1 सितंबर से शुरू होगी चांदी की हॉलमार्किंग, क्या चांदी और होगी महंगी?

Silver Hallmarking: सरकार अब सोने की तरह चांदी के गहनों पर भी शुद्धता की गारंटी देने की तैयारी कर रही है। 1 सितंबर 2025 से चांदी की ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग का नया नियम लागू होगा। फिलहाल यह नियम अनिवार्य नहीं बल्कि वॉलंटरी रहेगा

अपडेटेड Aug 27, 2025 पर 5:57 PM
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सरकार अब सोने की तरह चांदी के गहनों पर भी शुद्धता की गारंटी देने की तैयारी कर रही है।

Silver Hallmarking:  सरकार अब सोने की तरह चांदी के गहनों पर भी शुद्धता की गारंटी देने की तैयारी कर रही है। 1 सितंबर 2025 से चांदी की ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग का नया नियम लागू होगा। फिलहाल यह नियम अनिवार्य नहीं बल्कि वॉलंटरी रहेगा। यानी ग्राहक चाहे तो हॉलमार्क वाली ज्वेलरी खरीदें या बिना हॉलमार्क वाली। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोग धीरे-धीरे हॉलमार्क वाली चांदी की ओर ही ज्यादा भरोसा दिखाएंगे।

क्या है नया बदलाव?

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने चांदी की शुद्धता के लिए 6 स्टैंडर्ड 800, 835, 900, 925, 970 और 990 तय किए हैं। अब हर हॉलमार्क वाली ज्वेलरी पर एक 6 अंकों का यूनिक कोड (HUID) होगा। इससे तुरंत पता चल जाएगा कि गहना किस शुद्धता का है और वह असली है या नहीं। यह सिस्टम पुराने हॉलमार्किंग तरीके की जगह लेगा और ज्यादा ट्रांसपेरेंसी लाएगा।


हॉलमार्किंग क्यों जरूरी है?

हॉलमार्किंग का मतलब होता है मेटल की शुद्धता को प्रमाणित करना। BIS के लैब में टेस्टिंग के बाद ज्वेलरी पर निशान लगाया जाता है। इससे ग्राहक को भरोसा रहता है कि जिस गहने के लिए वह पैसे दे रहा है, वह उतना ही शुद्ध है।

ग्राहकों को क्या फायदा मिलेगा?

बिना हॉलमार्क वाली ज्वेलरी में मिलावट की संभावना बनी रहती है। लेकिन अब हॉलमार्क और HUID नंबर से धोखाधड़ी की गुंजाइश कम होगी। ग्राहक आसानी से BIS Care App पर जाकर Verify HUID फीचर से यह चेक कर सकेंगे कि गहनों पर अंकित कोड असली है या नकली। इस तरह गहनों की खरीदारी ज्यादा सुरक्षित होगी।

सोने की तरह अब चांदी

जैसे सरकार ने साल 2021 में सोने की ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग अनिवार्य की थी, वैसे ही अब चांदी पर भी यह नियम लागू किया जा रहा है। इसका मकसद ज्वेलरी मार्केट को और ट्रांसपेरेंट बनाना है ताकि ग्राहक को असली प्रोडक्ट ही मिले।

1 सितंबर के बाद क्या बदलेगा?

इस तारीख से ग्राहक के पास विकल्प होगा, चाहे तो हॉलमार्क वाली चांदी लें या बिना हॉलमार्क वाली। हालांकि, ज्यादातर खरीदार अब हॉलमार्क वाली ज्वेलरी पर ही विश्वास करेंगे। इससे न केवल ग्राहकों को फायदा होगा बल्कि ज्वेलरी इंडस्ट्री में भी भरोसा बढ़ेगा।

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