सरकार ने बदले हवाई टिकट रिफंड के नियम, अब बुकिंग के 48 घंटे के भीतर कैंसिलेशन पर कोई चार्ज नहीं

सरकार ने हवाई टिकट रिफंड नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब बुकिंग के 48 घंटे के भीतर टिकट कैंसिल या संशोधित करने पर अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा, कुछ शर्तों के साथ। DGCA ने यात्रियों को राहत देते हुए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Feb 26, 2026 पर 6:27 PM
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CAR के तहत अब एयरलाइंस को 48 घंटे का 'लुक-इन ऑप्शन' देना होगा।

Air Ticket Refund: सरकार ने हवाई यात्रियों को बड़ा राहत दी है। अब अगर आप टिकट बुक करने के 48 घंटे के भीतर उसे कैंसिल या बदलना चाहते हैं, तो अब ज्यादातर मामलों में आपको कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा। विमानन नियामक डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA ने रिफंड नियमों में बदलाव करते हुए उन्हें ज्यादा यात्री अनुकूल बनाया है।

48 घंटे का 'लुक-इन' ऑप्शन क्या है?

रिवाइज्ड सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स यानी CAR के तहत अब एयरलाइंस को 48 घंटे का 'लुक-इन ऑप्शन' देना होगा। इसका मतलब है कि टिकट बुक करने के बाद 48 घंटे के भीतर आप बिना पेनल्टी उसे रद्द या रिवाइज्ड कर सकते हैं। हालांकि अगर आप नई फ्लाइट चुनते हैं और उसका किराया ज्यादा है, तो किराए का अंतर देना होगा।


किन टिकटों पर यह सुविधा लागू नहीं होगी?

यह नियम हर स्थिति में लागू नहीं होगा। अगर आपने टिकट सीधे एयरलाइन की वेबसाइट से बुक की है और उड़ान की तारीख बुकिंग के सात दिन के भीतर है (घरेलू उड़ान के लिए) या 15 दिन के भीतर है (अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए), तो 48 घंटे का यह विकल्प लागू नहीं होगा। 48 घंटे की अवधि खत्म होने के बाद सामान्य कैंसिलेशन या बदलाव शुल्क लागू हो जाएंगे।

नाम सुधारने पर अब अतिरिक्त शुल्क नहीं

DGCA ने यात्रियों को एक और बड़ी राहत दी है। अगर टिकट सीधे एयरलाइन की वेबसाइट से खरीदी गई है और बुकिंग के 24 घंटे के भीतर नाम में गलती की जानकारी दे दी जाती है, तो नाम सुधार के लिए एयरलाइन कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं ले सकती।

एजेंट से बुकिंग पर भी एयरलाइन की जिम्मेदारी

नियामक ने साफ किया है कि अगर टिकट ट्रैवल एजेंट या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए बुक की गई है, तब भी रिफंड की जिम्मेदारी एयरलाइन की ही होगी। एजेंट एयरलाइन के प्रतिनिधि माने जाते हैं, इसलिए रिफंड प्रोसेस एयरलाइन को ही करना होगा। एयरलाइंस को 14 कार्य दिवस के भीतर रिफंड पूरा करना होगा।

मेडिकल इमरजेंसी में क्या होगा?

नए नियम मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति को भी कवर करते हैं। अगर यात्रा अवधि के दौरान यात्री या उसी PNR पर दर्ज परिवार का कोई सदस्य अस्पताल में भर्ती हो जाता है, तो एयरलाइन रिफंड या क्रेडिट शेल देने का विकल्प दे सकती है। अन्य मामलों में रिफंड का फैसला एयरलाइन या DGCA द्वारा पैनल किए गए एयरोस्पेस मेडिसिन एक्सपर्ट की राय के आधार पर होगा, जो यात्री की यात्रा करने की फिटनेस का आकलन करेगा।

शिकायतों के बाद लिया गया फैसला

रिफंड में देरी को लेकर शिकायतें बढ़ रही थीं। दिसंबर 2025 में इंडिगो से जुड़ी उड़ान व्यवधान की घटनाओं के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया था। इसके बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइन को लंबित रिफंड जल्द निपटाने का निर्देश दिया था।

DGCA के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में निर्धारित एयरलाइंस को यात्रियों से जुड़ी 29,212 शिकायतें मिलीं। इनमें से 7.5 प्रतिशत शिकायतें रिफंड से संबंधित थीं। उसी महीने घरेलू एयरलाइंस ने 1.43 करोड़ से ज्यादा यात्रियों को यात्रा कराई।

पूरे 2025 में भारतीय एयरलाइंस ने 16.69 करोड़ से अधिक यात्रियों को ढोया। यह आंकड़ा बताता है कि भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और इतने बड़े पैमाने पर संचालन के बीच यात्री हितों की सुरक्षा और भी अहम हो जाती है।

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