गुरुग्राम में घर बनाना हुआ मुश्किल! पड़ोसी की इजाजत के बिना नहीं बना सकते मकान, एक साइन के मांग रहे 40 लाख

गुरुग्राम में अब मकान बनाना आसान नहीं है। गुरुग्राम में मकान बनाने के लिए अपने पड़ोसी से लिखित में इजाजत लेनी होगी। बिना पड़ोसी की इजाजत के मकान नहीं बना सकते। सिर्फ इस इजाजत यानी एक साइन के लिए पड़ोसी 40 लाख रुपये मांग रहे हैं। अब राज्य सरकार नई पॉलिसी लेकर आई है। जानें क्या है पूरा मामला..

अपडेटेड Jul 17, 2025 पर 9:04 AM
गुरुग्राम में मकान बनाने के लिए अपने पड़ोसी से लिखित में इजाजत लेनी होगी।

गुरुग्राम में अब मकान बनाना सिर्फ इंजीनियरिंग या वास्तु पर फोकस करना नहीं है। अब यहां घर बनाना अपने पड़ोसी से बातचीत और सौदेबाजी बन गया है। गुरुग्राम में मकान बनाने के लिए अपने पड़ोसी से लिखित में इजाजत लेनी होगी, यहां से शुरू हो जाती है सौदेबाजी। पड़ोसी सिर्फ पेपर पर साइन करने के लिए 40 लाख रुपये तक मांग रहे हैं। यानी, मकान बनाने के लिए पड़ोसी से NOC यानी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट पर साइन कराने के लिए पैसों पर बारगेन करना पड़ रहा है। ये पड़ोसी प्रॉपर्टी की मार्केट प्राइस का 10 फीसदी तक कमीशन मांग रहे हैं। दरअसल, ये सब हरियाणा सरकार की नई पॉलिसी की वजह से ऐसा हो रहा है।

हरियाणा सरकार लाई नई पॉलिसी

हरियाणा सरकार की नई स्टिल्ट + 4 नीति के तहत अब चार मंजिलों तक मकान बनाए जा सकते हैं। लेकिन चौथी मंजिल बनाने के लिए कई मामलों में पड़ोसी से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना जरूरी होता है। अब यहीं से नया चलन यानी आप मकान बनाने जाओगो तो आपका पड़ोसी भी पैसा यानी कमीशन मांग रहा है।


पड़ोसी एक साइन के मांग रहे हैं 40 लाख

हाल ही में इनवेस्टमेंट बैंकर सार्थक आहूजा ने इस ट्रेंड को लिंक्डइन पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि अब गुरुग्राम में पड़ोसी NOC देने के बदले 40 लाख रुपये तक की मांग कर रहे हैं। इसकी वजह? चौथी मंजिल बनने के बाद उसकी कीमत 4 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। ऐसे में पड़ोसी 10% हिस्सा मांग रहे हैं, और ये कानूनन पूरी तरह वैध है। अगर कोई पड़ोसी NOC नहीं देता, तो मकान मालिक को 1.8 मीटर का सेटबैक छोड़ना पड़ता है, जिससे लैंड का पूरा उपयोग नहीं हो पाता और नुकसान हो सकता है। कुछ लोग इसे समझदारी से की गई सौदेबाजी मानते हैं, तो कुछ इसे आसानी से की जाने वाली वसूली मान रहे हैं।

पड़ोसी का पैसा मांगना नहीं है गलत?

अधिकारियों का कहना है कि ये नीति मकान की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बनाई गई है, लेकिन इससे पड़ोस में रिश्तों की जगह अब ट्रांजेक्शन वाली भावना आ गई है। कानूनी जानकारों के अनुसार इस तरह के पेमेंट पर कोई रोक नहीं है, लेकिन नैतिक रूप से इसे लेकर बहस चल रही है। क्या ये सही है कि पड़ोसी अपने साइन के बदले लाखों रुपये मांगें? अब गुरुग्राम की गलियों में मकान बनाने से पहले पड़ोसी से संबंध मजबूत करना भी जरूरी हो गया है।

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