होम लोन की EMI में बस छोटा सा बदलाव, हो जाएगी ₹18 लाख तक की बचत; समझिए पूरा हिसाब
Home Loan EMI: होम लोन की EMI चुकाने के तरीके में छोटा सा बदलाव 20-30 साल के लोन को कई साल पहले खत्म कर सकता है। EMI बढ़ाए बिना ब्याज में ₹12-18 लाख तक की बचत मुमकिन है। एक्सपर्ट से जानिए आसान और सेफ तरीका।
होम लोन में प्रिंसिपल जितना जल्दी कम होता है, उतने कम अमाउंट पर ब्याज लगता है।
Home Loan EMI: होम लोन लेते वक्त ज्यादातर लोग मान लेते हैं कि 20-30 साल तक EMI देना ही पड़ेगा। हर महीने तय रकम कटती रहेगी और एक बड़ी रकम ब्याज में चली जाएगी। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अगर EMI चुकाने के तरीके में थोड़ा सा भी दिमाग लगाया जाए, तो वही लोन कई साल पहले खत्म हो सकता है।
टैक्स और फाइनेंस एक्सपर्ट CA नितिन कौशिक के मुताबिक, EMI की रकम बढ़ाए बिना सिर्फ पेमेंट का तरीका बदलने से लोन की अवधि 5-7 साल तक घट सकती है और ब्याज में लाखों रुपये बचाए जा सकते हैं। यह कोई जटिल स्कीम नहीं है, न ही बैंक से नई बातचीत की जरूरत पड़ती है। बस एक छोटी सी स्मार्ट प्लानिंग आपको लंबे कर्ज के बोझ से जल्दी आजादी दिला सकती है।
EMI बढ़ाए बिना घटेगा लोन का बोझ
नितिन कौशिक ने X पर इसे 'quiet home-loan hack' बताया है। इस तरीके में न तो EMI बढ़ानी होती है और न ही ब्याज दर बदलनी पड़ती है। बस महीने में एक बार EMI देने के बजाय हर 15 दिन में EMI का आधा हिस्सा चुकाना होता है।
हर 15 दिन में EMI देने का फायदा
आमतौर पर लोग साल में 12 EMI चुकाते हैं, यानी हर महीने एक EMI। लेकिन जब हर 15 दिन में आधी EMI दी जाती है, तो साल में कुल 26 आधी EMI हो जाती हैं। यह मिलकर 13 पूरी EMI के बराबर होती हैं। यानी बिना महसूस किए आप हर साल एक अतिरिक्त EMI चुका देते हैं, जो सीधे प्रिंसिपल अमाउंट को कम करती है।
ब्याज कैसे कम हो जाता है
प्रिंसिपल जितना जल्दी कम होता है, उतने कम अमाउंट पर ब्याज लगता है। हर 15 दिन में भुगतान होने से लोन का बकाया तेजी से घटता है और ब्याज की गणना वाली रकम कम होती जाती है। इसी वजह से कुल ब्याज खर्च में बड़ा फर्क पड़ता है।
कितनी बचत मुमकिन है
CA नितिन कौशिक के मुताबिक, अगर किसी का ₹50-60 लाख का होम लोन है और ब्याज दर 8-9% के आसपास है, तो इस तरीके से लोन की अवधि करीब 6 से 7 साल तक घट सकती है। इसके साथ ही ब्याज में करीब ₹12-18 लाख तक की बचत हो सकती है, जो लोन की अवधि और ब्याज दर पर निर्भर करेगी।
लोन की शर्तें बदले बिना फायदा
इस तरीके की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें न तो बैंक से दोबारा बात करने की जरूरत है और न ही ब्याज दर या EMI अमाउंट बदलना पड़ता है। सिर्फ EMI देने की टाइमिंग बदलने से ही यह फायदा मिल सकता है।
कुछ जरूरी बातें पहले जांच लें
हालांकि, हर बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी बाइविकली EMI की सुविधा नहीं देती। इसलिए यह तरीका अपनाने से पहले अपने बैंक या लेंडर से जरूर पूछ लें। ज्यादातर बैंक ब्याज की गणना महीने के हिसाब से करते हैं, लेकिन प्रिंसिपल जल्दी घटने से कुल ब्याज खर्च फिर भी कम हो जाता है।
अगर 15 में EMI की सुविधा नहीं तो...
अगर बैंक 15–15 दिन में EMI लेने की सुविधा नहीं देता, तो सबसे सेफ और हर किसी के लिए काम करने वाली स्ट्रैटेजी यही है कि साल में कम से कम एक एक्स्ट्रा EMI जरूर होम लोन में डालें। यह रकम सीधे प्रिंसिपल घटाती है, जिससे ब्याज अपने आप कम हो जाता है और लोन की अवधि कई साल घट सकती है।
इस एक्स्ट्रा EMI के लिए अलग से दबाव लेने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि बोनस, टैक्स रिफंड या इन्क्रिमेंट का छोटा हिस्सा इसमें इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि EMI बढ़ाने के बजाय बैंक से टेन्योर घटाने को कहा जाए, ताकि हर महीने का बजट भी न बिगड़े और लोन भी तय समय से काफी पहले खत्म हो जाए।