Home Loan EMI: अगर ब्याज दरों में कटौती के बाद भी आपको होम लोन महंगा लग रहा है, तो अब उसे दूसरे बैंक में ट्रांसफर करना आपके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। कई बार लोग सालों तक पुराने ज्यादा ब्याज वाले होम लोन को ही चलाते रहते हैं, जबकि बाजार में कम ब्याज दर पर बेहतर विकल्प उपलब्ध होते हैं। थोड़ी सी ब्याज दर की कमी भी लंबे समय में लाखों रुपये की सेविंग करा सकती है।
जब रिजर्व बैंक या बैंक ब्याज दरें घटाते हैं, तो नए ग्राहकों को तुरंत कम दरों का फायदा मिल जाता है। लेकिन पुराने ग्राहकों को अक्सर वही पुरानी दरें चुकानी पड़ती हैं। ऐसे में होम लोन स्विच या बैलेंस ट्रांसफर करना एक अच्छा विकल्प बन जाता है। इसका मतलब है कि आप अपने मौजूदा होम लोन को कम ब्याज दर वाले बैंक में ट्रांसफर कर सकते हैं।
सबसे पहले अपने मौजूदा होम लोन की जानकारी देखें। यह जानना जरूरी है कि आप अभी कितनी ब्याज दर चुका रहे हैं, कितना लोन बाकी है और कितने साल की EMI बची हुई है। इसके बाद बाजार में दूसरी बैंकों की ब्याज दरों से तुलना करें। अगर आपकी मौजूदा दर और नई दर में करीब 0.50% का भी अंतर है, तो लंबे समय में अच्छी सेविंग हो सकती है।
कई बार लोन ट्रांसफर करने की जरूरत भी नहीं पड़ती। आपका मौजूदा बैंक ही कम ब्याज दर देने को तैयार हो सकता है। इसके लिए बैंक एक छोटा कन्वर्जन चार्ज लेता है और आपकी ब्याज दर कम कर देता है। यह तरीका आसान होता है क्योंकि इसमें ज्यादा डॉक्यूमेंट या नई प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ती।
अगर आपका बैंक अच्छी दर नहीं दे रहा, तो आप दूसरे बैंक में बैलेंस ट्रांसफर कर सकते हैं। हालांकि इसमें कुछ मेहनत और खर्च होता है। आपको दोबारा डॉक्यूमेंट जमा करने पड़ते हैं, नई अप्रूवल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और प्रोसेसिंग फीस, लीगल चार्ज जैसे खर्च भी देने पड़ सकते हैं। इसलिए फैसला लेने से पहले यह जरूर देखें कि कम ब्याज से होने वाली सेविंग इन खर्चों से ज्यादा है या नहीं।
जब ब्याज दर कम होती है, तो आपकी EMI भी कम हो सकती है। लेकिन असली फायदा कुल ब्याज सेविंग में होता है। अगर आप कम ब्याज दर मिलने के बाद भी पुरानी EMI ही भरते रहें, तो आपका लोन जल्दी खत्म हो सकता है और ब्याज पर बड़ी सेविंग हो सकती है।
यह विकल्प खासकर उन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद है जिनके होम लोन का पीरियड अभी लंबा है। शुरुआती सालों में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है, इसलिए उस समय ब्याज दर कम होने का फायदा ज्यादा मिलता है। वहीं अगर आपका लोन खत्म होने वाला है, तो सेविंग कम हो सकती है।