Tax Harvesting से घटा सकते हैं अपनी टैक्स लायबिलिटी, 31 मार्च तक है मौका

टैक्स हार्वेस्टिंग (Tax Harvesting) ऐसी स्ट्रेटेजी है, जिसका इस्तेमाल कैपिटल गेंस खासकर शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर कैपिटल गेंस टैक्स को घटाने में मदद मिलती है। इस स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल वित्त वर्ष खत्म होने से पहले यानी 31 मार्च से पहले करना होता है

अपडेटेड Feb 25, 2026 पर 1:48 PM
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टैक्स हार्वेस्टिंग दो तरह का होता है-टैक्स गेन हार्वेस्टिंग और टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग।

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 खत्म होने जा रहा है। नया वित्त वर्ष शुरू होने से पहले टैक्स हार्वेस्टिंग से आप अपनी टैक्स लायबिलिटी घटा सकते हैं। यह काम आपको 31 से पहले पहले करना होगा। 1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष (2026-27) शुरू हो जाएगा। सवाल है कि टैक्स हार्वेस्टिंग क्या है, इसका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है?

टैक्स हार्वेस्टिंग (Tax Harvesting) ऐसी स्ट्रेटेजी है, जिसका इस्तेमाल कैपिटल गेंस खासकर शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर कैपिटल गेंस टैक्स को घटाने में मदद मिलती है। इस स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल वित्त वर्ष खत्म होने से पहले यानी 31 मार्च से पहले करना होता है। इसका मतलब है कि आपको 31 मार्च तक सभी कैपिटल गेंस या कैपिटल लॉस बुक करना होगा। यह दो तरह का होता है-टैक्स गेन हार्वेस्टिंग और टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग। इन दोनों का इस्तेमाल मार्केट की अलग-अलग स्थितियों में टैक्स के बाद रिटर्न को बढ़ाने के लिए होता है।

टैक्स-गेन हार्वेस्टिंग स्ट्रेटेजी

इस स्ट्रेटेजी में इनवेस्टर टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट के तहत 12 महीने से ज्यादा पुराने इक्विटी म्यूचुअल फंड्स या शेयरों में निवेश को बेचकर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) बुक करता है। उसके बाद पैसे को फिर से इनवेस्ट किया जाता है। इससे पर्चेज प्राइस बदल जाती है और भविष्य में इनवेस्टर की टैक्स-लायबिलिटी घट जाती है।


टैक्सपेयर्स को हर वित्त वर्ष में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस की टैक्स-फ्री लिमिट का फायदा उठाने की कोशिश करनी चाहिए। शाह एसोसिएट्स के पार्टनर (टैक्स) गोपाल बोहरा ने कहा, "अगर आप वित्त वर्ष के दौरान लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस की 1.25 लाख रुपये की टैक्स-फ्री लिमिट का फायदा नहीं उठाते हैं तो यह बेकार चला जाता है। टैक्सपेयर्स बगैर किसी टैक्स लायबिलिटी के 1.25 लाख रुपये तक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस का फायदा उठा सकते हैं।"

टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग स्ट्रेटेजी

इस स्ट्रेटेजी में शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स लॉस में बेची जाती है। फिर कैपिटल लॉस का इस्तेमाल टैक्सेबल कैपिटल गेंस के साथ एडजस्ट किया जा सकता है। इससे कुल टैक्स लायबिलिटी घट जाती है। बोहरा ने कहा, "इस तरह के लॉस को बुक करने से दूसरे कैपिटल गेंस पर टैक्स लायबिलिटी घट जाती है। हालांकि, यह ध्यान में रखना होगा कि लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को सिर्फ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के साथ एडजस्ट किया जा सकता है।"

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दोनों ही स्ट्रेटेजी का मकसद टैक्स लायबिलिटी को कम करना है। टैक्स एक्सपर्टस इनवेस्टर्स को उसी सिक्योरिटीज में दोबारा इनवेस्ट करने से बचने की सलाह देते हैं, जिसमे उन्होंने पहले इनवेस्ट किया था। इससे उन स्टॉक्स को पोर्टफोलियो से बाहर किया जा सकता है, जिनका प्रदर्शन कमजोर है। इससे पोर्टफोलियो की रीबैलेंसिंग भी होती है।

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