माता-पिता हो गए ऑनलाइन ठगी का शिकार! तुरंत करें ये काम, वरना खाली हो सकता है पूरा अकाउंट

आजकल साइबर ठग सबसे ज्यादा बुजुर्ग लोगों को निशाना बना रहे हैं। कभी बैंक अधिकारी बनकर, कभी KYC अपडेट के नाम पर तो कभी पुलिस और बिजली विभाग का डर दिखाकर ठग मिनटों में लोगों की जिंदगीभर की सेविंग साफ कर देते हैं..

अपडेटेड May 25, 2026 पर 5:16 PM
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आजकल साइबर ठग सबसे ज्यादा बुजुर्ग लोगों को निशाना बना रहे हैं।

आजकल साइबर ठग सबसे ज्यादा बुजुर्ग लोगों को निशाना बना रहे हैं। कभी बैंक अधिकारी बनकर, कभी KYC अपडेट के नाम पर तो कभी पुलिस और बिजली विभाग का डर दिखाकर ठग मिनटों में लोगों की जिंदगीभर की सेविंग साफ कर देते हैं। कई परिवारों को तब पता चलता है जब अकाउंट से लाखों रुपये निकल चुके होते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऑनलाइन फ्रॉड के बाद शुरुआती कुछ घंटे बेहद अहम होते हैं। अगर तुरंत सही कदम उठाए जाएं, तो पैसे बचने या वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ सकती है।

सबसे पहले बैंक अकाउंट को सुरक्षित करें

अगर ठगों ने मोबाइल पर AnyDesk, TeamViewer या कोई screen-sharing ऐप इंस्टॉल करवा लिया है, तो खतरा सिर्फ एक ट्रांजैक्शन तक सीमित नहीं रहता। कई मामलों में साइबर अपराधी घंटों तक फोन की गतिविधि देखते रहते हैं और नए OTP या बैंक मैसेज का इंतजार करते हैं। ऐसी स्थिति में सबसे पहले बैंक को कॉल करें और UPI, डेबिट कार्ड, नेटबैंकिंग और संदिग्ध ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लॉक करवाएं। अगर कोई रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड कराया गया है, तो उसे तुरंत डिलीट कर दें।


इसके साथ ही बैंकिंग पासवर्ड, ईमेल और मोबाइल से जुड़े पासवर्ड भी तुरंत बदल देना चाहिए। कई बार ठग SMS और ईमेल तक पहुंच बना लेते हैं, जिससे बाद में भी अकाउंट खतरे में रह सकता है।

देर करना पड़ सकता है भारी

ऑनलाइन फ्रॉड के बाद सबसे बड़ी गलती होती है देर करना। कई परिवार पहले यह समझने में समय लगा देते हैं कि आखिर हुआ क्या है। कुछ लोग शर्म या डर की वजह से शिकायत दर्ज कराने में भी देर कर देते हैं। लेकिन साइबर एक्सपर्ट साफ कहते हैं कि जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, पैसे बचने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।

ऐसे मामलों में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। इसके अलावा साइबर क्राइम पोर्टल और संबंधित बैंक में भी तुरंत जानकारी देनी जरूरी है।

शिकायत करते समय ये चीजें रखें तैयार

ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट

UPI ID

ठग का मोबाइल नंबर

ट्रांजैक्शन टाइम

बैंक रेफरेंस नंबर

अगर ये जानकारी तुरंत उपलब्ध हो, तो शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

बुजुर्गों पर मानसिक असर को समझना जरूरी

ऑनलाइन ठगी सिर्फ पैसों का नुकसान नहीं करती, बल्कि बुजुर्गों को मानसिक रूप से भी तोड़ देती है। कई लोग खुद को दोष देने लगते हैं और डिजिटल बैंकिंग से डरने लगते हैं। एक्सपर्ट मानते हैं कि ऐसे समय में परिवार का व्यवहार बहुत मायने रखता है। अगर घर वाले गुस्सा करें या मजाक उड़ाएं, तो बुजुर्ग आगे से किसी संदिग्ध कॉल या मैसेज की जानकारी छिपाने लगते हैं।

क्यों बुजुर्ग बन रहे हैं आसान निशाना?

साइबर ठग मानते हैं कि बुजुर्ग लोग जल्दी भरोसा कर लेते हैं और डिजिटल फ्रॉड के नए तरीकों से पूरी तरह परिचित नहीं होते। इसी वजह से पेंशन वैरिफिकेशन, फेक KYC, बिजली बिल, मेडिकल इमरजेंसी और कुरियर स्कैम्स जैसे फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं। कई बार ठग पहले से कुछ निजी जानकारी जुटा लेते हैं, जिससे उनकी बात असली लगने लगती है।

बचाव के लिए क्या करें?

एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि बुजुर्गों के बैंक अकाउंट में ट्रांजेक्शन लिमिट कम रखें, हर ट्रांजैक्शन का SMS अलर्ट चालू रखें और समय-समय पर लिंक्ड डिवाइस चेक करते रहें। आज के समय में सिर्फ पैसे कमाना ही नहीं, बल्कि डिजिटल ठगी से उन्हें सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी हो गया है।

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