इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 54ईसी जमीन या बिल्डिंग बेचने पर हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर एग्जेम्प्शन क्लेम करने की इजाजत देता है। इस बारे में गाजियाबाद के मोहन सक्सेना का एक सवाल है। उन्होंने बताया है कि उन्होंने इस साल पहले ही कैपिटल गेंस बॉन्ड्स में 50 लाख रुपये का निवेश किया है। उनका सवाल है कि क्या वह सेक्शन 54ईसी के तहत कैपिटल गेंस बॉन्ड्स में 31 मार्च, 2026 से पहले और 50 लाख रुपये इनवेस्ट कर एग्जेम्प्शन क्लेम कर सकते हैं? मनीकंट्रोल ने यह सवाल टैक्स एक्सपर्ट और सीए बलवंत जैन से पूछा।
जैन ने कहा कि Income Tax एक्ट के सेक्शन 54ईसी के तहत जमीन या बिल्डिंग बेचने से हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर एग्जेप्शन क्लेम करने की इजाजत है। इसके लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस को फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस की तरफ से इश्यू किए गए कैपिटल गेंस बॉन्ड्स में इनवेस्ट करना होगा। अभी REC, NHAI, PFC, RFC, HUDCO और IREDA को ऐसे बॉन्ड्स इश्यू करने की इजाजत है।
कैपिटल गेंस के इनवेस्ट करने की शर्तें
उन्होंने कहा कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के अमाउंट को इनवेस्ट करने के लिए दो शर्तें हैं। पहला, एक फाइनेंशियल ईयर में इसके लिए 50 लाख रुपये की लिमिट है। सेक्शन 54ईसी के तहत एक वित्त वर्ष में इस लिमिट से ज्यादा कैपिटल गेंस बॉन्ड्स में निवेश करने पर एग्जेम्प्शन क्लेम करने की इजाजत नहीं है। दूसरा, इन बॉन्ड्स में एक वित्त वर्ष में इनवेस्टमेंट 50 लाख रुपये से ज्यादा नहीं हो सकता। चूंकि मोहन सक्सेना इस वित्त वर्ष में पहले ही इन बॉन्ड्स में 50 लाख रुपये का निवेश कर चुके हैं, जिससे वे इस वित्त वर्ष में और 50 लाख रुपये का निवेश कर एग्जेम्प्शन क्लेम नहीं कर सकते।
इनवेस्टमेंट की दोनों शर्तों का पालन जरूरी
जैन ने कहा कि हालांकि, छह महीने का इनवेस्टमेंट विंडो अगले वित्त वर्ष में एक्सटेंड होता है, जिससे सक्सेना अगले साल इन बॉन्ड्स में 50 लाख रुपये का निवेश कर सकते हैं। लेकिन, यह घर बेचने की तारीख से छह महीने के अंदर होना चाहिए। ऐसा करने से वह इनवेस्टमेंट लिमिट से जुड़ी दोनों शर्तों का पालन कर सकेंगे और एग्जेम्प्शन के लिए भी एलिजिबल होंगे।