आज के दौर में क्रेडिट कार्ड सिर्फ एक प्लास्टिक कार्ड नहीं, बल्कि आपकी जिंदगी का स्टाइलिश साथी बन गया है। मॉल में घूमते हुए, ऑनलाइन शॉपिंग करते समय या फोन पर नोटिफिकेशन आने पर बैंक आपको कार्ड थमाने को आतुर नजर आते हैं। लेकिन सवाल यह है कि 45 दिनों का फ्री क्रेडिट, रिवॉर्ड पॉइंट्स और कैशबैक देने के चक्कर में बैंक को क्या मिलता है? सच तो यह है कि हर स्वाइप पर वे चुपके से अपनी कमाई का जाल बुनते जाते हैं। अगर आप समय पर बिल चुका देते हैं तो फायदा आपका, लेकिन एक दिन की देरी और आप बैंक के सबसे प्यारे 'ग्राहक' बन जाते हैं।
बैंकों की सबसे बड़ी कमाई का राज है ब्याज का जाल। कार्ड पर हर खरीदारी के बाद 45 दिनों का ग्रेस पीरियड मिलता है, लेकिन ड्यू डेट मिस की तो एनुअल परसेंटेज रेट (APR) चालू हो जाता है। यह 15 से 40 फीसदी तक का ब्याज बकाया रकम पर रोजाना चढ़ता है। कल्पना कीजिए कि आपका 50 हजार का बिल बकाया है तो महीनों बाद यह दोगुना हो सकता है। यही वह 'गोल्ड माइन' है जहां बैंक सबसे ज्यादा मुनाफा कमाते हैं। इसके अलावा फीस की लंबी लिस्ट है जैसे एनुअल मेंबरशिप फीस (500 से 10,000 रुपये सालाना), लेट पेमेंट पर 500-1,200 का जुर्माना, कैश विदड्रॉल पर 2.5-3.5 फीसदी चार्ज, और EMI कन्वर्जन पर प्रोसेसिंग फीस प्लस ब्याज।
जब आप कार्ड स्वाइप करते हैं, तो मर्चेंट इंटरचेंज फी (1-3 फीसदी) बैंक को जाती है। अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ टाई-अप से भी ब्रांड्स प्रायोजित डिस्काउंट देते हैं, बदले में बैंक उन्हें ग्राहक ट्रैफिक का फायदा पहुंचाते हैं। डेबिट कार्ड से फर्क साफ है वह तो आपके खाते का पैसा खर्च करता है, जबकि क्रेडिट कार्ड बैंक का उधार देता है, जिससे आप ज्यादा शॉपिंग करते हैं और उनका बिजनेस बढ़ता है।
स्मार्ट यूजर्स के लिए यह वरदान है
रिवॉर्ड्स, लाउंज एक्सेस और कैशबैक से बचत होता है। लेकिन जरा सी लापरवाही कर्ज का बोझ बढ़ा सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं, बिल का 100 फीसदी समय पर भरना जरूरी है और कैश एडवांस से बचना भी जरूरी है। लाखों लोग इसी 'मैजिक फॉर्मूले' से बैंक को अरबों का फायदा पहुंचा चुके हैं।