कोविड के दौरान कंपनियों ने एंप्लॉयीज को घर से काम (डब्ल्यूएफएच) करने की सुविधा दी थीं। आज कई कंपनियां हाइब्रिड वर्क की सुविधा दे रही हैं। इसका मतलब है कि हफ्ते या महीने में कुछ दिन घर से और बाकी दिन ऑफिस से काम किया जा सकता है। अगर एंप्लॉयी का घर ऑफिस वाले शहर में नहीं है तो उसे उस शहर में घर किराए पर लेना पड़ता है। ऐसे में उसे दो घरों का रेंट चुकाना पड़ता है। ऐसे में एंप्लॉयी किस घर के रेंट पर एचआरए क्लेम करेगा?
ऐसा एक सवाल गुजरात के रहने वाले मयंक जैन ने पूछा है। उन्होंने बताया है कि वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और उनका ऑफिस बेंगलुरु में है। उन्हें महीने में 15 दिन घर से काम करने (WFH) की इजाजत है। वह दो घरों का किराए चुकाते हैं। एक घर गुजरात में है और दूसरा बेंगलुरु में जहां वह हर महीने 15 दिन रहते हैं। उन्हें कंपनी के हर साल करीब 8 लाख रुपये रेंट अलाउन्स मिलता है। वह गुजरात के दो शहरों में 2 फ्लैट्स खरीदना चाहते हैं। वह दोनों घरों को किराए पर देंगे। हर घर का किराया उन्हें 8000 रुपये तक मिलने की उम्मीद है। उनका सवाल है कि क्या वह दोनों घरों के लिए एचआरए क्लेम कर सकते हैं और खरीदे जाने वाले घरों के होम लोन के इंटरेस्ट पर टैक्स बेनेफिट क्लेम कर सकते हैं? मनीकंट्रोल ने यह सवाल मशहूर टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन से पूछा।
जैन ने कहा कि हाउस रेंट अलाउन्स (HRA) बेनेफिट इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में सैलरीड टैक्सपेयर्स को मिलता है। एंप्लॉयी उस घर के रेंट पर एचआरए क्लेम कर सकता है, जिसका इस्तेमाल वह रहने के लिए कर रहा है।
एचआरए का एग्जेम्प्शन अमाउंट निम्नलिखित तीन में से जो सबसे कम होगा, वह लागू होगा।
1. चुकाया गया किराया माइनस बेसिक सैलरी का 10 फीसदी, या
2. बेसिक सैलरी का 50% (मेट्रो सिटीज) या बेसिक सैलरी का 40 फीसदी (नॉन-मेट्रो सिटीज), या
3. एंप्लॉयर से मिलने वाला एक्चुअल एचआरए
सेक्शन 10(13ए) के मुताबिक, एंप्लॉयी इस्तेमाल होने वाले सिर्फ एक घर के किराए पर एचआरए एग्जेम्प्शन क्लेम कर सकता है। इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है कि जिस घर पर एचआरए एग्जेम्प्शन क्लेम किया जा रहा है उसका उस शहर में होना जरूरी है, जहां कंपनी का ऑफिस है।
उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि मयंक जैन जिन दो घरों का किराया चुकाते हैं, उनमें से किसी घर के किराए पर वह एचआरए क्लेम कर सकते हैं। एचआरए का नियम बनाते वक्त वर्क फ्रॉम होम का चलन नहीं रहा होगा। इसके चलते लोगों को दो शहरों में घर किराए पर लेना पड़ता है।
जैन ने कहा कि जहां तक होम लोन पर डिडक्शन का सवाल है तो जैन दोनों घरों के होम लोन पर चुकाए जाने वाले कुल इंटरेस्ट पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। लेकिन, वह उस वित्त वर्ष में हाउस प्रॉपर्टी हेड के तहत 2 लाख रुपये तक के लॉस को दूसरी इनकम के साथ एडजस्ट कर सकेंगे। अगर यह लॉस एडजस्ट नहीं होता है तो इसे अगले 8 सालों तक हाउस प्रॉपर्टी इनकम के साथ एडजस्ट करने के लिए कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर जैन इनकम टैक्स की नई रीजीम का इस्तेमाल करते हैं तो हाउस प्रॉपर्टी इनकम से हुए लॉस को दूसरे हेड की इनकम के साथ सेट-ऑफ करने या कैरी फॉरवर्ड करने की इजाजत नहीं होगी जिससे वह दोनों घरों को मिलाकर होम लोन पर उस वित्त वर्ष के दौरान सिर्फ टैक्सेबल रेंट की सीमा तक इंटरेस्ट क्लेम कर सकते हैं। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि नई टैक्स रीजीम में खुद के इस्तेमाल वाले घर के मामले में डिडक्शन की इजाजत नहीं है।