Jan 13, 2026 पर 10:59 PM
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जो कर्मचारी PSU या स्वायत्त संस्था से उचित अनुमति लेकर केंद्र सरकार की सेवा में आते हैं, उन्हें सरकारी सेवा के लिए ग्रेच्युटी मिलेगी।

Gratuity Rules: केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ पेंशन एंड पेंशनर्स वेलफेयर ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों की ग्रेच्युटी को लेकर एक अहम ऑफिस मेमोरेंडम (OM) जारी किया है। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि किन हालात में ग्रेच्युटी पर लिमिट लगेगी और किन मामलों में यह लागू नहीं होगी। ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स की उलझन दूर हो सकें।

ग्रेच्युटी पर क्या कहता है Rule 4A

ऑफिस मेमोरेंडरम के मुताबिक, CCS (Payment of Gratuity under NPS) Amendment Rules, 2025 के Rule 4A में यह प्रावधान है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी केंद्र सरकार और PSU या स्वायत्त संस्था - दोनों में सेवा दे चुका है और दोनों से अलग-अलग ग्रेच्युटी लेता है, तो ऐसी स्थिति में कुल ग्रेच्युटी पर एक सीमा लागू होगी।


दोबारा सरकारी नौकरी के लिए नियम

अगर कोई कर्मचारी सेवानिवृत्ति, अनिवार्य सेवानिवृत्ति या करुणा ग्रेच्युटी लेने के बाद दोबारा सरकारी सेवा में नियुक्त होता है, तो सामान्य तौर पर उसे री-एम्प्लॉयमेंट की अवधि के लिए अलग से ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी। मंत्रालय के OM में साफ किया गया है कि पहले से ग्रेच्युटी ले चुके कर्मचारी को पुनर्नियुक्ति अवधि के लिए नई ग्रेच्युटी का हक नहीं होगा।

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PSU से केंद्र में आने पर क्या होगा

जो कर्मचारी PSU या स्वायत्त संस्था से उचित अनुमति लेकर केंद्र सरकार की सेवा में आते हैं, उन्हें सरकारी सेवा के लिए ग्रेच्युटी मिलेगी। साथ ही PSU/Autonomous Body से मिली ग्रेच्युटी भी बनी रहेगी।

हालांकि, दोनों जगहों से मिलने वाली कुल ग्रेच्युटी उस रकम से ज्यादा नहीं हो सकती, जो कर्मचारी को कुल सेवा अवधि (PSU + सरकार) और सरकारी सेवानिवृत्ति के समय के वेतन के आधार पर देय होती।

राज्य और केंद्र- दोनों सेवाओं का मामला

विभाग ने 12 फरवरी 2020 के पुराने निर्देशों का भी हवाला दिया है। इसके मुताबिक, अगर किसी कर्मचारी ने पहले राज्य सरकार और फिर केंद्र सरकार की सेवा की है और दोनों जगहों से अलग-अलग ग्रेच्युटी ली है, तो कुल ग्रेच्युटी पर सीमा लागू होगी।

यह सीमा उस ग्रेच्युटी से अधिक नहीं हो सकती, जो कर्मचारी को लगातार केंद्र सरकार की सेवा में रहते हुए उसी अंतिम वेतन पर सेवानिवृत्त होने पर मिलती।

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सैन्य के बाद सिविल सेवा वालों को बड़ी राहत

इस ऑफिस मेमोरेंडम का सबसे अहम हिस्सा उन कर्मचारियों से जुड़ा है, जिन्होंने पहले सैन्य सेवा की और बाद में सिविल सेवा जॉइन की।

सरकार ने Department of Expenditure से परामर्श के बाद स्पष्ट किया है कि अगर किसी व्यक्ति को सैन्य सेवा की ग्रेच्युटी पहले ही मिल चुकी है, तो सिविल सेवा के दौरान मिलने वाली ग्रेच्युटी पर कोई अतिरिक्त सीमा लागू नहीं होगी। यानी सैन्य ग्रेच्युटी के कारण सिविल सेवा की ग्रेच्युटी में कोई कटौती नहीं की जाएगी।

आसान और पारदर्शी हुए ग्रेच्युटी के नियम

सरकार की यह नई स्पष्टता NPS के तहत आने वाले हजारों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राहत लेकर आई है। खासकर PSU से सरकार में आने वालों और सैन्य सेवा के बाद सिविल सेवा जॉइन करने वालों के मामलों में अब नियम साफ हो गए हैं। इस सर्कुलर से ग्रेच्युटी से जुड़े प्रावधान पहले से ज्यादा सरल, स्पष्ट और पारदर्शी हो गए हैं।

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