400 करोड़ का बकाया...हरियाणा में आयुष्मान भारत का अब नहीं मिलेगा लाभ! जानिए क्या है मामला

हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना के तहत लोगों का इलाज करने वाले अस्पतालों के करोड़ों रुपये बाकी हैं, जिसके चलते आईएमए हरियाणा ने बड़ा ऐलान किया है। ऐलान के मुताबिक, अब राज्य के 600 प्राईवेट अस्पतालों में 3 फरवरी से केंद्र की आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं किया जाएगा

अपडेटेड Jan 27, 2025 पर 3:25 PM
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राज्य सरकार द्वारा भुगतान में महीनों से हो रही देरी के कारण अस्पतालों के लिए खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया है

Ayushman Bharat Scheme: केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। लेकिन हरियाणा में इसका असर अस्पतालों पर पड़ रहा है जहां पर अस्पतालों को करोड़ों रुपये का बकाया है। जिसकी वजह से आईएमए की हरियाणा इकाई ने घोषणा की है कि राज्य के कम से कम 600 निजी अस्पताल 3 फरवरी से मरीजों का इलाज नहीं करेंगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि सरकार ने अभी तक 400 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान नहीं किया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत राज्य के करीब 1,300 अस्पताल आते हैं, जिनमें 600 निजी अस्पताल भी शामिल हैं।

आयुष्मान भारत सेवाओं को बंद किया जाएगा


एसोसिएशन ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि उसने आयुष्मान भारत के तहत दी जाने वाली सेवाओं को बंद करने का फैसला इसलिए लिया, क्योंकि राज्य सरकार द्वारा भुगतान में महीनों से हो रही देरी के कारण अस्पतालों के लिए खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया है। गुड़गांव के एक अस्पताल के डॉक्टर ने कहा कि अब बिना जरूरी पैसों के अस्पताल चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा, "भुगतान की प्रक्रिया बहुत ही धीमी है और नए बिल लगातार जमा होते रहते हैं। हमें तुरंत भुगतान मिलना चाहिए।"

आईएमए (हरियाणा) के अध्यक्ष क्या कहा

आईएमए (हरियाणा) के अध्यक्ष डॉ. महावीर जैन ने बताया, प्राईवेट अस्पतालों को पिछले कई महीनों से भुगतान नहीं मिला है। उन्होंने कहा, "हमें तुरंत भुगतान मिलना चाहिए क्योंकि बिना पैसे के अस्पताल चलाना डॉक्टरों के लिए बहुत मुश्किल है। लगभग ₹400 करोड़ का बकाया है। अस्पताल पहले ही इन चिकित्सा बिलों पर छूट दे चुके हैं। अगर उन्हें न्यूनतम राशि भी नहीं मिलेगी, तो वे कैसे चलेंगे?"

आईएमए अधिकारियों ने कहा कि अस्पतालों को सरकार से जमा किए गए रिम्बर्समेंट बिलों का सिर्फ 10-15% ही मिला है। आमतौर पर जब अस्पताल किसी मरीज का इलाज करता है जो स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम के तहत आता है तो वह रिम्बर्समेंट के लिए रिक्वेस्ट भेजता है। यह रिक्वेस्ट ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भेजा जाता है और उम्मीद होती है कि राज्य सरकार इसे मंजूरी देगी, जिसके बाद अस्पतालों को पैसे मिलते हैं।

सीएम से इस मुद्दे पर हुई थी बात

एसोसिएशन के सदस्यों के मुताबिक, इस मुद्दे को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने एक बैठक में उठाया गया था। उन्होंने बकाया धनराशि का शीघ्र वितरण करने का आदेश दिया था, लेकिन अस्पतालों को सिर्फ एक हिस्सा ही मिला है। आईएमए-हरियाणा के सचिव धीरेंद्र के सोनी ने कहा कि यह बहुत दुख की बात है कि 15 दिन बाद भी सदस्यों को कोई महत्वपूर्ण राशि नहीं मिली है और जो पैसा मिला है, उसमें काफी अनुचित कटौती की गई है।

एक सप्ताह के अंदर हो जाएगा समस्या का समाधान

इस घोषणा के बारे में पूछे जाने पर आयुष्मान भारत (हरियाणा) की संयुक्त सीईओ अंकिता अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि उन्हें सेवाओं के बंद होने की सूचना नहीं मिली। उन्होंने बताया, "हमने पहले ही फंड जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हमें उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर समस्या का समाधान हो जाएगा और इस तरह के कठोर कदम की जरूरत नहीं पड़ेगी।"

किनको मिलता है फायदा

बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में आयुष्मान भारत योजना शुरू की थी। इस योजना में हर परिवार को सालाना 5 लाख रुपये तक की मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है। राज्य में लगभग 1.2 करोड़ लोग इस योजना में नामांकित हैं, जिसमें नियमित जांच से लेकर सर्जरी तक की सेवाएं शामिल हैं। इस योजना का लाभ उन परिवारों को मिलता है, जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है। इसके साथ ही बुजुर्गों और अन्य पात्र व्यक्तियों को भी इसका फायदा मिलता है।

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