देश में 1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष 2025-26 लागू होने जा रहा है। इसके साथ ही इस साल फरवरी में पेश हुए बजट 2025 में हुईं इनकम टैक्स से जुड़ी कई घोषणाएं भी लागू हो जाएंगी। मिडिल क्लास टैक्सपेयर के लिए बजट 2025 की सबसे बड़ी घोषणा रही 12 लाख रुपये तक की सालाना टैक्सेबल इनकम को टैक्स फ्री किया जाना। 75000 रुपये तक के स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ अब नई आयकर व्यवस्था में 12.75 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं भरना होगा। इसके अलावा बजट 2025 में नई आयकर व्यवस्था के तहत टैक्स स्लैब्स में भी बदलाव किए गए थे। इन राहतों के चलते टैक्सपेयर के हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा। आइए जानते हैं इस बारे में डिटेल में...
कैसे टैक्स फ्री बनेगी 12 लाख तक की सालाना टैक्सेबल इनकम
टैक्सपेयर की 12 लाख रुपये तक की सालाना टैक्सेबल इनकम, रिबेट की मदद से टैक्स फ्री हो सकेगी। रिबेट का मतलब है एक लिमिट तक टैक्स माफ कर दिया जाना। स्टैंडर्ड डिडक्शन को भी जोड़ लें तो रिबेट की मदद से 12.75 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं भरना होगा। अभी रिबेट के जरिए नई आयकर व्यवस्था में 7 लाख रुपये तक की सालाना टैक्सेबल इनकम टैक्स फ्री बनाई जा सकती है।
याद रहे कि नया लागू हो रहा फायदा नई आयकर व्यवस्था के साथ ही है। पुरानी आयकर व्यवस्था को अपनाने वालों के लिए अभी भी रिबेट के साथ 5 लाख रुपये तक की टैक्सेबल इनकम ही टैक्स फ्री बन सकती है।
टैक्स स्लैब्स में क्या बदलाव
बजट 2025 में हुई घोषणा के तहत, अब 4 लाख रुपये तक की टैक्सेबल सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा यानि 0 टैक्स रहेगा। 4 से 8 लाख रुपये पर टैक्स 5 प्रतिशत, 8 से 12 लाख रुपये पर 10 प्रतिशत, 12 लाख से 16 लाख रुपये पर 15 प्रतिशत, 16 से 20 लाख रुपये पर 20 प्रतिशत, 20 लाख रुपये से 24 लाख रुपये पर 25 प्रतिशत और 24 लाख रुपये से ऊपर की सालाना आय पर 30 प्रतिशत टैक्स लगेगा।
इनकम टैक्स के मोर्चे पर इन दोनों राहतों को मिलाकर 12 लाख रुपये सालाना टैक्सेबल इनकम वाले टैक्सपेयर को नई आयकर व्यवस्था के तहत नए वित्त वर्ष से टैक्स में 80000 रुपये की फायदा होगा। वहीं 18 लाख रुपये सालाना टैक्सेबल इनकम पर टैक्स में 70000 रुपये और 25 लाख रुपये सालाना टैक्सेबल इनकम पर टैक्स में 1.10 लाख रुपये का फायदा होगा।
सीनियर सिटीजन के लिए ब्याज से हुई आय पर टैक्स डिडक्शन की लिमिट दोगुनी करके 1 लाख रुपये की जाएगी। इसके अलावा बजट में किराए पर TDS की सीमा को भी बढ़ाकर 6 लाख रुपये करने का प्रस्ताव किया गया। यह लिमिट वर्तमान में 2.4 लाख रुपये है।