भारत में कई लोग अपनी सेविंग को बैंक में जमा करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि बैंक सबसे सुरक्षित जगह है। हालांकि, यह सच है कि कई बैंक, चाहे वो बड़े कमर्शियल बैंक हों या प्राइवेट और सहकारी बैंक, कभी-कभी वित्तीय संकट का सामना करते हैं। ऐसा होने पर आम लोगों को अपने जमा पैसे को लेकर परेशानी हो जाती है। ऐसे मामलों में डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) मदद करत है। DICGC भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सहायक संस्था है, जो फेल हुए बैंकों के रीटेल जमाकर्ताओं को 5 लाख रुपये तक की इंश्योरेंस कवर देता है।
इंश्योरेंस क्लेम को ट्रैक करने का आसान तरीका
DICGC ने अगस्त 2024 में एक नया ऑनलाइन टूल दावा सूचक (Daava Soochak) पेश किया है, जिससे जमाकर्ता आसानी से अपने इंश्योरेंस क्लेम की स्थिति जान सकते हैं। यह टूल उन जमाकर्ताओं के लिए है, जिनके बैंक फेल हो गए हैं। इस टूल के जरिए जमाकर्ता तुरंत अपनी जमा अमाउंट के इंश्योरेंस क्लेम की स्थिति जान सकते हैं, जिससे उन्हें परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
छोटे जमाकर्ताओं की सुरक्षा
DICGC की योजना के तहत सभी तरह के जमा जैसे कि सेविंग, फिक्स्ड, करंट और रिकरिंग डिपॉजिट्स को इंश्योरेंस कवर मिलता है। यह कवर फेल बैंकों और उन बैंकों के लिए भी लागू होता है, जिन पर RBI ने मोराटोरियम लगाया है। इस इंश्योरेंस कवर की सीमा 5 लाख रुपये है, जिसमें अमाउंट और ब्याज दोनों शामिल हैं। पहले जमाकर्ताओं को अपने क्लेम के पेमेंट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन 2021 में DICGC एक्ट में रिवीजन के बाद, अब उन्हें 90 दिनों के अंदर इंश्योरेंस अमाउंट मिल जाता है।
दावा सूचक का उपयोग कैसे करें
दावा सूचक का उपयोग करने के लिए, जमाकर्ताओं को DICGC की वेबसाइट (www.dicgc.org.in) पर जाना होगा और वहां 'क्लेम स्टेटस' ट्रैकर का चयन करना होगा। इसके बाद जमाकर्ता अपने बैंक का नाम चुन सकते हैं और मोबाइल नंबर डालकर करके अपने इंश्योरेंस क्लेम की स्थिति देख सकते हैं। फिलहाल यह सुविधा कुछ सहकारी बैंकों के लिए उपलब्ध है, जैसे राष्ट्रीय शहरी सहकारी बैंक (प्रतापगढ़), सर्वोदय सहकारी बैंक आदि।
यदि आपके पास कई बैंकों में जमा अमाउंट है, तो DICGC की इंश्योरेंस कवर की सीमा हर बैंक के लिए अलग-अलग लागू होती है। इसलिये अगर आप अपनी जमा अमाउंट को अलग-अलग बैंकों में बांटते हैं, तो आप इंश्योरेंस कवर का अधिकतम फायदा उठा सकते