Income Tax Refund: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पहले ही किया था कि अधिकतर रिफंड दिसंबर 2025 के अंत तक प्रोसेस कर दिए जाएंगे। इसी के तहत बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स के खातों में रिफंड क्रेडिट भी हो चुका है। हालांकि, अब भी कुछ रिफंड पेंडिंग हैं, जिन्हें विभाग जल्द प्रोसेस करने की तैयारी में है।
आखिर क्यों अटकता है रिफंड
एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर ITR में किसी तरह का मिसमैच या गड़बड़ी पाई जाती है, तो आयकर विभाग टैक्सपेयर को नोटिस भेजकर जवाब और स्पष्टीकरण मांगता है। जैसे ही टैक्सपेयर नोटिस का सही से जवाब देता है, रिफंड जारी कर दिया जाता है।
वहीं, जिन मामलों में कोई गड़बड़ी नहीं होती, वहां रिफंड में देरी आमतौर पर प्रोसेसिंग टाइमलाइन की वजह से होती है। ऐसे रिफंड अगले बैच में अपने आप क्लियर हो जाते हैं।
इनकम टैक्स रिफंड में देरी के 6 बड़े कारण
ITR मिसमैच: ITR में दिखाई गई इनकम और Form 26AS या AIS के आंकड़ों में अंतर होने पर आयकर विभाग रिफंड रोक सकता है, जब तक टैक्सपेयर उस गड़बड़ी को ठीक न कर दे।
अन-वेरिफाई बैंक अकाउंट: अगर बैंक अकाउंट डिटेल्स गलत हैं या अकाउंट ई-फाइलिंग पोर्टल पर वेरिफाई नहीं हुआ है, तो रिफंड क्रेडिट नहीं हो पाता और प्रोसेस अटक जाता है।
गलत डिडक्शन : ऐसे डिडक्शन या छूट का दावा करना, जिनके लिए टैक्सपेयर पात्र नहीं है, रिफंड को रोक सकता है और विभाग अतिरिक्त जांच कर सकता है।
e-verification न होना: रिटर्न फाइल करने के बाद e-verification समय पर नहीं होने पर ITR अधूरी मानी जाती है, जिससे रिफंड जारी नहीं किया जाता।
हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन : बड़े लेन-देन अगर रिस्क असेसमेंट के तहत फ्लैग हो जाते हैं, तो आयकर विभाग रिफंड जारी करने से पहले अतिरिक्त जांच कर सकता है।
बैकएंड प्रोसेसिंग में देरी : कई मामलों में कोई गड़बड़ी न होने के बावजूद आयकर विभाग की सिस्टम या प्रोसेसिंग देरी की वजह से रिफंड अगले बैच में शिफ्ट हो जाता है।
टैक्सपेयर्स को क्या करना चाहिए?
अगर आपका इनकम टैक्स रिफंड अब तक नहीं आया है, तो सबसे पहले अपनी ITR डिटेल्स, Form 26AS/AIS, बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन और e-verification स्टेटस जरूर चेक करें। साथ ही, अगर आयकर विभाग की तरफ से कोई नोटिस आया हो, तो उसका समय पर जवाब देना जरूरी है, ताकि रिफंड में और देरी न हो।