Health Policy Premium: आपकी हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम नहीं बढ़ेगा, इन 6 तरीकों का करें इस्तेमाल

Health Policy Premium: हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। इससे कई लोगों को पॉलिसी रिन्यू कराने में दिक्कत आ रही है। हालांकि, हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम को कंट्रोल में रखा जा सकता है। इसके लिए कुछ खास तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है

अपडेटेड Aug 12, 2025 पर 1:55 PM
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कुछ बीमा कंपनियां रेगुलेर हेल्थ चेक-अप शिड्यूल मेंटेन करने वाले पॉलिलीहोल्डर को प्रीमियम में बेनेफिट्स ऑफर करती हैं।

बड़े प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराना काफी महंगा हो गया है। हेल्थ इंश्योरेंस के बगैर प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज कराने पर पूरी सेविंग्स खर्च हो जाने का डर रहता है। उधर, हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम कोविड के बाद काफी बढ़ा है। खासकर सीनियर सिटीजन की हेल्थ पॉलिसी काफी महंगी हो गई है। कुछ तरीके हैं, जिनसे हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम को नियंत्रण में रखा जा सकता है। आइए इन तरीकों के बारे में जानते हैं।

1. डिडक्टेबल का इस्तेमाल

डिडेक्टेबल वह पैसा है, जिसका पेमेंट बीमा कंपनी के प्रोसेस में दाखिल होने से पहले आप अपनी जेब से करते हैं। डिजिट इंश्योरेंस की हेड-प्रोडक्ट्स अकांक्षा जैन ने बताया, "5,000 या 10,000 रुपये का डिडक्टेबल सेलेक्ट करने से पहले आपका प्रीमियम 10-20 फीसदी तक कम हो जाता है। इसे सुपर-टॉप अप प्लान के साथ पेयर करने से कम खर्च में ज्यादा कवर मिल जाता है। इससे बड़ी बीमारी के इलाज में कम्प्रिहेंसिव कवरेज का फायदा होता है।"

2. 'सुपर' टॉप-अप प्लान


एक सुपर टॉप-अप प्लान इसका इस्तेमाल तब होता है जब आपका बेस बीमा कवर पूरी तरह खर्च हो जाता है। इसे एक उदाहरण की मदद से आसानी से समझा जा सकता है। मान लीजिए आपके पास 5 लाख रुपये की बेस पॉलिसी है और 10 लाख रुपये का सुपर टॉप-अप है। ऐसे में अगर 7 लाख का क्लेम बनता है तो बेस पॉलिसी के 5 लाख रुपये का इस्तेमाल पहले होगा। बाकी 2 लाख रुपये का पेमेंट टॉप-अप पॉलिसी से होगा।

सुपर टॉप-अप बेस पॉलिसीज से काफी कम कीमत में मिल जाता है। इस कंबिनेशन से बगैर ज्यादा कॉस्ट इंश्योरेंस कवरेज बढ़ जाता है। टॉप-अप प्लान के इस्तेमाल की जरूरत तब पड़ती है जब सिंगल क्लेम अमाउंट डिडक्टेबल या बेसिक प्लान में उपलब्ध कवर से ज्यादा हो जाता है। सुपर टॉप-अप प्लान की जरूरत तब पड़ती है जब किसी साल में क्युमुलेटिव क्लेम अमाउंट डिडक्टेबल से ज्यादा हो जाता है।

3. प्रीमियम पर डिस्काउंट का उठाएं फायदा

इंश्योरेंस कंपनियां कई तरह का डिस्काउंट ऑफर करती हैं, जिससे प्रीमियम 10-20 फीसदी कम हो जाता है। लॉन्ग टर्म पॉलिसी डिस्काउंट भी मिलता है। जैन ने कहा कि हर साल पॉलिसी रिन्यू कराने की जगह आप दो साल या 3 साल की पॉलिसी सेलेक्ट कर सकते हैं। फैमिली फ्लोटर डिस्काउंट का भी फायदा उठाया जा सकता है। इसमें एक प्लान में परिवार के कई सदस्य कवर होते हैं। इंश्योरेंस कंपनियां उन पॉलिसीहोल्डर्स को रिवॉर्ड ऑफर करती हैं जिनके पास उसी कंपनी की मोटर, होम जैसी पॉलिसी पहले से होती है।

4. रेगुलर चेक-अप कराएं

कुछ बीमा कंपनियां रेगुलर हेल्थ चेक-अप शिड्यूल मेंटेन करने वाले पॉलिलीहोल्डर को प्रीमियम में बेनेफिट्स ऑफर करती हैं। किसी बीमारी के बारे में जल्द पता चल जाने से उसके इलाज पर आने वाला खर्च कम हो जाता है। वेलनेस बेनेफिट्स के तहत डेली टारगेट हासिल करने पर प्रीमियम 100 फीसदी तक कम हो जाता है। उदाहरण के लिए आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस हेल्थरिटर्न फीचर के तहत 100 फीसदी प्रीमियम वापस कर देता है। इसके तहत आपको रोजाना 10,000 स्टेप्स वॉक करना होता है या जिम में 300 कैलोरीज या हाई प्रोटीन बर्न करना पड़ता है। ऐसे पॉलिसीहोल्डर्स जो 325 दिन पूरा कर लेते हैं और एक खास हार्ट स्कोर मेंटेन करते हैं उन्हें रिन्यूअल पर 100 फीसदी प्रीमियम वापस कर दिया जाता है।

5. पॉलिसी पोर्ट कराने का विकल्प

रिन्यूअल के वक्त इंश्योरेंस कंपनी को बदलने से काफी फायदा होता है। जैन ने कहा, "पोर्टिंग की इजाजत पॉलिसी के सिर्फ रिन्यूएल के वक्त मिलती है। बीच में पॉलिसी पोर्ट नहीं कराई जा सकती।" पॉलिसी पोर्ट कराने का मतलब है कि आप मौजूदा इंश्योरेंस कंपनी की जगह दूसरी इंश्योरेंस कंपनी से पॉलिसी ले रहे है। इस दौरान आपकी पुरानी पॉलिसी के बेनेफिट्स खत्म नहीं होते है।

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7. कम टैरिफ वाले रूम का इस्तेमाल

रूम रेंट का असर आपकी पॉलिसी के प्रीमियम पर पड़ता है। आप जिस रूम का इस्तेमाल करते हैं, उससे डॉक्टर की फीस और डायनॉस्टिक चार्जेज जुड़े रहते हैं। इस वजह से ज्यादा रेंट वाले रूम के इस्तेमाल से क्लेम अमाउंट बढ़ जाता है।

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