हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) का मुखिया आम तौर पर परिवार का कोई पुरुष सदस्य होता है। वह परिवार की संपत्ति सहित दूसरे बड़ फैसले लेता है। हालांकि, पिछले दो दशकों में इस स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव आया है। खासकर एचयूएफ में महिलाओं के अधिकार के मामले में बड़ा बदलाव आया है। सवाल है कि क्या एक महिला एचयूएफ का कर्ता बन सकती है?
हिंदू सक्सेशन (अमेंडमेंट) एक्ट, 2005 के बाद आया बदलाव
इस सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि महिला समान उत्तराधिकारी (coparcener) है या सिर्फ एक सदस्य है। यह ऐसा फर्क है जिससे अथॉरिटी, ओनरशिप और टैक्स का निर्धारण होता है। ऐतिहासिक रूप से सिर्फ पुरुष कर्ता हो सकते थे, क्योंकि सिर्फ बेटों को संपत्ति में एक समान हक हासिल था। हिंदू सक्सेशन (अमेंडमेंट) एक्ट, 2005 के बाद यह व्यवस्था बदल गई।
हिंदू अविभाजित परिवार का कर्ता बनने के लिए शर्त
फोर्ट सर्कल की फाउंडर एवं को-मैनेजिंग पार्टनर प्रियंका देसाई ने कहा, "हिंदू सक्सेशन (अमेंडमेंट) एक्ट, 2005 लागू होने से पहले हिंदू अविभाजित परिवार में सिर्फ बेटे को Coparcener माना जाता था और सिर्फ सबसे बड़े (उम्र में) पुरुष सदस्य को कर्ता माना जाता था।" लेकिन, कानून में संशोधन के बाद लड़कियों को जन्म से ही एक समान अधिकार मिल गया। इसके बाद एक बेटी को भी एचयूएफ में एक बेटे के समान अधिकार मिल गया। इसका मतलब है कि अगर बेटी परिवार की सबसे बड़ी सदस्य है तो वह एचयूएफ का कर्ता बन सकती है।
कर्ता के मामले में लैंगिक असमानता खत्म
कानून के जानकारों का कहना है कि इस बदलाव से एचयूएफ के कर्ता के मामले में लैंगिक असमानता खत्म हो गई है। अकॉर्ड ज्यूरिस के मैनेजिंग पार्टनर अलय राजवी ने कहा, "हां, एक महिला कानूनी रूप से एचयूएफ का कर्ता बन सकती है।" कोर्ट ने अपने फैसलों में इसका ध्यान रखा है। कर्ता बनने के लिए सीनियरिटी को आधार माना गया है कि न कि लैंगिक आधार पर इसका निर्धारण किया गया है।
बेटी कर्ता बन सकती है लेकिन पत्नी नहीं
बेटियों को अब बराबर अधिकार मिल गया है, लेकिन पत्नियों को एचयूएफ में अलग कानूनी स्थान हासिल है। सिरील अमरचंद मंगलदास की पार्टनर राधिका गग्गर ने कहा, "सबसे सीनियर Coparcener को कर्ता बनने का अधिकार है, चाहे वह लड़का हो या लड़की हो...लेकिन यह ध्यान में रखने वाली बात है कि किसी Coparcener की पत्नी को समान अधिकार हासिल नहीं है।"
इसकी वजह एचयूएफ मेंबरशिप के काम करने के तरीके में है। देसाई ने कहा, "पत्नी, बहू सिर्फ एचयूएफ की सदस्य हो सकती है जबकि एचयूएफ में जन्म लेना वाले बेटी या बेटा अपने जन्म के आधार पर एचयूएफ में Coparcener हो सकते हैं।" कोपारसर्नर को जन्म के आधार पर अधिकार मिलता है, जबकि पत्नियां शादी के आधार पर परिवार की सदस्य बनती हैं और यह फर्क काफी अहम है।
कर्ता परिवार के एसेट्स के मैनेजर और ट्रस्टी दोनों का काम करता है। कर्ता एचयूएफ का मुखिया होता है। वह परिवार के सभी मामलों को संभालता है। राजवी ने कहा कि कर्ता संपत्ति से जुड़े फैसले लेता है। निवेश से जुड़े फैसले लेता है और कोर्ट और टैक्स अथॉरिटीज के सामने एचयूएफ का प्रतिनिधित्व करता है।