Income Tax की नई और पुरानी रीजीम में से किसी एक को सेलेक्ट करने से पहले ये बातें जान लीजिए, होगी सेलेक्शन में आसानी

इनमक टैक्स की ओल्ड और न्यू टैक्स रीजीम के अपने-अपने फायदे हैं। इसलिए हर टैक्सपेयर को अपने टैक्स स्लैब, इनवेस्टमेंट, टैक्स सेविंग्स, इनकम लेवल, टैक्स रेट को देखने के बाद ही इस बारे में फैसला लेना चाहिए

अपडेटेड May 15, 2023 पर 2:28 PM
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टैक्सपेयर दोनों में से किसी एक रीजीम को सेलेक्ट कर सकता है।

इनकम टैक्स (Income Tax) की नई और पुरानी रीजीम में से आपने किसी एक को सेलेक्ट कर लिया है? अगर अब तक नहीं किया है तो इसे जल्द सेलेक्ट करना ठीक रहेगा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2020 में इनकम टैक्स की नई रीजीम की शुरुआत की थी। इसमें टैक्स के रेट्स कम हैं। लेकिन, इसमें सेक्शन 80सी के तहत टैक्स डिडक्शन की इजाजत नहीं है। टैक्सपेयर दोनों में से किसी एक रीजीम को सेलेक्ट कर सकता है। इस साल पेश बजट में वित्तमंत्री ने एक बड़ा ऐलान यह किया कि FY24 से नई टैक्स रीजीम को डिफॉल्ट रीजीम बना दिया। इसका मतलब है कि जो टैक्सपेयर्स ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करना चाहते हैं, उन्हें इसके बारे में बताना होगा। नहीं बताने पर यह माना जाएगा कि टैक्सपेयर नई रीजीम का इस्तेमाल करेगा।

नई और पुरानी रीजीम में से किसी एक का चुनाव करना उन टैक्सपेयर्स के लिए बहुत जरूरी है, जो नौकरी करते हैं। इसकी वजह है कि एंप्लॉयी जिस कंपनी में नौकरी करता है, उसका टैक्स डिपार्टमेंट सैलरी पर TDS काटता है। इसलिए उसके लिए जानना जरूरी है कि एंप्लॉयी ने नई और पुरानी रीजीम में से किसे सेलेक्ट किया है। वह उसी हिसाब से टीडीएस काटती है। ऐसे टैक्सपेयर्स जो इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स-सेविंग्स करते हैं उनके लिए अब भी पुरानी रीजीम फायदेमंद है। फिर, भी दोनों में से किसी एक को सेलेक्ट करने से पहले निम्नलिखित बातें जान लेनी जरूरी है:

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टैक्स रेट्स और स्लैब्स

आपको सबसे पहले पुरानी और नई रीजीम में टैक्स रेट्स और स्लैब्स को चेक कर लेना चाहिए। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर इसके लिए एक कैलकुलेटर मौजूद है। इससे आपको पता चल जाएगा कि किस टैक्स रीजीम में आपको कम टैक्स चुकाना पड़ेगा। इससे आपको दोनों में से किसी एक को सेलेक्ट करने में मदद मिलेगी।

डिडक्शंस और एग्जेम्पशंस

पुरानी टैक्स रीजीम में अलाउन्स और डिडक्शंस का फायदा मिलता है। नई टैक्स रीजीम में टैक्सपेयर्स को सिर्फ स्टैंडर्ड डिडक्शंस का फायदा मिलता है, जो एक फाइनेंशियल ईयर में 50,000 रुपये है। इसलिए अगर आप डिडक्शंस का फायदा उठाना चाहते हैं तो आपके लिए ओल्ड रीजीम सही रहेगी। अगर आप किसी तरह की टैक्स-सेविंग्स नहीं करते हैं तो आपके लिए नई रीजीम बेहतर रहेगी।

कैलकुलेशन के आसान नियम

हर टैक्स रीजीम में टैक्स के कैलकुलेशन के नियम अलग-अलग हैं। नई टैक्स रीजीम में टैक्स का कैलकुलेशन अपेक्षाकृत आसान है। पुरानी रीजीम में कई तरह की बातों का ध्यान कैलकुलेशन में रखना पड़ता है। इसलिए यह नई के मुकाबले थोड़ा जटिल है। जो टैक्सपेयर्स कैलकुलेशन में जटिलता नहीं चाहते हैं, उनके लिए नई टैक्स रीजीम ठीक रहेगी।

निवेश और सेविंग्स पर असर

अगर आप पहले से पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि, म्यूचुअल फंड की टैक्स स्कीम जैसे इनवेस्टमेंट ऑप्शंस में निवेश करते आ रहे हैं तो आपके लिए पुरानी रीजीम बेहतर होगी। इसकी वजह यह है कि आपको अपने निवेश पर टैक्स बेनेफिट मिलेगा। साथ ही लंबी अवधि में निवेश जारी रखने से आपके लिए अच्छा फंड तैयार हो जाएगा।

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