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Income Tax: 31 मार्च से पहले जरूर पूरे कर लें ये काम, नहीं तो चुकाना पड़ेगा लाखों रुपये टैक्स

टैक्सपेयर्स को यह समझने की जरूरत है कि यूनियन बजट 2025 में इनकम टैक्स में जो राहत मिली है, वह अगले वित्त वर्ष से लागू होगी। इस वित्त वर्ष के लिए टैक्स-सेविंग्स के लिए डेडलाइन 31 मार्च है। इस तारीख तक आपने टैक्स-सेविंग्स के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए तो आपको लाखों रुपये टैक्स चुकाना पड़ सकता है

Rakesh Ranjanअपडेटेड Feb 20, 2025 पर 10:18 AM
Income Tax: 31 मार्च से पहले जरूर पूरे कर लें ये काम, नहीं तो चुकाना पड़ेगा लाखों रुपये टैक्स
सैलरीड टैक्सपेयर के पास हर वित्त वर्ष में इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम और नई रीजीम के बीच स्विच करने का विकल्प है।

सरकार ने यूनियन बजट 2025 में इनकम टैक्स में बड़ी राहत का ऐलान किया। इससे टैक्सपेयर्स काफी खुश हैं। लेकिन, टैक्स के नियमों में ये बदलाव अगले वित्त वर्ष से लागू होंगे। आपको वित्त वर्ष 2024-25 का टैक्स प्लान पुराने नियमों के हिसाब से करना होगा। इस वित्त वर्ष के खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। इसलिए टैक्स-सेविंग्स के लिए आपके पास ज्यादा समय नहीं बचा है। अगर आपने 31 मार्च से पहले टैक्स-सेविंग्स के लिए कदम नहीं उठाए तो आपको काफी ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ सकता है। मनीकंट्रोल आपको उन तरीकों के बारे में बता रहे हैं, जो टैक्स-सेविंग्स में आपकी काफी मदद करेंगे।

इनकम टैक्स की सही रीजीम का चुनाव

सैलरीड टैक्सपेयर के पास हर वित्त वर्ष में इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम (Income tax old regime) और नई रीजीम के बीच स्विच करने का विकल्प है। टैक्स रीजीम में बदलाव इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त भी किया जा सकता है। आम तौर पर इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई है। पुरानी रीजीम में PPF, ELSS सहित करीब एक दर्जन ऑप्शंस में निवेश कर डिडक्शन क्लेम करने की सुविधा मिलती है। लेकिन, इस रीजीम में टैक्स के रेट्स ज्यादा हैं। नई रीजीम में ज्यादातर डिडक्शन क्लेम करने की सुविधा नहीं है। लेकिन, टैक्स के रेट्स कम हैं। इसलिए अगर सैलरीड टैक्सपेयर हैं तो सोचसमझ कर नई और पुरानी रीजीम में से किसी एक का चुनाव करें। अगर आपको इसमें दिक्कत आ रही है तो आप टैक्स कंसल्टेंट की मदद ले सकते हैं।

पुरानी रीजीम में डिडक्शन का दावा

अगर आप इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। इसके अलावा आप NPS में अतिरिक्त 50,000 रुपये का निवेश कर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। आप इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80डी के तहत 75,000 रुपये तक के डिडक्शन का दावा कर सकते हैं। कोई व्यक्ति खुद और परिवार के लिए हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर 25,000 रुपये के डिडक्शन का दावा कर सकता है। इसके अलावा वह अपने बुजुर्ग माता-पिता के लिए हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर 50,000 रुपये डिडक्शन का दावा कर सकता है। सेक्शन 80सी और 80डी मिलाकर आप 2.25 लाख रुपये डिडक्शन का दावा कर सकते हैं। इसमें एनपीएस का अतिरिक्त 50,000 रुपये शामिल कर दे तो यह अमाउंट 2.75 लाख रुपये हो जाता है।

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