Housing Prices: घर बनवाना महंगा हुआ! 5 साल में 34% बढ़ी लागत; ईरान संकट ने और बढ़ाई मुश्किल

Housing Prices: देश के सात बड़े शहरों में घर बनाना लगातार महंगा हुआ है। पांच साल में निर्माण लागत 34% बढ़ी, जबकि घरों की कीमत 59% चढ़ी। जमीन की कीमत और पश्चिम एशिया तनाव ने डेवलपर्स की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Sep 07, 2026 पर 4:10 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
Anarock के मुताबिक, घरों की कीमत बढ़ने में करीब 66% योगदान निर्माण लागत का रहा।

Housing Prices: देश के सात बड़े शहरों में घरों की कीमत तेजी से बढ़ी है। 2021 से 2025 के बीच इनमें 59% का उछाल आया। वहीं, इसी दौरान घर बनाने की लागत करीब 34% बढ़ी। यानी घरों का दाम निर्माण लागत के मुकाबले काफी तेज बढ़ी है। Anarock Research की रिपोर्ट में इसकी बड़ी वजह जमीन की बढ़ती कीमतों को बताया गया है।

दाम किस तरह से बढ़ रहे हैं?

2021 में एक स्टैंडर्ड-प्लस रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट की औसत निर्माण लागत ₹2,681 प्रति वर्ग फुट थी। 2025 में यह बढ़कर ₹3,604 प्रति वर्ग फुट हो गई। यानी सालाना करीब 6.9% की बढ़ोतरी हुई।


दूसरी तरफ, घरों की औसत कीमत 2021 में ₹5,826 प्रति वर्ग फुट थी। 2025 में यह बढ़कर ₹9,260 प्रति वर्ग फुट हो गई। इसकी सालाना बढ़ोतरी करीब 12% रही।

निर्माण लागत का कितना हाथ?

Anarock के मुताबिक, घरों की कीमत बढ़ने में करीब 66% योगदान निर्माण लागत का रहा। बाकी 34% बढ़ोतरी जमीन की कीमत, डेवलपर मार्जिन और मांग-सप्लाई जैसे कारणों से हुई।

Anarock Group के वाइस चेयरमैन संतोष कुमार के मुताबिक, पिछले पांच साल में बड़े शहरों में जमीन की कीमत तेजी से बढ़ी है। इंफ्रास्ट्रक्चर, मांग-सप्लाई, लोकेशन और डेवलपर की कीमत तय करने की रणनीति का भी असर पड़ा है।

जमीन की कीमत 120% तक बढ़ी

रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से 2026 की पहली छमाही के बीच सात बड़े शहरों में जमीन की कीमत 50-120% तक बढ़ी। NCR में जमीन की कीमत 70-130% तक बढ़ी। बेंगलुरु में भी इसमें 60-120% का उछाल आया।

संतोष कुमार के मुताबिक, महंगी जमीन का सीधा असर प्रोजेक्ट की लागत और घर की कीमत पर पड़ता है। खासकर उन इलाकों में जहां इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बन रहा है। ऐसे इलाकों में प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही जमीन महंगी हो जाती है।

पश्चिम एशिया तनाव से भी बढ़ा दबाव

निर्माण लागत पर अब ईरान युद्ध यानी पश्चिम एशिया विवाद का भी असर पड़ा है। Anarock का अनुमान है कि इससे कुल निर्माण लागत में 8-10% की और बढ़ोतरी हुई है। स्टील और ईंधन से जुड़ी लॉजिस्टिक्स लागत सबसे ज्यादा बढ़ी है।

स्टील की कीमत करीब 20% बढ़ी है। TMT बार करीब ₹72,000 प्रति टन पहुंच गया है। ईंधन और साइट लॉजिस्टिक्स की लागत 15-20% बढ़ी है। टाइल्स, ग्लास और हार्डवेयर जैसे फिनिशिंग मटेरियल भी 8-12% महंगे हुए हैं। वहीं MEP यानी मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग की लागत 9-13% बढ़ी है।

लेबर अभी भी सबसे बड़ा खर्च

किसी प्रोजेक्ट की कुल लागत में लेबर का हिस्सा करीब 25-30% है। हालांकि, इसकी लागत में बढ़ोतरी बाकी चीजों के मुकाबले कम रही। लेबर कॉस्ट करीब 5-6% बढ़ी है। सीमेंट की कीमत में भी करीब 4-5% की बढ़ोतरी हुई है।

MEP लागत में तेजी ज्यादा रही। 2023 से 2025 के बीच कोर बिल्डिंग की लागत 13% बढ़कर ₹2,212 प्रति वर्ग फुट हो गई। वहीं MEP लागत 17% से ज्यादा बढ़कर ₹788 प्रति वर्ग फुट पहुंच गई। 2025 में कुल निर्माण लागत में MEP का हिस्सा करीब 22% था।

नए और पुराने प्रोजेक्ट पर अलग असर

बढ़ती लागत से पहले लॉन्च और बिक चुके प्रोजेक्ट पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे प्रोजेक्ट में डेवलपर के पास कीमत बढ़ाने की गुंजाइश कम होती है। इससे मार्जिन प्रभावित हो सकता है।

नए प्रोजेक्ट में कीमत बढ़ाने की गुंजाइश ज्यादा है। लेकिन यहां भी एक सीमा है। मिड-इनकम और अफोर्डेबल हाउसिंग में ज्यादा कीमत बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। इसकी वजह घर खरीदारों की सीमित भुगतान क्षमता है।

Atal Pension Yojana: ₹5000 पेंशन की सरकारी गारंटी, समझिए निवेश और कमाई का पूरा हिसाब

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।